प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ नामक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया और इसे संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (NGT) का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। सम्मेलन का मुख्य विषय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई गतिशीलता और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करना था, जिसके तहत विभिन्न विकासों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस सम्मेलन में भारत के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों और जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
मोदी जी ने अपने भाषण में एक महत्वपूर्ण दावा किया कि भारत ने पिछले वर्ष पेरिस में आयोजित COP-21 समिट में की गई सभी पर्यावरण संबंधी कमिटमेंट समय सीमा तक पूरी कर दी हैं। उनके अनुसार, G20 में भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसने पेरिस कॉप-21 में किए गए सभी वचनों को समय पर पूरा करते हुए दिखाया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर डाली जाती है, लेकिन भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी विश्व के औसत से आधे से कम है। इस बात का जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की व्यक्तिगत उत्पत्ति की स्थिति को देखते हुए विकासशील देशों पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत विश्व में पर्यावरण सुरक्षा के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। उनके भाषण के दौरान पेरिस कॉप-21 सम्मेलन और उसके लक्ष्यों को भी याद किया गया, जहां भारत ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने लक्ष्य तय किए थे। मोदी के भाषण का एक प्रमुख हिस्सा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक जिम्मेदारियों और भारत के पर्यावरण संबंधी प्रयासों की समीक्षा था। उन्होंने यहां यह भी दर्ज किया कि विकासशील देशों पर कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी डालने के संदर्भ में भारत की व्यक्तिगत उत्पत्ति की स्थिति को भी देखा जाना चाहिए।
दरअसल, पेरिस में 2015 में आयोजित कॉप-21 सम्मेलन में भारत ने पर्यावरण को लेकर तीन बड़े लक्ष्य तय किए थे। पहला लक्ष्य 2030 तक 2005 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता 33 से 35 प्रतिशत तक कम करने का था। दूसरे लक्ष्य के तहत 2030 तक देश की कुल बिजली क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ऊर्जा से तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। तीसरे लक्ष्य में पेड़ों और जंगलों को बढ़ाकर 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता विकसित करने की बात की गई थी। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारत ने विभिन्न कदम उठाए हैं।
मोदी ने सम्मेलन में यह भी कहा कि भारत विश्व में पर्यावरण सुरक्षा के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। उनके भाषण के दौरान पेरिस कॉप-21 सम्मेलन और उसके लक्ष्यों को भी याद दिया गया, जहां भारत ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने लक्ष्य तय किए थे।
पेरिस कॉप-21 जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के तहत आयोजित 21वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था। यह सम्मेलन 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ था। इसमें लगभग 195 देशों ने हिस्सा लिया और पेरिस समझौता अपनाया गया। पेरिस समझौते का एक प्रमुख उद्देश्य विश्व के औसत तापमान में वृद्धि को 2 सेल्सियस डिग्री से काफी नीचे बनाए रखना और 1.5 सेल्सियस डिग्री तक सीमित करने की कोशिश करना था। इसके तहत प्रत्येक देश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने-अपने लक्ष्य तय किए।
भारत के तहत किए गए लक्ष्यों में कार्बन तीव्रता में कमी, गैर-जीवाश्म ऊर्जा से बिजली क्षमता का विस्तार और वृक्षारोपण के माध्यम से कार्बन अवशोषण क्षमता को बढ़ाना शामिल था। मोदी ने इन लक्ष्यों को समय पर पूरा किए जाने का दावा करते हुए यह भी बताया कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन विश्व औसत की तुलना में आधे से कम है।
इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। सम्मेलन का विषय ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स’ था, जिसके तहत पर्यावरण और जलवायु संबंधी विकासों पर चर्चा की गई। NGT मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संबंधी मामलों में आसानी से न्याय पहुंचाने की दिशा में कदम उठाया गया।
पेरिस समझौते के तहत विश्व की तरह भारत भी कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लक्ष्यों को पूरा करने की प्रक्रिया में रहा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने भारत के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को उजागर करते हुए कहा कि देश वैश्विक पर्यावरण सुरक्षा में अपना योगदान दे रहा है। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने लक्ष्यों को पूरा करने की प्रक्रिया में रहते हुए वैश्विक पर्यावरण सुरक्षा में अपना योगदान देने की प्रतिबद्धता दिखाई।














