सरकार ने 1966 के सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि नियुक्ति के शुरुआती समय में कर्मचारियों को प्रशिक्षण और दक्षता के आकलन से गुजरना होता है। इसी आधार पर चरणबद्ध भुगतान की व्यवस्था की गई थी। राज्य ने यह भी तर्क दिया है कि सेवा शर्तों से जुड़े नीतिगत फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए, जब तक कोई स्पष्ट कानूनी उल्लंघन न हो। दूसरे राज्यों की व्यवस्था का भी दिया उदाहरण सरकार ने छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में प्रोबेशन के दौरान स्टाइपेंड या कम वेतन की व्यवस्था का उल्लेख किया है। हालांकि छत्तीसगढ़ ने 2023 में यह व्यवस्था समाप्त कर 100% वेतन लागू कर दिया था, लेकिन पुराने समय का एरियर नहीं दिया गया। हाई कोर्ट ने दो बार कर्मचारियों के पक्ष में दिया फैसला प्रोबेशन के दौरान कम वेतन देने का मामला पहले भी हाई कोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में जा चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6% सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बाद 9 सितंबर को डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70-80-90% वेतन व्यवस्था को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने नियुक्ति की तारीख से कर्मचारियों को 100% वेतन देने का निर्देश दिया। अब राज्य सरकार ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह खबर भी पढ़ें… 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगी पूरी सैलरी जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारियों को 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान देने की व्यवस्था निरस्त कर दी है। इससे मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिली है। कोर्ट ने कहा- जब कर्मचारी से पद के अनुरूप पूरा काम लिया जा रहा है, तो केवल प्रोबेशन पर होने के आधार पर उसे कम वेतन नहीं दिया जा सकता।पूरी खबर पढ़ें
प्रोबेशन में 100% वेतन के आदेश को SC में चुनौती:सरकार ने कहा-नियम बनाने का अधिकार हमारा; हाईकोर्ट ने पूरा वेतन देने को कहा था
सरकार ने 1966 के सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि नियुक्ति के शुरुआती समय में कर्मचारियों को प्रशिक्षण और दक्षता के आकलन से गुजरना होता है। इसी आधार पर चरणबद्ध भुगतान की व्यवस्था की गई थी। राज्य ने यह भी तर्क दिया है कि सेवा शर्तों से जुड़े नीतिगत फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए, जब तक कोई स्पष्ट कानूनी उल्लंघन न हो। दूसरे राज्यों की व्यवस्था का भी दिया उदाहरण सरकार ने छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में प्रोबेशन के दौरान स्टाइपेंड या कम वेतन की व्यवस्था का उल्लेख किया है। हालांकि छत्तीसगढ़ ने 2023 में यह व्यवस्था समाप्त कर 100% वेतन लागू कर दिया था, लेकिन पुराने समय का एरियर नहीं दिया गया। हाई कोर्ट ने दो बार कर्मचारियों के पक्ष में दिया फैसला प्रोबेशन के दौरान कम वेतन देने का मामला पहले भी हाई कोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में जा चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6% सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बाद 9 सितंबर को डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70-80-90% वेतन व्यवस्था को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने नियुक्ति की तारीख से कर्मचारियों को 100% वेतन देने का निर्देश दिया। अब राज्य सरकार ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह खबर भी पढ़ें… 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगी पूरी सैलरी जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारियों को 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान देने की व्यवस्था निरस्त कर दी है। इससे मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिली है। कोर्ट ने कहा- जब कर्मचारी से पद के अनुरूप पूरा काम लिया जा रहा है, तो केवल प्रोबेशन पर होने के आधार पर उसे कम वेतन नहीं दिया जा सकता।पूरी खबर पढ़ें




