एमपी के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिल गई है। 16 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। फोटो में वाहन नंबर भी स्पष्ट नहीं है और यह प्रमाण नहीं मिला कि तिरंगा मंत्री के निर्देश पर लगाया गया था। मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि यात्रा के दौरान मंत्री खुली जीप में सवार थे और जीप के बोनट पर रखा राष्ट्रीय ध्वज उनके पैरों को छू रहा था। इसी आधार पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। इस अधिनियम की धारा 2 में स्पष्ट उल्लंघन है कि वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य भाग पर राष्ट्रीय ध्वज को ढकना या इस प्रकार रखना गलत है। यह कृत्य तिरंगे झंडे की गरिमा को प्रभावित करता है। यह अपराध है, जिसमें तीन वर्ष तक का कारावास का प्रावधान है। मार्च में कोर्ट ने जारी किया था नोटिस परिवादी ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के सर्वोच्च न्यायालय के उस अभिनिर्णय का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। इस परिवाद पर मार्च 2026 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने पूछा था कि राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए। परिवादी ने फोटो, मीडिया रिपोर्ट और अधिकारियों को दी गई शिकायतों की प्रतियां भी पेश की थीं। कोर्ट ने साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना सुनवाई में कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद परिवाद खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि पेश फोटो में वाहन का नंबर दिखाई नहीं देता। साथ ही यह प्रमाण भी नहीं मिला कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था, वह सरकारी या मंत्री का निजी वाहन था अथवा तिरंगा मंत्री के निर्देश पर लगाया गया था। ऐसे में परिवाद के आधार पर आगे कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं पाया गया। थाना प्रभारी ने शिकायत लेने से इंकार किया परिवादी ने कोर्ट को बताया कि इस घटना की शिकायत थाना गाडरवारा में की है, लेकिन पुलिस ने मंत्री के पद होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, नरसिंहपुर को भी कई बार लिखित शिकायतें भेजी गईं, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई और जब पंजीकृत डाक से पुलिस थाना प्रभारी गाडरवारा को शिकायत भेजी गई तो उन्होंने लेने से अस्वीकार कर दिया जो कि उनके वैधानिक कर्तव्यों के विपरीत है। ये खबर भी पढ़िए… परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस एमपी के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री के खिलाफ जबलपुर कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। मामला तिरंगा ध्वज के अपमान से जुड़ा हुआ है, जिस पर परिवाद दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि मंत्री राव ने रैली के दौरान अपनी खुली जीप में तिरंगा ध्वज को बोनट पर चिपकाया था। पढ़ें पूरी खबर…