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महू गैंगरेप के दोषियों को 5 पॉइंट पर सजा: कोर्ट ने कहा- ये समाज में रहने लायक नहीं; आर्मी अफसर की गर्लफ्रेंड से हुआ था रेप – Madhya Pradesh News


महू गैंगरेप केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 24 मार्च को पांचों आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से कोर्ट में अपने बचाव में कई दलीलें दी गई थीं। बचाव पक्ष के वकीलों ने डीएनए रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए थे। ये तक कहा कि आर

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कोर्ट ने इस सभी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए आरोपियों को सजा सुनाई और टिप्पणी की-

आरोपी समाज में रहने लायक नहीं है। वे बाहर रहेंगे तो फिर ऐसी वारदात की संभावना है।

बता दें पिछले साल 10 सितंबर को इंदौर के पास महू के जामगेट पर आर्मी अफसर की गर्लफ्रेंड से गैंगरेप की वारदात हुई थी। पुलिस ने 48 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी कर एक महीने बाद 12 अक्टूबर को कोर्ट में चालान पेश किया था। कोर्ट में आरोपियों की तरफ से रखे गए तर्क किस तरह से खारिज हुए? पीड़ितों ने कोर्ट के सामने क्या कहा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

5 पॉइंट्स में जानिए आरोपियों के तर्क कोर्ट में कैसे हुए खारिज

पहला तर्क: पीड़िता का जब रेप हुआ तो घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। उसकी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

खारिज कैसे हुआ: कोर्ट में दलील दी गई कि पीड़िता का साथी कौशल सिंह घटना के समय उससे कुछ दूरी पर था। ये सही है कि पीड़िता उसे दिखाई नहीं दे रही थी,लेकिन उसने अपने बयान में कहा है कि रेप के दौरान वह चिल्ला रही थी, मदद मांग रही थी। साथ ही पीड़िता के बयान से भी साफ है कि उसके साथ रेप हुआ है। पीड़िता के बयान पर भरोसा किया जा सकता है।

दूसरा तर्क : पीड़िता ने बताया कि हर आरोपी ने उसके साथ बलात्कार नहीं किया, ऐसे में ये सामूहिक बलात्कार का मामला साबित नहीं होता।

खारिज कैसे हुआ: कोर्ट में कहा गया – सामूहिक बलात्कार के मामले में ये जरूरी नहीं कि प्रत्येक आरोपी के बारे में रेप से जुड़े सबूत दिए जाए। पीड़िता ने बताया कि अनिल और रितेश ने रेप किया, लेकिन अन्य आरोपी घटना में उनका सहयोग कर रहे थे। इससे साफ हो जाता है कि आरोपियों का सामान्य उद्देश्य पीड़िता के साथ रेप करने का था।

तीसरा तर्क: आरोपियों की शिनाख्त सही तरीके से नहीं की गई। घटना के समय मौके पर अंधेरा था। पीड़िता उन्हें पहचान नहीं पाई थी।

खारिज कैसे हुआ: कोर्ट ने कहा- चारों पीड़ितों ने उपजेल में जाकर आरोपियों की शिनाख्ती की है। पीड़िता करीब दो घंटे तक आरोपियों के साथ रही। आरोपियों को देखने और पहचानने का उसे पर्याप्त अवसर मिला है। ये नहीं मान सकते है कि शिनाख्ती की कार्रवाई में कोई गड़बड़ी है।

चौथा तर्क: दोनों सेना के अधिकारी और उनकी महिला मित्र आपत्तिजनक स्थिति में थे। सैन्य अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई से बचाने के लिए झूठा केस दर्ज कराया है।

खारिज कैसे हुआ: कोर्ट ने कहा- यह नहीं माना जा सकता है कि मात्र सैन्य अधिकारी होने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को रोकने के लिए ऐसा हुआ। पीड़िता अपनी खुद की प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर आरोपियों के खिलाफ झूठा केस दर्ज क्यों करवाएगी?

आरोपियों ने पिस्टल की जब्ती पर उठाए सवाल जांच अधिकारी लोकेंद्र सिंह ने कोर्ट को बताया कि आरोपी रितेश ने पिस्टल और कारतूस की जानकारी दी थी। रितेश ने उसकी बाइक की चाबी दी थी। बाइक की डिग्गी को जब खोला गया तो उसमें सफेद कलर की थैली में लिपटी हुई एक देसी पिस्टल और एक जिंदा कारतूस मिला था।इस पर आरोपियों के वकील की तरफ से तर्क दिया गया-

सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की गवाही के आधार पर रितेश के कब्जे से पिस्टल और कारतूस की जब्ती प्रमाणित नहीं मानी जा सकती है।

कोर्ट ने कहा-

पीड़िता सहित उसके साथियों ने भी अपने बयान में घटना के दौरान आरोपी रितेश के पास पिस्टल होना बताया है। पुलिस अधिकारी और पीड़ितों के बयान में कोई विरोधाभास नहीं है। जिससे कि उनके बयानों पर भरोसा न किया जाए।

अब जानिए पीड़ितों ने कोर्ट में क्या कहा….

1. बिना अनुमति के फायरिंग रेंज में गए थे सुनवाई के दौरान दोनों सैन्य अधिकारी, उनकी महिला मित्र और पीड़िता ने ये कबूल किया कि चारों सेना की फायरिंग रेंज में बिना अनुमति के गए थे। कोर्ट ने इस पर कहा कि किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में सेना की बिना अनुमति के जाने पर इनके खिलाफ संबंधित विभाग या संस्था के कार्रवाई करना एक अलग प्रक्रिया है।

इस आधार पर ही यह नहीं माना जा सकता है कि चारों के साथ ये घटना ही नहीं हुई थी। सिर्फ इस बात से मामला संदेहास्पद नहीं हो जाता है। रेप के बाद पीड़िता ने पहाड़ी से उतरने के दौरान अपने साथी को बताया था कि उसके साथ रेप हुआ है।

2. पीड़िता बोली – सिर पर पिस्टल रखकर कहा कपड़े उतारो पीड़िता ने कोर्ट में बताया कि जब मेरे दोनों साथी पैसे लेने के लिए कार से महू जाने के लिए निकल गए तब सभी आरोपी अनिल, रितेश, रोहित, पवन, सचिन और एक अन्य मुझे और मेरे दोस्त (सैन्य अधिकारी) को लेकर पहाड़ी पर गए। वहां मुझे उससे अलग कर दिया, वहां से मैं उसे देख नहीं पा रही थी।

इसके बाद आरोपी रितेश ने उसके सिर पर पिस्टल लगाकर यह कहा कि यदि उसने अपने कपड़े नहीं उतारे तो वह उसे व उसके साथियों को जान से मार देगा। आरोपी अनिल ने भी उससे कहा था कि रितेश जो कह रहा है वह चुपचाप करो वर्ना वह उसके साथी को जान से मार देगा।

आरोपी अनिल और रितेश ने जबरदस्ती उसके कपड़े उतारे और रेप किया। रेप करने के बाद दोनों आरोपियों ने उसे दोस्त के पास भेज दिया था।

3.दोस्त बोला- पीड़िता ने बताया कि उसके साथ रेप हुआ पीड़िता के बयान के समर्थन में उसके आर्मी अफसर दोस्त ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों ने उसे और पीडितों को पहाड़ी पर अलग-अलग बैठा दिया था। घटना के चार-पांच मिनट बाद उसे पीड़ित की आवाज सुनाई दे रही थी। जो बार-बार कह रही थी कि मेरे साथ ऐसा मत करो।

बाद में पीड़िता ने उसे यह बताया था कि दोनों आरोपियों ने उसके साथ रेप किया है। महू से वापस लौटने के बाद पीड़िता ने अपने बाकी दो साथियों को भी बताया था कि उसके साथ आरोपियों ने रेप किया है।

अब जानिए कैसे पकड़े गए थे गैंगरेप के दोषी पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक दोषियों की पहचान करने की चुनौती थी। जामगेट पर न तो कोई सीसीटीवी लगे थे और न ही रात के वक्त किसी ने भी वारदात होते नहीं देखी थी। ऐसे में पुलिस ने बड़गोंदा थाने में पिछले 10 सालों में पदस्थ टीआई से हिस्ट्री शीटर्स की फोटो मंगाई। इनमें से एक फोटो मुख्य दोषी अनिल की थी।

ये फोटो आर्मी के ट्रेनी अफसर को दिखाई गई। उसने तत्काल ही अनिल को पहचान लिया। इसके बाद गैंगरेप की पीड़िता ने भी इसकी पुष्टि की। पुलिस ने 12 सितंबर को अनिल को मानपुर से गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के आधार पर उसके गांव के रहने वाले पवन को भी गिरफ्तार किया।

अनिल से पूछताछ में पता चला कि गैंगरेप में रितेश भी शामिल था। कट्‌टा दिखाकर उसी ने धमकाया था। बाद में पुलिस ने रितेश और सबसे आखिरी में संदीप, रोहित सिंह गीरवाल और सचिन मकवाना को एक सरपंच की मदद से पकड़ा।

महू का जामगेट जहां 10 सितंबर 2024 को वारदात हुई थी।



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