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रक्षा खरीद नियमों में बड़ा बदलाव: ₹3,000 करोड़ से ऊपर के सौदों के लिए सीसीएस मंजूरी छूट मिल सकती है, मंत्रालय स्तर पर फैसला तेजी से

सरकार रक्षा खरीद प्रक्रिया को और भी तेज़ बनाने के लिए वित्तीय अधिकारों में क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है। जानकारी मिली कि रक्षा मंत्री और वित्त मंत्रालय की खरीद मंजूरी की सीमा को काफी बढ़ाया जा सकता है, जिससे सैन्य उपकरणों की खरीद में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो सकेगा। […]
रक्षा खरीद नियमों में बड़ा बदलाव: ₹3,000 करोड़ से ऊपर के सौदों के लिए सीसीएस मंजूरी छूट मिल सकती है, मंत्रालय स्तर पर फैसला तेजी से
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सरकार रक्षा खरीद प्रक्रिया को और भी तेज़ बनाने के लिए वित्तीय अधिकारों में क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है। जानकारी मिली कि रक्षा मंत्री और वित्त मंत्रालय की खरीद मंजूरी की सीमा को काफी बढ़ाया जा सकता है, जिससे सैन्य उपकरणों की खरीद में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो सकेगा।

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में रक्षा मंत्री के पास ₹2,000 करोड़ तक की खरीद को मंजूरी देने का वित्तीय अधिकार है, जबकि वित्त मंत्रालय की सीमा ₹3,000 करोड़ तक है। इस सीमा को अब रक्षा मंत्री के लिए ₹5,000 करोड़ और वित्त मंत्रालय के लिए ₹10,000 करोड़ तक बढ़ाने की बात कही जा रही है। इसका मतलब है कि भविष्य में ₹3,000 करोड़ से अधिक लेकिन ₹10,000 करोड़ से कम के रक्षा सौदों के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की मंजूरी की आवश्यकता नहीं रह जाएगी।

वर्तमान व्यवस्था के तहत ₹3,000 करोड़ से अधिक कीमत वाले किसी भी रक्षा खरीद प्रस्ताव को सीसीएस की मंजूरी से गुजरना अनिवार्य है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर लगभग एक तिहाई बड़े रक्षा सौदों को सीसीएस के समक्ष पहुंचाने की जरूरत समाप्त हो जाएगी। यह बदलाव विशेष रूप से उन सैन्य तकनीकों की खरीद में समय बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो आजकल बहुत तेज़ी से विकसित और बदलती रहती है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल से यह भी पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में कम से कम 13 बड़े रक्षा अनुबंध ₹3,000 करोड़ से अधिक कीमत के होने के कारण सीसीएस की मंजूरी प्रक्रिया से गुजरे। इनमें तेजस हल्का युद्ध विमान, प्रचंड और ध्रुव हेलिकॉप्टर, सुखोई विमान और उनके इंजन, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका गोला-बारूद, एटीएजीएस तोप, रडार और नौसेना के फ्लीट सपोर्ट शिप जैसे प्रमुख उपकरण शामिल थे।

भास्कर की 2021 से 2025 के सरकारी रिकॉर्ड की विस्तृत जांच में ₹3,000 करोड़ से अधिक कीमत वाले 14 बड़े घरेलू रक्षा खरीद मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत ₹3.01 लाख करोड़ रुपये थी। इन खरीदों में घरेलू रक्षा उद्योग से बने उपकरणों का विशेष रूप से उल्लेखनीय स्थान है, जो सरकार के स्वदेशीकरण नीति को दर्शाता है।

माना जा रहा है कि यदि यह प्रस्तावित बदलाव लागू होता है, तो सबसे अधिक प्रभाव घरेलू रक्षा उद्योग से होने वाली खरीदों पर पड़ेगा। पिछले कई वर्षों से सरकार ने रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण और तेज़ी दोनों पर जोर बढ़ाया है। नई व्यवस्था से मंत्रालय स्तर पर फैसले लेने की क्षमता बढ़ने के साथ-साथ रक्षा सामग्री की खरीद प्रक्रिया में भी काफी लचीलापन आएगा।

यह खबर रक्षा क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आज की युद्धपूर्ण तकनीक बहुत तेज़ी से पुरानी हो रही है और देश को नई हथियारों और सिस्टमों की त्वरित खरीद की आवश्यकता होती है। मंत्रालय स्तर पर अधिक फैसले होने से रक्षा तैयारी में काफी गति आ सकती है।

इस बीच, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने हाल ही में भारतीय वायु सेना को दो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट टू-सीटर ट्रेनर तेजस और बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 सौंपे हैं। साथ ही पवनहंस लिमिटेड को चार नेक्स्ट जेनरेशन ध्रुव हेलिकॉप्टर भी सौंपे गए हैं। यह सौंपना सरकार के स्वदेशीकरण और आधुनिकीकरण के नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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