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शिक्षा मंत्रालय ने ‘अपार आईडी’ की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट की: नौकरी देने वाले अब डिग्री का डिजिटल सत्यापन कर सकेंगे

छात्रों को जारी होने वाली ‘अपार आईडी’ का उपयोग अब पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश के समय भी काम आएगा। शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को अपार पोर्टल पर प्राइवेसी पॉलिसी में बड़ा अपडेट किया है, जिसके तहत अब एकेडमिक ब्योरा शैक्षणिक संस्थानों के अलावा नियोक्ता जैसी अधिकृत थर्ड पार्टी के साथ भी […]
शिक्षा मंत्रालय ने ‘अपार आईडी’ की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट की: नौकरी देने वाले अब डिग्री का डिजिटल सत्यापन कर सकेंगे
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छात्रों को जारी होने वाली ‘अपार आईडी’ का उपयोग अब पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश के समय भी काम आएगा। शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को अपार पोर्टल पर प्राइवेसी पॉलिसी में बड़ा अपडेट किया है, जिसके तहत अब एकेडमिक ब्योरा शैक्षणिक संस्थानों के अलावा नियोक्ता जैसी अधिकृत थर्ड पार्टी के साथ भी साझा किया जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत नियोक्ता अपार पोर्टल के डेटा से ही छात्र की डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और अन्य एकेडमिक उपलब्धियों का सत्यापन कर पाएंगे। इससे फर्जी डिग्री की समस्या को समाप्त करने की उम्मीद जताई जा रही है। अपार पोर्टल पर छात्रों की सभी एकेडमिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में संग्रहीत होती हैं और अब ये रिकॉर्ड छात्र की सहमति पर आधारित तरीके से नियोक्ता तक भी पहुंचाई जा सकेंगी।

शिक्षा मंत्रालय की इस नई पॉलिसी के अनुसार अपार थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिससे डेटा की उपलब्धता, रिकवरी और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकेगी। डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया भी इसी प्रकार संचालित होगी, जिससे छात्रों की जानकारी सुरक्षित रहती हुई आवश्यक स्थानों तक पहुंच सकेगी।

नई पॉलिसी के अनुसार नियोक्ता सत्यापन करने के लिए स्टूडेंट की मंजूरी अनिवार्य होगी। यानी बिना छात्र की सहमति किसी भी प्रकार का एकेडमिक रिकॉर्ड खुलने या दिखाई नहीं देगा। इसके साथ ही नियोक्ता सामान्य यूजर की तरह अपार के पूरे रिकॉर्ड तक पहुंच नहीं पाएगा। वे केवल उन्हीं डॉक्यूमेंट्स तक सीमित रहेंगे जिनके सत्यापन के लिए छात्र ने अनुमति दी होगी।

सत्यापन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। नियोक्ता को पहले वेरिफायर के रूप में अपार पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वह स्टूडेंट के किसी विशेष डॉक्यूमेंट के सत्यापन की रिक्वेस्ट भेजेगा। स्टूडेंट को इसकी तुरंत सूचना जाएगी और वह ओटीपी या ई-साइन के माध्यम से मंजूरी देगा। मंजूरी के बाद ही नियोक्ता संबंधित रिकॉर्ड देख सकेगा। छात्र अपनी रिक्वेस्ट को मंजूर या नामंजूर करने का पूरा अधिकार रखेगा।

इस प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उम्मीदवार अपने सीवी में जो डिग्री और संस्थान का जिक्र करेगा, नियोक्ता उसका डिजिटल रिकॉर्ड देखकर उसकी प्रामाणिकता की जांच कर सकेगा। इससे नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी डिग्री वाले लोगों को रोकने में मदद मिलेगी। रिक्रूटमेंट प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और कुशल होगी।

निजता के मुद्दे पर पॉलिसी में स्पष्ट किया गया है कि थर्ड पार्टी सत्यापन में डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाएगा। व्यवस्था तभी भरोसेमंद होगी, जब तक रिकॉर्ड की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं रहती। अपार पोर्टल पर छात्रों के निजी डेटा की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और नई पॉलिसी इसी दिशा में कदम बढ़ाने का प्रयास करती है।

अपार आईडी एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान प्रमाण है जो छात्रों को उनकी पूरी एकेडमिक यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड प्रदान करता है। इसमें स्कूली शिक्षा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पेशेवर प्रमाणन सहित सभी प्रमाण-पत्रों की जानकारी संग्रहीत होती है। शिक्षा मंत्रालय की इस नई पॉलिसी अपडेट से अपार आईडी का उपयोग शिक्षा क्षेत्र से हटकर रोजगार क्षेत्र तक विस्तृत हो गया है, जो छात्रों के लिए एक बड़ी सुविधा साबित होगी।

इस अपडेट के माध्यम से छात्रों को नौकरी देने वाले संस्थानों के सामने अपनी एकेडमिक योग्यता को आसानी से प्रमाणित करने का सुविधाजनक तरीका मिल जाएगा। साथ ही यह रिक्रूटर्स के लिए भी एक विश्वसनीय स्रोत साबित होगा, जो वेतनभारी की योग्यता के सत्यापन में समय और संसाधन बचा सकेंगे। डिजिटल सत्यापन प्रणाली भारत की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।

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