कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिह्न और नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के हालिये आदेश की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ ममता बनर्जी के व्यक्तिगत संघर्ष तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पूरे लोकतांत्रिक व्यवस्था की गहरी संकट की बात बताया। राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान देते हुए लिखा कि पहले शिवसेना का प्रश्न उठा, फिर एनसीपी (NCP) का, और अब तृणमूल कांग्रेस का। हर बार एक ही पैटर्न देखने को मिलता है- भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक राजनीतिक दल को तोड़ते हैं और फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि जब पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं रह गई। उन्होंने तीन स्तरों की चोरी का जिक्र किया- वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी- और कहा कि ये सब मिलकर हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। राहुल गांधी के अनुसार यह पैटर्न अब तृणमूल कांग्रेस तक भी आ गया है और यह राजनीतिक दलों की अस्थिरता का एक गंभीर संकेत है।
इस बहस का संदर्भ चुनाव आयोग के हालिये आदेश से है, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के दोहरे गुटों को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दी गई है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। इस बैठक में पार्टी में मौजूद दो प्रमुख गुटों की बात कही गई- एक गुट की नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि दोनों ही गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस साबित करने के प्रयास में हैं। इसलिए इलेक्शन सिम्बल्स ऑर्डर, 1968 के नियमों के तहत इस विवाद पर न्यायिक फैसला लिया जाएगा। फिलहाल इस बीच सिंबल और नाम के इस्तेमाल पर रोक का आदेश जारी किया गया है।
दोनों गुटों ने अपनी पसंद के नए नाम और चुनाव चिह्न पहले ही दे दिए हैं। इस स्थिति में 6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। दोनों गुटों ने पहले एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन अब नए सिंबल के तहत प्रत्येक गुट अलग-अलग उम्मीदवार लड़ेंगे। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC धड़े से मोहम्मद एतेशामुल हक नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC ने रविवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार के रूप में घोषित किया था।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस पर हो रहे कानूनी कार्रवाई में और एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को TMC के 20 सांसदों की अयोग्यता पर कार्यवाही तय समयसीमा में करने की बात कही। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असली मुद्दा नोटिस जारी करने की औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्यवाही पूरी करना है। कोर्ट ने 20 बागी सांसदों को नोटिस भी जारी किया है।
ऐतिहासिक संदर्भ याद करने की बात तो आवश्यक है कि 21 जून 2022 को शिवसेना में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के गुट अलग हुए थे। इसी तरह 2 जुलाई 2023 को एनसीपी में शरद पवार और अजित पवार के गुट अलग हुए थे। राहुल गांधी के अनुसार यह पैटर्न अब तृणमूल कांग्रेस तक भी आ गया है और यह राजनीतिक दलों की अस्थिरता का एक गंभीर संकेत है। विपक्ष ने तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में यह जानकारी साझा की कि चुनाव आयोग एक कठपुतली की भूमिका निभा रहा है और दोनों गुटों को अपना नाम और चुनाव चिह्न देने के बाद भी मुद्दा असुलझा बना हुआ है।


















