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IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में NSA डोभाल ने बताया अपनी टीम चीनी सेना की हिरासत में गई थी, कहा- गलत नक्शों ने मिशन बिगाड़ा

देहरादून: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत कुमार डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्रद्धांजलि व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने अपने करियर का लगभग 50 साल पुराना एक खुफिया मिशन संबंधी किस्सा साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि एक बार उनकी टीम चीनी सेना की हिरासत […]
IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में NSA डोभाल ने बताया अपनी टीम चीनी सेना की हिरासत में गई थी, कहा- गलत नक्शों ने मिशन बिगाड़ा
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देहरादून: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत कुमार डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्रद्धांजलि व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने अपने करियर का लगभग 50 साल पुराना एक खुफिया मिशन संबंधी किस्सा साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि एक बार उनकी टीम चीनी सेना की हिरासत में चली गई थी।

डोभाल ने बताया कि युवा आईपीएस अधिकारी और खुफिया कार्य में नए होने के दौरान उन्हें सिक्किम में इंटेलिजेंस का जिम्मा सौंपा गया था। उस समय सीमा क्षेत्र में चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखना भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल थी। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी टीम को सीमा क्षेत्र में एक मिशन पर भेजा गया, जिसमें टीम को कुछ दिनों में लौटना था।

डोभाल ने कहा कि 5 दिन, फिर 10 दिन और फिर लगभग 15 दिन बीत गए, इसके बावजूद टीम से कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में मुख्यालय से उन्हें बताया गया कि टीम चीन की हिरासत में है। पूछताछ के बाद टीम को छोड़ दिया गया, लेकिन लौटने वाले लोग काफी टूटे हुए थे।

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान यह पता चला कि मिशन के लिए मुख्यालय से मिले स्केच और नक्शों में खामियां थीं, जिसकी वजह से टीम गलत दिशा में पहुंच गई और चीनी सेना की हिरासत में चली गई। इस घटना के बाद डोभाल के साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उनसे उनकी परेशानी का कारण पूछा। डोभाल ने जब उसे अपने करियर को लेकर चिंता बताई तो शेरपा ने मैप रीडिंग को जीवन से जोड़ते हुए एक गहरी सीख दी। उन्होंने कहा कि जीवन में तीन बातें हमेशा स्पष्ट होनी चाहिए- आप कहां हैं, आपको कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।

डोभाल ने इसी सीख को विद्यार्थियों के सामने रखते हुए लक्ष्य और सही दिशा की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि यह तकनीक और इनोवेशन का दौर है और आने वाले समय में यही देश की तरक्की के सबसे महत्वपूर्ण आधार होंगे।

समारोह की शुरुआत संस्थान के कुलगीत के साथ हुई। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आईआईटी रुड़की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन हरीश साल्वे और संस्थान के निदेशक केके पंत उपस्थित रहे।

डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज आईआईटी से ग्रेजुएट होने वाले युवा शायद यह महसूस न कर रहे हों कि वे पिछले 1,000 वर्षों में सबसे अधिक अवसरों वाली पीढ़ी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों को गुलामी और सीमित अवसरों के दौर से गुजरना पड़ा, जबकि आज युवाओं के सामने आगे बढ़ने के लिए कई रास्ते खुले हैं।

उन्होंने आईआईटी रुड़की के इतिहास को भी याद किया और कहा कि संस्थान करीब 179 साल पहले थॉमसन कॉलेज के रूप में शुरू हुआ था। 1949 में यह देश का पहला इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय बना और 2001 में आईटी के रूप में स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि संस्थान ने देश को कई महान प्रतिभाएं दी हैं और 10 से अधिक पद्म पुरस्कार विजेता इसी संस्थान से जुड़े हैं।

डोभाल ने ग्रेजुएट्स को डॉ. एएन खोसला, प्रोफेसर जय कृष्ण और अन्य प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की विरासत के उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों को भी उपलब्धि का श्रेय दिया, कहते हुए कि माता-पिता ने बच्चों को तैयार और प्रेरित किया, जबकि शिक्षकों और प्रोफेसरों ने उन्हें ज्ञान और ऐसा वातावरण दिया, जिससे वे खुद के साथ-साथ समाज, राष्ट्र और मानवता के हित में योगदान दे सकें।

डिग्री वितरण के बाद मुख्य अतिथि NSA अजीत डोभाल ने संस्थान स्तर के मेडल और पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान शैक्षणिक उपलब्धि, उत्कृष्ट प्रदर्शन, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। विभागीय स्तर पर भी पुरस्कार दिए गए। साक्षी बंसल (इंटीग्रेटेड एम.टेक जियोलॉजिकल टेक्नोलॉजी) को डॉ. कुश टंडन कैश अवॉर्ड और हर्ष श्रीवास्तव (बीएसएमएस केमिकल साइंसेज) को प्रोफेसर एसएन टंडन कैश अवॉर्ड प्रदान किया गया।

संस्थान के अनुसार इस दो दिवसीय दीक्षांत समारोह में कुल 2,701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जानी हैं, जिसमें पहले चरण में 1,277 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। समारोह में परिजनों और संस्थान के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर खुशी जताई।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आईआईटी रुड़की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन हरीश साल्वे ने भी संबोधन दिया और कहा कि दुनिया भारत से निकल रही नई और प्रभावशाली तकनीक को उत्सुकता से देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत जिस गति से नए आइडिया और तकनीक विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब भारत तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

दीक्षांत समारोह के बाद दोपहर में NSA अजीत डोभाल और CDS जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के लैंसडौन पहुंचने का कार्यक्रम है। दोनों अधिकारियों के सैन्य कार्यक्रम को देखते हुए लैंसडौन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। मौसम साफ रहने पर दोनों के हेलीकॉप्टर से लैंसडौन पहुंचने की योजना है। मौसम खराब होने की स्थिति में हेलीकॉप्टर को कोटद्वार स्थित गबर सिंह कैंप में उतारा जाएगा और इसके बाद दोनों अधिकारी सड़क मार्ग से लैंसडौन पहुंचेंगे।

यह जानकारी भी उल्लेखनीय है कि NSA अजीत डोभाल को पिछले समय पुणे में प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदान किया था। समारोह में शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजीत डोभाल के बीच भरोसे और लंबे कार्य संबंधों का जिक्र करते हुए उनकी जमकर सराहना की थी।

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