देवास में ग्राम रोजगार सहायकों ने मनरेगा के अलावा अन्य सरकारी योजनाओं का काम कराने और उसके बदले मानदेय नहीं मिलने के विरोध में मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ग्राम रोजगार सहायक संघ, मनरेगा ग्राम रोजगार सहायक महासंघ और पंचायत सहायक सचिव कर्मचारी संघ के संयुक्त मोर्चे ने जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया। इसे कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजा गया है। संयुक्त मोर्चे ने अतिरिक्त कामों के लिए राज्य स्तर से अनुमति लेने और पारिश्रमिक तय करने की मांग की है। बिना अनुमति अतिरिक्त काम कराने पर आपत्ति संयुक्त मोर्चे ने कहा कि ग्राम रोजगार सहायकों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की राज्य स्तरीय सहमति के बिना दूसरे विभागों या योजनाओं का काम नहीं सौंपा जाना चाहिए। संगठन की मांग है कि विकसित भारत-जी राम जी (विबी-जी आरएएम जी) योजना के अलावा किसी अन्य विभागीय योजना का काम देने से पहले राज्य स्तर से लिखित अनुमति और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। अतिरिक्त काम के लिए पहले तय हो पारिश्रमिक ज्ञापन में कहा गया है कि जनहित और काम की सुविधा को देखते हुए यदि ग्राम रोजगार सहायकों से स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन 2026 जैसी अन्य योजनाओं का काम लिया जाता है, तो इसके लिए पहले ही अतिरिक्त मानदेय या पारिश्रमिक की दर तय की जाए। साथ ही निर्धारित राशि का भुगतान निश्चित समय सीमा में सुनिश्चित किया जाए। काम ग्राम रोजगार सहायक करते हैं, श्रेय दूसरे विभागों को मिलने का आरोप संयुक्त मोर्चे ने आरोप लगाया कि जिलों में लंबे समय से ऐसी स्थिति बनी हुई है, जिसमें कई काम जमीन पर ग्राम रोजगार सहायक करते हैं, लेकिन उसका श्रेय दूसरे विभागों या कर्मचारियों को मिल जाता है। काम के बदले मिलने वाला मानदेय, पारिश्रमिक या प्रोत्साहन राशि भी दूसरे विभागों या कर्मचारियों को मिलने की बात संगठन ने कही है। संगठन ने इस व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि अतिरिक्त काम लेने की स्थिति में पारिश्रमिक का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। ग्राम रोजगार सहायकों ने स्पष्ट किया कि राज्य स्तरीय विभागीय सहमति के बिना उनसे अन्य विभागों की योजनाओं का काम नहीं कराया जाए।




