Odia Cadet Sarthak Mohapatra Missing Mystery; Naveen Patnaik Mohan Charan Majhi

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3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के प

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4 फरवरी को दो लोग रश्मिता के घर पहुंचे। ये कैप्टन देबाशीष पटनायक और कैप्टन दासगुप्ता थे। दोनों उसी एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से आए थे, जिसके शिप से सार्थक गायब हुआ। दोनों ने फैमिली को एक लेटर सौंपा, जिसमें सार्थक की गुमशुदगी की ऑफिशियल जानकारी थी।

सार्थक को लापता हुए अब एक महीना गुजर चुका है लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार परेशान है। मां का कहना है कि कंपनी जरूर कुछ छिपा रही है। मामला इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़ा है इसलिए MRCC मॉरीशस इस सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रही है। इसमें एक और वेसल शिप की भी मदद ली जा रही है।

सार्थक के परिवार ने उसकी गुमशुदगी के मामले में केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत दखल देने की अपील की है, ताकि उसकी सुरक्षित वापसी हो सके।

सार्थक के परिवार ने उसकी गुमशुदगी के मामले में केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत दखल देने की अपील की है, ताकि उसकी सुरक्षित वापसी हो सके।

सार्थक की गुमशुदगी को लेकर फैमिली और उसके दोस्तों का क्या कहना है? शिप मैनेजमेंट कंपनी ने अब तक क्या बताया, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची।

शिप के सिंगापुर लौटने से 9 दिन पहले गायब हुआ सार्थक भद्रक जिले के केस्पुर गांव के रहने वाले हैं। बीते लगभग 11 साल से मां और नाना-नानी के साथ भुवनेश्वर में किराए के मकान में रह रहे थे। मां रश्मिता साहू निजी अस्पताल में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं। वहीं पिता सत्यजीत महापात्रा राउरकेला में एक निजी कंपनी में काम करते हैं और वहीं रहते हैं।

परिवार के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को सार्थक भुवनेश्वर से मुंबई के लिए निकला था। 16 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर सवार हुआ। उसके साथ 23 क्रू मेंबर सवार थे। शिप हांगकांग से घाना होते हुए 11 फरवरी को सिंगापुर लौट रहा था।

2 फरवरी को जब शिप सिंगापुर के करीब था, तब सार्थक की मां और परिवार के बाकी लोगों से बात भी हुई थी। फिर 3 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे परिवार को उसकी गुमशुदगी की खबर मिली हैं। बताया गया कि जिस जगह उसके लापता होने का पता चला, वो मॉरीशस कोस्ट स्टेशन के सबसे नजदीक है।

मां बोलीं- चलते शिप से कोई कैसे गायब हो जाएगा रश्मिता बताती हैं, ‘जब मुझे बताया गया कि सार्थक अपने कमरे और शिप में नहीं मिला तो मेरे लिए ये मानना मुश्किल था। मुझे सबसे पहले ये शंका हुई कि मेरे बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। चलते शिप से भला कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है।

‘1 फरवरी की रात करीब 9 बजे से 11 बजे तक सार्थक से मेरी फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। उसमें किसी डर की बात सामने नहीं आई थी। अगले दिन फिर दोपहर और रात में हमारी फिर बात हुई। तब भी सब कुछ सामान्य था। वो बस मेरी तबीयत को लेकर परेशान था। अभी स्किन ट्यूबरकुलोसिस का इलाज चल रहा है। मुझे डायबिटीज और थायरॉइड पहले से है।‘

फिर 2 फरवरी की ही रात रश्मिता के पास अनजान नंबर से दो से तीन बार फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सार्थक का दोस्त बताया और कहा कि वो ओडिशा घूमने आना चाहता है। उसने घर का पता भी पूछा। ये बात उन्हें असहज लगी। लिहाजा उन्होंने घर का पता देने से मना कर दिया।

हालांकि रश्मिता ने सार्थक को मैसेज कर इसकी जानकारी दे दी। वो बताती हैं, ‘बेटे को काफी देर तक मैसेज डिलीवर नहीं हुआ। पहले मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और सोचा नेटवर्क में नहीं होगा इसलिए नहीं पहुंचा होगा। जब 3 फरवरी को भी सार्थक ने फोन नहीं उठाया और न कॉलबैक आया। तब बेचैनी बढ़ने लगी।‘

सार्थक की मांग का कहना है कि शिप पर थर्ड ऑफिसर उसे पसंद नहीं करता था,जबकि कंपनी के अधिकारी ऐसी किसी भी बात से इनकार कर रहे हैं।

सार्थक की मांग का कहना है कि शिप पर थर्ड ऑफिसर उसे पसंद नहीं करता था,जबकि कंपनी के अधिकारी ऐसी किसी भी बात से इनकार कर रहे हैं।

कैसे-किन हालात में गायब हुआ बेटा, कंपनी छिपा रही रश्मिता आगे बताती हैं, ‘3 फरवरी की शाम कंपनी से कैप्टन देबाशीष पटनायक का फोन आया। उन्होंने बताया कि सार्थक गायब हो गया है। वो सुबह करीब 6.20 बजे अपने कमरे में गया था लेकिन जब उसके लिए नाश्ता भेजा गया, तब वो कमरे में नहीं था।‘

‘कोलकाता से आए कैप्टन दासगुप्ता और देबाशीष पटनायक ने भी कंपनी का लेटर देते वक्त यही बात दोहराई थी। जब हमने जानना चाहा कि जांच कैसे हो रही, किस स्तर तक पहुंची और इसमें कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।‘

‘मुझे ये भी नहीं बताया गया कि सार्थक कैसे लापता हुआ और ये सब किन हालात में हुआ। अगर सही तरह से खोजबीन की जाए तो वो शिप में ही मिल सकता है। लापता होने की बात बहुत जल्दी और बिना किसी ठोस आधार के फैला दी गई।‘

CCTV में आखिरी बार दिखने का दावा, फुटेज मांगने पर पलटी कंपनी रश्मिता आगे कहती हैं, ‘हमने शिप के चीफ अफसर से सीधे बात करने की भी कोशिश की लेकिन नहीं हो सकी। जब मैंने दासगुप्ता से इसकी शिकायत की तो कहा गया कि कंपनी के नियमों के तहत वो परिवार से सीधे बात नहीं कर सकते। काफी गुजारिश के बाद हमें वीडियो कॉल करके सार्थक का कमरा और आसपास का हाल दिखाया गया।‘

‘कंपनी ने कहा था कि CCTV में सार्थक को फोन पर बात करते हुए रूम से बाहर जाते देखा गया है। जब हमने CCTV फुटेज मांगा, तब हमें वीडियो कॉल करके दिखाया गया कि वहां कोई कैमरा ही नहीं लगा है। जब हमने सवाल किया फिर उसे किस कैमरे में देखा गया तो कंपनी ने कुछ क्लियर नहीं किया। हर बार अलग-अलग बात कही गई।‘

सार्थक का परिवार अब सरकार से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें कुछ जनप्रतिनिधियों ने केस में जल्द मदद का भरोसा दिलाया है।

मां के जन्मदिन पर उन्हें सरप्राइज देने के लिए सार्थक केक लेकर भुवनेश्वर में उनके नर्सिंग हॉस्पिटल पहुंचा था।

मां के जन्मदिन पर उन्हें सरप्राइज देने के लिए सार्थक केक लेकर भुवनेश्वर में उनके नर्सिंग हॉस्पिटल पहुंचा था।

सार्थक के घर पहुंचे तो उसकी गुमशुदगी की खबर मिली इसके बाद हम सार्थक के बचपन के दोस्त शाश्वत महालिक से भी मिले। दोनों नर्सरी क्लास से साथ हैं। गांव में इनका घर भी अगल-बगल है। शाश्वत के मुताबिक, पढ़ाई और काम के बावजूद वे लगातार एक-दूसरे से बात करते और जिंदगी की हर बड़ी-छोटी बात शेयर करते हैं।

वे बताते हैं, ‘2 फरवरी को रात करीब 10 बजे हमारी फोन पर बात हुई थी। सार्थक अच्छे मूड में था। वो दोस्तों का हालचाल पूछ रहा था। मुझसे भी आगे का प्लान पूछा और अपने प्लान भी शेयर किए। उसकी 18 महीनों की इंटर्नशिप लगभग पूरी होने वाली है। उसने एक कोर्स में भी दाखिला लिया है, ताकि उसे पास करके प्रमोशन मिल सके।‘

’उस रात सार्थक बस आंटी (अपनी मां) की तबीयत लेकर परेशान था। इसलिए चाहता था कि हम दोस्त घर जाकर एक बार उनसे मिल आएं। उसके कहने पर हम अगले ही दिन (3 फरवरी) आंटी से मिलने सार्थक के घर पहुंचे। तभी हमें उसके लापता होने का पता चला।’

मॉरीशस के मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर समेत संबंधित समुद्री एजेंसियों के साथ मिलकर सार्थक के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

मॉरीशस के मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर समेत संबंधित समुद्री एजेंसियों के साथ मिलकर सार्थक के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

अब कंपनी सार्थक की मेंटल कंडीशन पर सवाल उठा रही शाश्वत और उनके साथियों ने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की लेकिन सीधा संपर्क नहीं हो सका। बस कंपनी के हेड ऑफिस से सार्थक की गुमशुदगी का एक मेल मिला।

शाश्वत सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘आखिर चलते हुई शिप से सार्थक कैसे गायब हो सकता है। कैडेट को एक छोटा सा कमरा मिलता है। वहां से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं होता। फिर वो कहां गायब हो गया। हम चाहते हैं कि शिप में लगे CCTV कैमरों के फुटेज और VDR (वॉयस डेटा रिकॉर्डर) दिए जाएं। इसी में शिप की गतिविधियां और आवाजें रिकॉर्ड होती हैं, जो किसी भी घटना की जांच में अहम होती हैं। हालांकि अभी कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला है।‘

वे आगे बताते हैं, ‘सार्थक के शिप पर सभी से अच्छे संबंध थे। उसकी गुमशुदगी की खबर लेकर आए कंपनी के अफसर भी ये बात मान रहे हैं। फिर भी कंपनी ये दिखाने की कोशिश में लगी है कि सार्थक की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। वो मां को याद कर रहा था और मानसिक रूप से कमजोर पड़ गया था। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल अलग है।’

अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी शाश्वत कहते हैं, ‘कंपनी ने बताया कि 2 फरवरी की रात सार्थक सोया नहीं था, इसलिए सुबह 4 बजे से 8 बजे वाली ड्यूटी भी नहीं कर सका। जब वो मेस भी नहीं पहुंचा तो 8.30 बजे नाश्ता उसके कमरे भेजा गया था लेकिन वहां भी नहीं मिला।‘

हालांकि शाश्वत इसे लेकर सवाल खड़े करते हैं। वे पूछते हैं कि अगर सार्थक सोया नहीं था, तो रात भर कहां था, किसके साथ था और क्या कर रहा था। कंपनी इन सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रही है। कंपनी ने ये भी साफ नहीं किया कि वो डेक के पास गया था या शिप के किसी दूसरे हिस्से में।

अफसर बोले- मुमकिन है कि सार्थक ने छलांग लगा दी केस की जांच को लेकर हमने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि देबाशीष पटनायक से भी बात की। वे बताते हैं कि इस मामले में फिलहाल कोई बड़ा अपडेट नहीं है। न ही सार्थक की मानसिक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी है।

देबाशीष ने दावा किया कि वे कन्फर्म हैं कि सार्थक ने ओवरबोर्ड छलांग लगाई है। क्योंकि शिप से किसी का लापता होना बिल्कुल नामुमकिन है। ये भी संभव नहीं कि कोई किसी को उठाकर समुद्र में फेंक दे।

हमने पूछा क्या शिप पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती? इस पर देबाशीष बताते हैं, ‘निगरानी का काम ब्रिज पर होता है। वेसल स्टाफ को कोई अलग से मॉनीटर नहीं करता क्योंकि वे सभी एम्प्लॉई होते हैं। अगर सार्थक ने वास्तव में छलांग लगाई होगी, तो समुद्र में उसकी लाश मिलना भी लगभग नामुमकिन है। क्योंकि बड़े से बड़ा तैराक भी ज्यादा से ज्यादा चार घंटे ही पानी में रह सकता है।‘

क्या सार्थक के केबिन में होने की कोई संभावना है? देबाशीष इसे सिरे से खारिज करते हैं और कहते हैं, ‘अगर केबिन में होता तो अब तक मिल चुका होता। सभी CCTV फुटेज रिट्रीव कर लिए गए हैं। उसी से पता चला है कि सार्थक फोन लेकर कमरे से बाहर निकला था। ये फुटेज जल्द ही परिवार को भी भेजा जाएगा।‘

थर्ड ऑफिसर से हुए विवाद के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘शिप में छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। इसे लेकर कोई इतना बड़ा कदम नहीं उठाता। वैसे भी सार्थक को सभी पसंद करते थे। मुझे किसी के साथ उसके गंभीर विवाद की जानकारी नहीं है।‘

फिलहाल MRCC मॉरीशस, सार्थक की तलाश में शुरू हुए अभियान को लीड कर रहा है। इसमें शानडोंग सिविलाइजेशन नाम के एक और वेसल शिप की मदद ली जा रही है।

सार्थक के परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें साफ जानकारी नहीं दी गई है कि वो किन हालात में लापता हुआ। न ही कोई CCTV फुटेज दिया गया है।

सार्थक के परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें साफ जानकारी नहीं दी गई है कि वो किन हालात में लापता हुआ। न ही कोई CCTV फुटेज दिया गया है।

ओडिशा सरकार ने मदद के लिए पहल की सार्थक के लापता होने के मामले में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार के कई अहम विभागों से दखल देने की मांग की है। सरकार ने शिपिंग महानिदेशालय और पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय से संपर्क कर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।

नई दिल्ली स्थित ओडिशा के चीफ रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस से जारी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, ये मामला तब सामने आया, जब सार्थक की मां रश्मिता साहू ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने CM को लिखे पत्र में बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के दौरान रहस्यमय हालात में गायब हो गया है।

इधर ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी सार्थक के लापता होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि खोज और बचाव अभियान तेज किया जाए, ताकि सार्थक को जल्द से जल्द सुरक्षित तलाशा जा सके।

अपने बयान में नवीन पटनायक ने भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशालय और विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत मदद करें और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर परिवार को सहयोग दें। साथ ही तलाशी अभियान में तेजी लाएं। …………………. ये खबर भी पढ़ें…

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