वैंडे भारत न्यूज के अनुसार, RSS (राष्ट्रीय सामाजिक राष्ट्रीय समिति) ने देशभर में जननिष्ठ नागरिकता निर्धारण कार्यक्रम (National Register of Citizens – NRC) को लागू करने की मांग को दोबारा उठाया है। समिति के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि यह आवश्यक है कि भारतीय नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया जाए। आंबेकर ने कहा कि वोटर लिस्ट में गलत तरीके से शामिल गैर-नागरिकों की पहचान जरूरी है और NRC के माध्यम से भारतीय नागरिकों की पहचान की जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति को इस प्रक्रिया पर आपत्ति हो, तो वह अदालत सहित कानूनी रास्तों का उपयोग कर सकता है।
सुनील आंबेकर ने अपनी बात में जनसंख्या में होने वाले बदलावों के संदर्भ में भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि जनसंख्या संतुलन देश की सांस्कृतिक पहचान, एकता और सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। आंबेकर ने राजनीतिक दलों को भी कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ‘सेक्युलर बनाम सांप्रदायिक’ बहस के व्यापक दायरे से आगे बढ़कर देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान के नजरिए से जनसंख्या मुद्दों को देखने की सलाह दी।
आंबेकर की बातचीत में 5 महत्वपूर्ण बिंदु उजागर किए गए। पहला बिंदु NRC के माध्यम से भारतीय नागरिकों की पहचान की आवश्यकता है, जिसके अनुसार NRC की प्रक्रिया पर कोई विरोधी कानूनी कार्रवाई संभव है। दूसरा बिंदु CAA (Citizenship Amendment Act) के तहत पात्र व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करनी चाहिए और उनकी पहचान NRC के माध्यम से सुनिश्चित की जानी चाहिए। तीसरा बिंदु जनसंख्या बदलाव को 1947 के विभाजन से जोड़ा गया है, जहाँ धार्मिक और जनसंख्या आधार पर देश का विभाजन हुआ था। आंबेकर ने कहा कि आबादी का संतुलन देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। चौथा बिंदु शादी और बहुविवाह से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रावधानों और संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 की व्याख्या पर चर्चा की गई। आंबेकर ने कहा कि जनसंख्या से जुड़े मामलों में स्पष्ट और समान नीति होनी चाहिए। पांचवां बिंदु अवैध प्रवास पर पिछली सरकारों की नीतियों की आलोचना में 1983 के इलीगल माइग्रेंट्स (डिटरमिनेशन बाय ट्रिब्यूनल्स) एक्ट का उल्लेख किया गया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। आंबेकर ने कहा कि अवैध प्रवास को लंबे समय तक गंभीरता से नहीं लिया गया।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, आंबेकर ने राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय मुद्दों का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करने हेतु कहते हैं। उन्होंने देशभर में NRC की मांग को दोहराया कि यह सरकारी पहल के रूप में होनी चाहिए। 2019 में तत्कालीन RSS महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने भी कहा था कि भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों की पहचान के लिए NRC तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है।
जनगणना के बीच NRC की चर्चा का कारण समझा जाता है क्योंकि मौजूदा जनगणना फॉर्म में नागरिकता, माता-पिता की जानकारी, आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट से जुड़े कई सवाल शामिल हैं। इनमें से कई सवाल 2020 में अधिसूचित NPR (National Population Register) के फॉर्म में भी मौजूद थे। NPR देश में रहने वाले लोगों का रजिस्टर है, जबकि NRC भारतीय नागरिकों की पहचान से जुड़ा रजिस्टर है। नागरिकता नियमों के तहत NPR के सत्यापन के बाद स्थानीय स्तर पर भारतीय नागरिकों का रजिस्टर तैयार करने का प्रावधान है।
अभी देशभर में NRC का सरकारी ऐलान नहीं फिलहाल केंद्र सरकार ने देशभर में NRC लागू करने को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की है। आंबेकर का बयान RSS की मांग को दोहराता है, लेकिन इसके साथ-साथ अभी तक कोई नया सरकारी फैसला घोषित नहीं हुआ है। जनगणना के बीच NRC की चर्चा बढ़ी है, जो जनगणना फॉर्म के विभिन्न सवालों और नागरिकता निर्धारण की आवश्यकताओं से जुड़ी है।


















