हिंदू बाप-बेटे को काट डाला, बंगाल में चुनावी मुद्दा नहीं:हिंसा वाली 76 सीटें, लोग बोले- पुलिस छिप जाती है, ममता बचाती नहीं

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पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद का जाफराबाद इलाका। शाम के करीब 5 बजे। पारुल दास रोज की तरह घर की चौखट पर बैठी थीं। पास में खंभे पर CCTV कैमरे लगे हैं। दीवार पर शमशेरगंज पुलिस का नंबर लिखा है। घर के आसपास सेना और BSF जवान तैनात हैं। 50 कदम दूर BSF की बख्तरबंद गाड़ी खड़ी है। सुरक्षा के ये इंतजाम एक साल पहले हुई हिंसा की वजह से थे। 11 अप्रैल 2025 को वक्फ संशोधन कानून के विरोध में यहां रैली निकाली गई। बेकाबू भीड़ ने पारुल के पति हरगोविंद दास और बेटे चंदन को घर के सामने ही काट डाला। बंगाल ही नहीं, देशभर में घटना का विरोध हुआ। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव हैं। जाफराबाद में लोग इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बता रहे हैं और TMC को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि यहां से 142 किमी दूर मालदा में इसकी चर्चा भी नहीं है। मुर्शिदाबाद ही नहीं, बीते 5 साल में मालदा, कूचबिहार, नादिया, झाड़ग्राम, बीरभूम और संदेशखाली में कई हिंसक घटनाएं हुईं। इन इलाकों में विधानसभा की कुल 76 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 54 सीटें TMC और 22 BJP के पास हैं। ‘भीड़ ने पति-बेटे को मार दिया, सरकार से आज तक मदद नहीं मिली’
सबसे पहले हम पारुल दास से मिले। हमें देखते ही वहां कुछ और लोग कैमरा लेकर पहुंच गए। पूछने पर पता चला कि इंटेलिजेंस अफसर हैं और हमारी बातचीत रिकॉर्ड करने आए हैं। परिवार के साथ हुई घटना का जिक्र करते ही पारुल भावुक हो गईं। वे बांग्ला में कहती हैं, ‘आज भी पति और बेटे का इंतजार करती हूं। जानती हूं, वे नहीं आएंगे, लेकिन क्या करूं। भीड़ ने जिस तरह आंखों के सामने दोनों को काट डाला, वो मंजर आज भी सपने में आता है। हमें पुलिस और सरकार से न तब मदद मिली, न अब मिल रही है। जो कुछ भी किया, वो शुभेंदु अधिकारी ने किया। वही समय-समय पर मदद करते रहे हैं।‘ आपके घर पर कई पार्टियों के झंडे लगे हैं, क्या चुनाव में मदद का कोई वादा मिला? पारुल कहती हैं, ‘आसपास TMC वाले आते हैं, लेकिन हमारे यहां शुभेंदु अधिकारी के अलावा कोई नहीं आया।‘ पारुल अब बीड़ी बनाकर परिवार का खर्च चला रही हैं। वे कहती हैं, ‘अफसोस यही है कि पति-बेटे की हत्या के 13 दोषियों को सजा हुई, लेकिन फांसी नहीं मिली।’ ‘पार्टियां चुनाव में सिर्फ वोट मांगती हैं, मुसीबत में नहीं आतीं’
जाफराबाद में हम कुछ और महिलाओं से मिले। हिंसा के सवाल पर वे कहती हैं, ‘हम खौफ के माहौल में जी रहे थे, लेकिन 24 घंटे BSF की तैनाती और CCTV कैमरे लगने से डर कम हुआ है।‘ चुनाव को लेकर उनका कहना है कि नेता बस वोट मांगने आते हैं, लेकिन मुसीबत पड़ने पर कोई नहीं पूछता। अबकी शांति बनी रहे, इसलिए वोट करेंगे। ‘हिंदू-मुस्लिम कहकर भड़काती है BJP, TMC से सुरक्षा की उम्मीद नहीं’
इसके बाद हम मुर्शिदाबाद के घनश्यामपुर गांव पहुंचे। ये बॉर्डर वाला इलाका है। बांग्लादेश सिर्फ 4 किमी दूर है। यहां मिले सलीम हिंसा के मुद्दे पर कहते हैं, ‘अभी शांति है, क्योंकि ममता अच्छी CM हैं। हिंसा के पीछे BJP का हाथ है। वही हिंदू-मुस्लिम करती है, इसलिए माहौल बिगड़ता है। हम सब मिलकर रहते हैं।‘ मुर्शिदाबाद के धुलियान में रहने वाले मनोरंजन घोष का कहना हैं, ‘पिछले साल 11 अप्रैल को वक्फ बिल को लेकर रैली निकलने की जानकारी थी, लेकिन उन्हीं लोगों ने हिंसा कर दी। यहां 33.21% हिंदू हैं, बाकी मुस्लिम हैं। इस बार TMC की सरकार बदल देंगे।‘ यहीं रहने वाले सुमन दास कहते हैं, ‘हिंसा वाले दिन पुलिस ने ही थाने पर ताला लगा दिया था। इस सरकार से सुरक्षा की उम्मीद कैसे करेंगे।‘ मालदा में हिंदू बोले- दंगों में थाने बंद करके छिप जाती है पुलिस
मुर्शिदाबाद के बाद हम मालदा पहुंचे। यहां पिछले साल मोथाबाड़ी इलाके में रामनवमी से पहले हिंसा भड़की थी। पुलिस थाने के पास चौराहे पर जहां हिंसा हुई, वहां मस्जिद-मंदिर आसपास हैं। यहां ज्यादातर लोग कैमरे पर बात करने को राजी नहीं हुए, सिर्फ कृष्ण मंडल से बात हुई। वे कहते हैं, ‘रामनवमी के दिन पटाखे जलाए गए थे। हिंदुओं पर आरोप लगा कि उन्होंने मस्जिद के पास पटाखे फोड़े, जबकि ऐसा नहीं हुआ था। सैकड़ों की भीड़ ने दुकानों और घरों में तोड़फोड़ कर दी। सब लूट लिया। हम शिकायत भी नहीं कर सके, क्योंकि हिंसा शुरू होते ही पुलिस खुद छिप गई थी। BSF जवानों के आने पर हालात काबू में आए। हम डर में जीते हैं, इसलिए इससे छुटकारा पाने के लिए वोट करेंगे।‘ नादिया, झाड़ग्राम और बीरभूम में तनाव, जवान तैनात
अब बात बाकी हिंसा वाले इलाकों की। नादिया में राजनीतिक हत्या मुद्दा है और लोगों के बीच उसकी चर्चा भी है। यहां हाईवे से ही BSF तैनात नजर आती है। दूरदराज वाले इलाकों में भी जवान मौजूद हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां हिंसा होती है, लेकिन उसे वोट में कन्वर्ट करना आसान नहीं है। बीरभूम के कई इलाकों में चुनाव से पहले तनाव का माहौल है। हमने जहां भी कैमरा ऑन करने की कोशिश की, लोगों ने यही पूछा कि किस पार्टी ने भेजा है। कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ। यहां TMC मजबूत दिख रही है। वोटिंग और नतीजे वाले दिन हिंसा की आशंका को लेकर पुलिस मुस्तैद है। इधर, 74.06% हिंदू आबादी वाले कूचबिहार में जगह-जगह कमल के पोस्टर दिखे। यहां की 9 में से 7 सीटों पर BJP का कब्जा है और वो इस बार भी मजबूत दिख रही है। चुनाव पर हिंसा और तनाव का असर नहीं दिख रहा है। वहीं, झाड़ग्राम में चुनावी माहौल में होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बल लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं। TMC, BJP और लेफ्ट के बीच कड़ा मुकाबला है। संदेशखाली में जमीन कब्जा करने और महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों की चर्चा है, क्योंकि BJP इसे लेकर खास अभियान चला रही है। हालांकि, लोगों के बीच इसकी चर्चा नहीं है। एक्सपर्ट बोले- बंगाल में हिंसा आम बात, ये चुनाव में मुद्दा नहीं
इस बार चुनाव में हिंसा मुद्दा है या नहीं, इस पर पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं, ‘बंगाल चुनाव में हिंसा परंपरा बन चुकी है। मुर्शिदाबाद, बीरभूम और इसके आसपास के इलाकों में छोटी-बड़ी घटनाएं होती हैं, लेकिन मुद्दा नहीं बन पातीं। हावड़ा और हुगली में भी पहले कई बार हिंसा हुई, लेकिन चुनाव में कभी इसका असर नहीं दिखा।‘ हिंसा वाले इलाकों में कौन पार्टी मजबूत है? इस पर वे कहते हैं, ‘मालदा, गनी खान के समय से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। हालांकि, अब कई इलाकों में TMC ने घुसपैठ कर ली है। पिछले साल 4 सीटें BJP ने भी जीती। इसी तरह मुर्शिदाबाद में भी 22 में से 20 सीटें TMC के पास हैं, लेकिन दो सीटों पर BJP जीती है। बीरभूम और मुर्शिदाबाद में TMC मजबूत है। मालदा में भी एकाध सीट कांग्रेस जीत सकती है, इसके अलावा TMC ही मजबूत दिख रही है।‘ मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में चंदन हत्याकांड की काफी चर्चा है, चुनाव में इसका कितना असर होगा? प्रभाकर कहते हैं, ‘इसका ज्यादा असर नहीं होने वाला। अभी वहां TMC मजबूत है।‘ पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य का भी मानना है कि बंगाल में हिंसा होती है, लेकिन ये चुनावी मुद्दा नहीं बनती। खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा और इसके आसपास के इलाकों में हिंसा आम बात है।‘ ममता बोली थीं- मुस्लिम हिंसा भी करेंगे, तो सपोर्ट करेंगे
BJP प्रवक्ता बिमल शंकर नंदा कहते हैं, ‘ममता बनर्जी ने भी कहा था कि जो गाय दूध देती है, अगर वो लात भी मारेगी तो सहेंगे। उनके कहने का मतलब साफ है कि अगर इस समुदाय (मुस्लिम) के लोग हिंसा भी करते हैं, तो उसे सपोर्ट करेंगे।‘ वहीं, TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता कहते हैं, ‘राज्य में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी हमारी है। अगर कभी हिंसा होती, तो हमारी ही जिम्मेदारी बनेगी। देश के PM और केंद्रीय गृह मंत्री बंगाल में आकर बोलते हैं कि सबका हिसाब होगा, कब्र से निकालेंगे। BJP ही हिंसा और खून खराबा कराती है।‘ …………….
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