Heatwave 2026 Forecast; IMD May June Weather Prediction

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धरती के 50 सबसे तपते शहर इस वक्त भारत में ही हैं। 22 मई को सबसे ज्यादा यूपी के बांदा में 47.6°C, एमपी के खजुराहो में 47.4°C, महाराष्ट्र के वर्धा में 47.1°C तापमान दर्ज हुआ। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी, एमपी, गुजरात और राजस्थान में लगातार ही

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जब मई इतना खौल रहा तो जून में क्या होगा, इस बार क्यों पड़ रही इतनी गर्मी और कब तक आएगा मानसून; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: देश में अभी हीटवेव का असर कहां-कहां और कितना है?

जवाब: बीते 2 दिनों से हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, विदर्भ, पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 42 से 47°C तापमान वाली भीषण गर्मी के साथ हीटवेव की स्थिति बनी हुई है।

IMD के मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी के मुताबिक, किसी इलाके में तापमान सामान्य से ज्यादा हो और दो या ज्यादा दिनों तक तेज लू चलने लगे, तो उसे हीटवेव माना जाता है। IMD ने पैरामीटर बनाया है कि किसी इलाके में तापमान सामान्य से 4.5°C ज्यादा होने पर हीटवेव और 6.4°C ज्यादा होने पर सीवियर हीटवेव होगी।

सवाल-2: इस बार इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही?

जवाब: भूमध्य रेखा एक ऐसी काल्पनिक लाइन है, जो धरती को दो हिस्सों में बांटती है। इस पर सूरज की सीधी किरणें पड़ती हैं, वहीं भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा पर है। आम तौर पर भारत में मार्च से अप्रैल के पहले हफ्ते में गर्मी की शुरुआत होती है। फिर मई से आधे जून तक सूरज भूमध्य रेखा से कर्क रेखा की तरफ बढ़ता है। ऐसे में इस इलाके में गर्मी अपने पीक पर पहुंच जाती है। फिर जून के आखिरी हफ्ते में मानसूनी हवाओं से गर्मी थोड़ी कम होने लगती है।

इस बार अप्रैल-मई में ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। इसके पीछे की वजहें समझने के लिए दो चीजों का मतलब जानना जरूरी है-

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस: भारत के पश्चिम में भूमध्य सागर से तूफानी हवा नमी लेकर भूमध्य सागर, काला सागर से ईरान, अफगानिस्तान होते हुए भारत तक आती है, जिसे ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ कहते हैं। ये हवा भारत में आकर यहां के वेदर पैटर्न को डिस्टर्ब करती है, इसलिए डिस्टर्बेंस शब्द जुड़ा।

जेट स्ट्रीम: जमीन से करीब 8 से 15 किमी ऊपर क्षोभमंडल या ट्रोपोस्फेयर की ऊपरी लेयर में बहने वाली हवा की तेज धारा को ‘जेट स्ट्रीम’ कहते हैं।

अब इस बार भारत में इतनी गर्मी पड़ने के पीछे 3 वजहें जानिए-

1. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते अप्रैल की शुरुआत में बारिश हुई

  • आम तौर पर जेट स्ट्रीम एक सीधे रास्ते पर बहती है। कभी-कभी ‘U’ आकार में उत्तर और दक्षिण की तरफ मुड़ जाती है।
  • इस बार अप्रैल की शुरुआत में जेट स्ट्रीम U शेप में मुड़ गई और उसने वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को उत्तर और पश्चिम भारत की तरफ मोड़ दिया।
  • इससे गर्मी की बजाय बेमौसम बारिश हुई। उत्तर प्रदेश सहित कई इलाकों में ओले भी गिरे और तेज हवाओं के साथ तापमान में थोड़े समय के लिए गिरावट आई।

2. जेट स्ट्रीम ने गर्म हवा लॉक कर दी, जिससे गर्मी बढ़ गई

  • बारिश होने से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर हो जाता है। इसके पीछे खाली स्पेस बचता है, जो हाई प्रेशर से हवा को नीचे की तरफ खींचता है। नीचे की हवा ऊपर नहीं जा पाती और बादल नहीं बन पाते।
  • इस बार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस गुजरने के बाद मध्य और दक्षिणी भारत के इलाके में आसमान तेजी से साफ हो गया। बादल छंटने और ठंडी हवा न आ पाने से जमीन के ऊपर एक हाई प्रेशर का इलाका बन गया, जिससे जमीन पर गर्मी बढ़ने लगी।
  • यानी जिस जेट स्ट्रीम ने शुरू में राहत दी, उसी के चलते बाद में गर्मी बढ़ गई। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में ‘सब्सिडेंस’ कहते हैं।

3. लंबे समय तक गर्मी से ‘हीट डोम’ बन गया

  • ‘हीट डोम’ असल में जमीन के करीब 5 किमी ऊपर ‘हाई प्रेशर का एक इलाका होता है, जो किसी ढक्कन की तरह गर्म हवा को जमीन के पास ही कैद कर देता है और गर्मी का एक स्थायी दौर शुरू हो जाता है।

ये स्थिति लू चलने के उलट है। लू में गर्मी बढ़ने पर आंधी या गरज के साथ बारिश की स्थिति बन जाती है, जिससे गर्मी ऊपर निकल जाती है और लोगों को राहत मिलती है। वहीं हीट डोम में एक एंटी-साइक्लोन यानी उलटे चक्रवात जैसी स्थिति बनती है, जो हवाओं को नीचे की तरफ भेजता है और हवाएं और गर्म होती हैं।

जमीन के पास जितनी ज्यादा गर्मी होगी, ऊपर उतना ही मजबूत हाई प्रेशर सिस्टम मजबूत होता है। इसीलिए हीट डोम एक बार बनने के बाद हफ्तों तक बना रहता है, जब तक कोई नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या मानसून इस साइकिल को न तोड़ दे।

सवाल-3: अगले कुछ दिन मौसम कैसा रहने वाला है, क्या कुछ राहत मिलेगी?

जवाब: भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक- अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के इलाके में दक्षिण-पश्चिमी मानसून आगे बढ़ रहा है। भारत की 70-80% सालाना बारिश इसी मानसून से होती है।

गुजरात, केरल और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में 23 मई से प्री-मानसून एक्टिविटी शुरू हो सकती है। इन राज्यों के कुछ इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है।

IMD के मुताबिक…

  • 26 मई को मानसून केरल पहुंच सकता है और हल्की बारिश हो सकती है। गुजरात के कुछ इलाके जैसे- नवसारी, वलसाड, डांग, अमरेली, गिर सोमनाथ वगैरह में हल्की बारिश हो सकती है।
  • पूर्वोत्तर के राज्य- अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 मई तक भारी बारिश होने की संभावना है।
  • पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी तूफानी मौसम रह सकता है।
  • तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश सहित दक्षिणी राज्यों में हल्की से भारी बारिश की संभावना है।
  • हालांकि बारिश की वजह से पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के हिस्सों को हल्की राहत मिल सकती है, लेकिन इससे तापमान पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और उमस की स्थिति भी बनेगी।

उत्तर भारत के इलाके हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 22 से 27 मई तक बारिश की संभावना नहीं है। भयंकर हीटवेव जारी रह सकती है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी यही हालात रहेंगे।

सवाल-4: भारत के बाकी हिस्सों में कब तक आएगी राहत की फुहार?

जवाब: गर्मी से राहत मानसूनी बारिश से ही मिल सकती है। मानसून जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, हीटवेव खत्म होती जाती है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, केरल के बाद उत्तर भारत तक पहुंचने में मानसून को 4 से 6 हफ्ते और लगते हैं। यानी राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों, जहां हीटवेव का असर सबसे ज्यादा है, उन्हें बारिश के लिए 15 जून से 31 जून तक का इंतजार करना होगा। जून 2026 के तीसरे सप्ताह तक पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक हीटवेव वाले दिन रह सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे गर्मी से राहत मिलना शुरू होगी।

सवाल-5: इस बार जोरदार गर्मी पड़ी, तो क्या बारिश भी उतनी ही अच्छी होगी?

जवाबः मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2026 के मानसून की शुरुआत पिछले 26 साल में सबसे कमजोर हो सकती है। इस बार सामान्य से 8% कम बारिश का अनुमान है। इसकी वजह है- एल नीनो।

एल नीनो उस कंडीशन को कहते हैं, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसकी वजह से प्रशांत महासागर की सतह पर बहने वाली हवा और पानी के पैटर्न में बदलाव हो जाता है। भारत में हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर होती हैं। इससे भयानक सूखा या तेज गर्मी पड़ती है।

अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन, यानी NOAA के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 तक एल नीनो बनने की संभावना 70% से ऊपर है। इसके बाद ‘सुपर एल नीनो’ आ सकता है।

दरअसल, प्रशांत महासागर की सतह का पानी अगर 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ता है, तो ‘सुपर एल नीनो’ के हालात बनते हैं। ये सामान्य एल नीनो से चार गुना ज्यादा असरदार माना जाता है।

पिछली बार 2015-16 में जब सुपर एल नीनो आया था, तो सामान्य से 14% कम बारिश हुई, दक्षिण एशिया में सूखा पड़ा, फसलें बर्बाद हुईं और खाने की महंगाई आसमान छू गई थी। अब 2026 में वैज्ञानिक कह रहे हैं- यह उससे भी बड़ा हो सकता है।

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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास ———————————————————–

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