शुरुआत दो फोटो से, अलग तारीखें, अलग मौके, लेकिन मैसेज एक- ममता की स्ट्रीट फाइटर वाली इमेज
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पहली फोटो

दूसरी फोटो

2021 में ममता नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही थीं। प्रचार के दौरान पैर में चोट लगी। इसके बाद व्हीलचेयर पर नजर आईं। उसी पर बैठकर 5 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। तब ममता ने कहा था- A wounded tiger is more dangerous, यानी घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है।
चुनाव में TMC ने 215 सीटें जीतकर बहुमत से सरकार बनाई, लेकिन ममता नंदीग्राम से BJP कैंडिडेट सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। फिर भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ा और जीतकर तीसरी बार CM बनीं।।
अब फिर चुनाव है। आज, यानी 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। नजर भवानीपुर सीट पर भी है। मुकाबले में वही दोनों हैं, ममता और सुवेंदु। भवानीपुर ममता का घर है। यहां से सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड उनके खाते में है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वे ममता को फिर हराएंगे या दीदी पिछली हार का बदला लेंगीं, ये 4 मई को पता चलेगा।

भवानीपुर में ममता से ज्यादा एक्टिव रहे सुवेंदु, एक-एक वार्ड में गए
भवानीपुर में ममता ने सुवेंदु के मुकाबले कम सभाएं की हैं। वे प्रचार के लिए पूरे बंगाल में एक्टिव रहीं। 8 अप्रैल को नामांकन के बाद भवानीपुर में 4 बड़ी सभाएं और 3 पदयात्रा कीं। जोर पदयात्रा और नुक्कड़ सभाओं पर ही रहा। डोर टु डोर कैंपेन की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं ने संभाली।
वहीं, सुवेंदु ने ममता के मुकाबले तीन गुना ज्यादा समय दिया। 6 बड़ी सभाएं और 8 रोड शो किए। भवानीपुर में 8 वार्ड हैं और उन्होंने हर वार्ड में कम से कम एक छोटी सभा या पदयात्रा जरूर की। डोर टु डोर कैंपेन समेत कुल 30 से 40 चुनावी कार्यक्रम किए। इसका असर जानने हम भवानीपुर के अलग-अलग एरिया में गए।
जगह: एल्गिन रोड
नंदीग्राम में ममता की हार पर लोग बोले- पहलवान भी कभी-कभी हारता है
25 अप्रैल को ममता अपने गढ़ में पैदल प्रचार पर निकलीं। वही पुराना अंदाज, सफेद साड़ी और हवाई चप्पल। रास्ते में जो मिलता, उससे हाथ मिलातीं। लोगों को देखकर हाथ हिलातीं। महिलाओं से जाकर मिलतीं।

ये रैली एल्गिन रोड इलाके में थी। हम पहुंचे तब इसकी तैयारी चल रही थी। पोस्टर लेकर महिलाएं आगे खड़ी थीं, जबकि पुरुष कार्यकर्ता पीछे थे। वजह पूछने पर एक महिला बोलीं, ‘मां दुर्गा महिला शक्ति का प्रतीक हैं। दीदी भी हमेशा आगे रहना पसंद करती हैं।’
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से रेप और मर्डर का जिक्र करने पर बोलीं, ‘हमने उस केस में विरोध प्रदर्शन किया था। पीड़ित डॉक्टर की मां चुनाव लड़ रही हैं, भले ही वे दूसरी पार्टी से हों, लेकिन वे चुनाव जीतें। उन्हें न्याय मिलना चाहिए।’
कुछ देर में ममता बनर्जी की पदयात्रा गुजरने वाली थी। जय बांग्ला के नारे लग रहे थे। भीड़ में खड़ी एक लड़की बोली- ‘यहां दादा के लिए कोई जगह नहीं है। बांग्ला हमारी पहचान है। जो बंगाली नहीं जानते, वे यहां नहीं टिक सकते।’

एल्गिन रोड की रैली में पोस्टर थामे खड़ीं महिला कार्यकर्ता। आरजीकर कांड के गुस्से के बीच, महिलाओं का लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं का भरोसा ममता की जीत की उम्मीद बना हुआ है।
हालांकि, उसी सड़क पर कुछ कदम पीछे खड़े एक बुजुर्ग कहते हैं, ममता अब नहीं चलेगी। पेशे से टीचर मधुश्री कौर कहती हैं कि अभी बता पाना मुश्किल है कि बदलाव होगा या नहीं। चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया है। फिर भी लोगों में डर का माहौल है।
वहीं, सविता कर्मकार जोर देकर कहती हैं कि कोई बदलाव नहीं होगा। लोगों को दीदी की योजनाओं का फायदा मिल रहा है। किसी को भूखा नहीं रहना पड़ता। युवाओं को काम मिला है।
इलाके के एक बुजुर्ग नंदीग्राम में ममता की हार पर हंसते हुए बोले, ‘पहलवान भी कभी-कभी हारता है। वहां मिसमैनेजमेंट की वजह से हारे थे। इस बार रिजल्ट अच्छा होगा। विपक्ष के लिए यहां ज्यादा जगह नहीं है।’

जगह: कालीघाट
काली मां दरबार में दादा-दीदी की दस्तक, पुजारी बोले- दीदी ही जीतेगी
भवानीपुर में मशहूर शक्तिपीठ कालीघाट हैं। मां काली के दरबार में दादा सुवेंदु अधिकारी और दीदी बराबर आशीर्वाद के लिए आते रहते हैं। पिछली बार दोनों एक ही दिन पहला बैसाख, यानी बंगाली न्यू ईयर पर पहुंचे थे।
कालीघाट मंदिर के पुजारी राजा कहते हैं, ‘इस बार ममता बनर्जी ही जीतेंगी। वे हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहती हैं। सुवेंदु अधिकारी सिर्फ चुनाव में नजर आते हैं।’

पोइला बैसाख या बंगाली नववर्ष पर ममता बनर्जी आशीर्वाद लेने कालीघाट मंदिर पहुंची थीं।
मंदिर के पास मिले भवानी ट्रांसजेंडर हैं। मंदिर के आसपास मांगकर गुजारा करते हैं। भवानी कहते हैं, ‘लॉकडाउन के दौरान सरकार से चावल, दाल और बाकी जरूरी सामान मिला था। इसलिए मैं ममता बनर्जी के साथ हूं।’
यहीं रहने वाले दीप नारायण विश्वास मानते हैं कि इलाके में शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है। इसलिए लोगों को बदलाव का एहसास कम होता है। कई लोग खुलकर नहीं बोलते। डर रहता है कि उनकी बातें ऊपर तक पहुंच सकती हैं।
थोड़ा आगे स्कूटी से जा रहे मनोज पांडा मिले। उनका मानना है कि इस बार बदलाव हो सकता है। पिछले 5 साल में ममता बनर्जी ने कुछ काम किए हैं, लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं के काम का असर उनकी जीत के अंतर पर पड़ सकता है।
प्रसेनजीत भवानीपुर में मिठाई की दुकान में काम करते हैं। वे कहते हैं कि यहां BJP और TMC दोनों के झंडे नजर आ रहे हैं, लेकिन माहौल ममता बनर्जी के पक्ष में है।
जगह: हरीश मुखर्जी स्ट्रीट
ममता के घर वाले इलाके में कड़ी सुरक्षा, लोग बोले- मुकाबला दिलचस्प है
ममता का घर कालीघाट की हरीश मुखर्जी स्ट्रीट पर है। घर के आसपास पुलिस तैनात है। हमने आसपास के लोगों से बात की, लेकिन ज्यादातर लोग खुलकर नहीं बोले। यहीं मिले तापस घोष बताते हैं, ‘आमतौर पर यहां लोग अपनी राजनीतिक पसंद नहीं बताते।’
इस बार कौन जीत रहा है? तापस जवाब देते हैं, ‘ममता का पिछला रिकॉर्ड अच्छा है। उनके पास बढ़त है। हालांकि, सुवेंदु अधिकारी को भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। मुकाबला दिलचस्प है। मैं दोस्तों से इस पर बात करता हूं, तो समझ आता है कि 4 तारीख को नतीजे आने से पहले कोई भी नहीं कह सकता कि कौन जीतेगा।’
तापस घोष दावा करते हैं कि SIR की वजह से वोटर लिस्ट से करीब 40 हजार नाम कटे हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनमें कुछ लोगों के नाम लिस्ट में हैं और कुछ के नहीं। रिजल्ट पर इसका असर दिखेगा।

तभी तापस के बगल में बैठे शख्स बोल पड़ते हैं, ‘प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों में बहुत भीड़ आई है। हम लोग तो टीवी पर ही ऐसी भीड़ देखते हैं। मीडिया वाले समझ सकते हैं कि इतने लोग कहां से आ रहे हैं। लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। इस बार जीत-हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा।’
यहीं आगे लॉटरी की दुकान पर कुछ लोग टिकट खरीदते मिले। दुकान चलाने वाले तपोन सुवेंदु की जीत का दावा करते हैं। कहते हैं, ‘इस बार भवानीपुर में सुवेंदु की लॉटरी लगेगी।’
दीदी से क्या नाराजगी है? तपोन जवाब देते हैं, ‘क्योंकि आरजी कर मामले में अब तक इंसाफ नहीं मिला।’

एक्सपर्ट बोले- 25% मुस्लिम वोटर अहम, मिडिल क्लास वोटर से BJP को फायदा रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, ‘भवानीपुर ममता बनर्जी का होम ग्राउंड है। यहां के ज्यादातर काउंसलर TMC से जुड़े हैं। करीब 25% मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए शुरुआती बढ़त ममता के पास है।’
‘अगर मिडिल क्लास और पढ़ा-लिखा वर्ग बड़ी संख्या में वोट डालने निकलता है, तो मुकाबला कड़ा होगा। इससे BJP को फायदा मिल सकता है। अगर पारंपरिक वोटिंग पैटर्न बना रहा, तो स्थिति पहले जैसी ही रहने की संभावना ज्यादा है।’
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1. बंगाल चुनाव यानी डर, ममता के मोहल्ले में पुलिस की दादागिरी, बाहर TMC की

‘ये बंगाल है, वेस्ट बंगाल, बंगाली में बात करो… जो बोला जाए, उसका जवाब बंगाली में दो।‘ हमसे ये बात खुद को पुलिसवाला बता रहे एक शख्स ने कही। जगह- कोलकाता का भवानीपुर। ये ममता का मोहल्ला है। हां, ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के घर के बाहर। ये महज एक घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हमें डर का ये माहौल जगह-जगह नजर आया। पढ़िए पूरी खबर…
2. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली

पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…















