Mumbai Phone Hacking Scam Case; WhatsApp APK File

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9 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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हाल ही में मुंबई की एक 78 साल की बुजुर्ग महिला के साथ 25 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया। साइबर क्रिमिनल्स ने महिला का फोन हैक करके इस स्कैम को अंजाम दिया।

स्कैमर्स ने वॉट्सएप के जरिए महिला से संपर्क किया और खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताया। बातचीत से भरोसा जीतने के बाद कनेक्शन में नाम अपडेट के लिए एक APK फाइल डाउनलोड करने और पेमेंट करने को कहा। महिला के पेमेंट करते ही उनका फोन हैक हो गया और खाते से 25 लाख रुपए कट गए। ऐसे में इस स्कैम को समझना बेहद जरूरी है।

इसलिए ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम ‘फोन हैकिंग स्कैम’ के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • कैसे पता चलेगा कि फोन हैक तो नहीं हुआ है?
  • फोन हैकिंग से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- फोन हैकिंग स्कैम क्या है?

जवाब- ये एक तरह का साइबर फ्रॉड है।

  • इस स्कैम में ठग यूजर का फोन हैक कर लेते हैं।
  • इसके जरिए सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन चुरा लेते हैं।
  • बैंक डिटेल्स और पासवर्ड पता कर लेते हैं।
  • इसके बाद बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं।
  • फोन हैकिंग के लिए ठग फर्जी लिंक, APK फाइल का सहारा लेते हैं।

सवाल- स्कैमर्स किन तरीकों से फोन हैक कर सकते हैं?

जवाब- स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से यूजर को फंसाकर फोन का एक्सेस ले लेते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में इसे देखिए-

आइए इन पॉइंट्स को समझते हैं-

फिशिंग लिंक/फेक मैसेज फ्रॉड

  • SMS या वॉट्सएप पर फर्जी लिंक भेजते हैं, जो बैंक, KYC या प्रोडक्ट डिलीवरी के नाम पर होते हैं।
  • लिंक पर क्लिक करते ही यूजर की पर्सनल और बैंकिंग जानकारी स्कैमर्स तक पहुंच जाती है।

APK फाइल के जरिए फ्रॉड

  • ठग यूजर से .apk फाइल डाउनलोड करवाते हैं।
  • इंस्टॉल होते ही यह एप फोन का डेटा, मैसेज और OTP तक एक्सेस कर लेता है।

OTP या वेरिफिकेशन कोड के जरिए फ्रॉड

  • स्कैमर्स खुद को बैंक या सर्विस एजेंट बताकर OTP मांगते हैं।
  • OTP मिलते ही यूजर का अकाउंट-पासवर्ड बदलकर कंट्रोल ले लेते हैं।

सिम स्वैप फ्रॉड

  • ठग यूजर की जानकारी जुटाकर मोबाइल कंपनी से उसका नंबर नए SIM पर ट्रांसफर करवा लेते हैं।
  • इससे असली SIM बंद हो जाता है और सभी OTP स्कैमर को मिलने लगते हैं।

कॉल फॉरवर्डिंग फ्रॉड

  • यूजर से कोई USSD कोड डायल करवाया जाता है, जिससे उसकी कॉल्स दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती हैं।
  • इससे OTP कॉल्स और जरूरी कॉल्स सीधे स्कैमर तक पहुंचती हैं।

सोशल इंजीनियरिंग

  • ठग बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर या सरकारी एजेंट बनकर कॉल करते हैं।
  • वे यूजर को डर या लालच देकर उसकी जानकारी और एक्सेस ले लेते हैं।

सवाल- फोन हैकिंग से क्या नुकसान हो सकते हैं?

जवाब- फोन हैक करने के बाद स्कैमर्स पैसे उड़ाने के साथ के साथ निजी डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। यूजर के अकाउंट्स से दूसरों को भी ठगी का शिकार बना सकते हैं। सभी संभावित रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कैसे पता चलेगा कि फोन हैक तो नहीं हुआ है?

जवाब- कुछ आसान संकेतों से फोन हैकिंग का पता लगाया जा सकता है। नीचे ग्राफिक में इसे देखिए-

सवाल- फोन हैकिंग का पता चलने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, तुरंत कार्रवाई करें-

  • सिम सर्विस प्रोवाइडर से अपना SIM ब्लॉक करवाएं।
  • बैंक से संपर्क करके अकाउंट्स ब्लॉक कराएं।
  • किसी दूसरे डिवाइस से सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड बदलें।
  • सभी संदिग्ध एप्स अनइंस्टॉल करें।
  • फोन फैक्ट्री रीसेट करें।
  • नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करें।
  • साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत करें।

सवाल- फोन हैकिंग स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- किसी भी स्कैम से बचने के लिए सतर्क रहना सबसे जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर अपने फोन और अकाउंट्स को सुरक्षित रख सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) क्या है? इसे फोन में इनेबल करना क्यों जरूरी है?

जवाब- यह फोन को अतिरिक्त सुरक्षा देता है। जैसेकि-

  • लॉगिन के लिए पासवर्ड के अलावा दूसरा वेरिफिकेशन (जैसे OTP, फिंगरप्रिंट या ऑथेंटिकेटर एप कोड) भी जरूरी होता है।
  • अगर गलती से पासवर्ड लीक हो जाए, तब भी अकाउंट सेफ रहने के चांस रहते हैं।
  • कोई भी अनजान व्यक्ति आपके अकाउंट में आसानी से लॉगिन नहीं कर सकता है।

सवाल- फोन हैक की शिकायत कहां और कैसे करें?

जवाब- सबसे पहले अपने बैंक और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर को सूचित करें।

  • नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके तुरंत सहायता लें।
  • cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें।
  • शिकायत करते समय सभी सबूत (जैसे स्क्रीनशॉट, मैसेज या कॉल डिटेल) साथ रखें, ताकि कार्रवाई जल्दी हो सके।

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