पेपर लीक के चलते रद्द हुआ NEET-UG का एग्जाम 21 जून को दोबारा होगा। इस बार पेपर पहुंचाने से लेकर बाकी प्रोसेस में एयरफोर्स और आर्मी की मदद ली जाएगी।
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इधर CBSE ने 12th एग्जाम की कॉपी पहली बार डिजिटल तरीके से चेक करवाईं। बच्चों ने इसमें कई तरीके की खामियां बता दीं। मार्किंग का काम प्राइवेट कंपनी के जिम्मे था।
आखिर देश के बड़े एग्जाम बिना गड़बड़ के क्यों नहीं हो पा रहे, सरकार, सिस्टम कहां फेल और इसका इलाज क्या, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: NEET का रीएग्जाम करवाने में सेना क्यों लगानी पड़ रही? जवाब: 3 मई 2026 को देशभर के 22.79 लाख छात्रों ने NEET-UG 2026 का एग्जाम दिया। 7 मई को खबर आई कि क्वेश्चन-पेपर सोशल मीडिया पर एग्जाम से पहले ही लीक हो चुका था। 12 मई को NTA ने मामले की जांच CBI को सौंपी। अब तक इसमें 13 गिरफ्तारियां हुई हैं। अब एग्जाम 21 जून को दोबारा होगा।
28 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, NTA के निदेशक अभिषेक सिंह के अलावा एयरफोर्स के कई सीनियर अफसर भी मौजूद थे।
अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में फैसला हुआ कि क्वेश्चन पेपर की सेटिंग से लेकर छपाई, ट्रांसपोर्टेशन और डिलीवरी की प्रक्रिया में सेना को शामिल किया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले ये जिम्मेदारी अकेले डाक विभाग की थी, लेकिन इस बार सभी सेंटर पर पेपर पहुंचाने में एयरफोर्स की मदद ली जाएगी।
हालांकि, NTA के अधिकारियों का कहना है कि सेना की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन या मौसम से जुड़ी किसी इमरजेंसी के दौरान ही होगी। परीक्षा की निगरानी में कोई भूमिका नहीं होगी।

नीट पेपर लीक के विरोध में पिछले 20 दिनों से देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं।
सवाल-2: CBSE 12th के रिजल्ट में गड़बड़ी कैसे हुई?
जवाब: देशभर के कुल 17.68 लाख छात्रों ने 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच 2026 की CBSE 12th बोर्ड के एग्जाम दिए। रिजल्ट आया तो, पिछली बार के 88.39% मुकाबले इस बार 85.2% स्टूडेंट्स ही पास हुए। बोर्ड एग्जाम देने वाले 22% यानी 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपी दोबारा जांचने यानी री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया है।
कई स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर फिजिक्स और मैथ्स में कम नंबर आने की शिकायत की। इनमें JEE क्वालिफाई कर चुके स्टूडेंट्स भी हैं। स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स में स्कैन कॉपी ब्लर होने पर भी नंबर काटे गए। दिल्ली के एक स्टूडेंट वेदांत श्रीवास्तव ने बताया कि जो फिजिक्स की आंसर शीट भेजी गई, उसमें किसी और की हैंडराइटिंग है।
- दरअसल, CBSE ने कॉपियां जांचने के लिए पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग, OSM नाम की एक नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। इसे ही गड़बड़ी की जड़ बताया जा रहा है।
- ऑन-स्क्रीन मार्किंग में आंसर शीट्स को स्कैन करके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है, फिर टीचर्स कंप्यूटर स्क्रीन पर ही कॉपियां जांचते हैं और मार्क्स सीधे सिस्टम में दर्ज कर देते हैं।
- CBSE का कहना है कि इससे चेकिंग ज्यादा तेज और सटीक ढंग से होती है और मार्क्स जोड़ने या डेटा एंट्री में होने वाली गड़बड़ियों में कमी आती है।
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 27 मई को X पर लिखा, ‘OSM का ठेका ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की एक कंपनी को दिया गया।’
- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Coempt Edutech प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद बेस्ड कंपनी है। इसे CBSE ने OSM के जरिए 12वीं के बोर्ड की कॉपी चेक करने का ठेका दिया था।
- ये फर्म तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है। 2019 में इसका नाम ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड था। तब इस पर तेलंगाना में 12वीं के बोर्ड एग्जाम में डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस साल राज्य में 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे।
28 मई को धर्मेंद्र प्रधान ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बात मानी और कहा कि हर शिकायत का समाधान किया जाएगा।

छात्रों ने X पर अपनी आंसर शीट्स की तस्वीरें शेयर कीं। आरोप है कि स्कैन कॉपी ब्लर यानी धुंधली होने के बावजूद नंबर काटे गए।
सवाल-3: आखिर देश के बड़े एग्जाम ठीक से क्यों नहीं हो पा रहे?
जवाब: अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर सबसे बड़े 3 एग्जाम हैं- मेडिकल कॉलेजेज में एंट्रेंस के लिए NEET-UG, इंजीनियरिंग कॉलेजेज में एडमिशन के लिए IIT-JEE मेन्स और यूनिवर्सिटीज में एंट्रेंस के लिए CUET-UG। इस साल NEET एग्जाम में 22.8 लाख, JEE में 16 लाख और CUET में 18.68 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे।
संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में NTA के जरिए हुए 14 एग्जाम में से कम से कम 5 में पेपर लीक, पेपर में गलतियां, रिजल्ट में देरी जैसी दिक्कतें हुईं। UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG के एग्जाम रोकने पड़े और CUET-UG और PG का रिजल्ट आने में देरी हुई।
इन बड़े एग्जाम में गड़बड़ के पीछे 3 बड़ी वजहें है…
1. एग्जाम एजेंसी से सेंटर तक पेपर लीक माफिया का मजबूत नेक्सस
- ज्यादातर पेपर लीक के मामलों में एक आपराधिक नेक्सस सामने आता है। इसमें कोचिंग सेंटर्स, बिचौलिए और एग्जाम एजेंसी से जुड़े भ्रष्ट ऑफिसर्स शामिल होते हैं।
- 2024 के NEET UG एग्जाम में कोचिंग नेटवर्क से लेकर बिचौलियों तक ने पेपर लीक कराया।
- वहीं 2026 के NEET UG एग्जाम में NTA के अंदर के 3 लोग शामिल थे- CBI ने पुणे के रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर P.V. कुलकर्णी, पुणे की बायोलॉजी की टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पुणे की ही फिजिक्स की टीचर मनीषा संजय हवालदार।
- NTA ने इन तीनों को सब्जेक्ट एक्सपर्ट नियुक्त किया था। CBI ने कुलकर्णी को पेपर लीक का सोर्स बताया है। वहीं मनीषा के पास बायोलॉजी के पूरे सवालों का नेक्सस था।
- इन लोगों के जरिए एग्जाम से पहले ही सवालों का एक ‘गेस पेपर’ तैयार हुआ, जिसे बाद में 15 लाख रुपए तक में बेचा गया। पेपर खुलेआम व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैनल्स पर भी शेयर किया जा रहा था।
2. पेपर की प्रिंटिंग से डिलीवरी तक का काम प्राइवेट फर्म्स पर निर्भर
- NTA हर साल देश के 550 शहरों में करीब 5,500 एग्जाम सेंटर्स पर सालाना 18 से ज्यादा नेशनल लेवल के एग्जाम करवाती है।
- जबकि दिसंबर 2024 तक NTA में डेप्युटेशन यानी अस्थायी नौकरी में 22 लोग थे। कांट्रैक्ट बेसिस पर 38 लोगों का स्टाफ और 138 लोग दूसरी फर्मों से आउटसोर्स किए गए थे। ये स्टाफ इतने एग्जाम करवाने के लिए बेहद कम है। NTA के करीब 50% सीनियर पद अभी भी खाली हैं।
- एग्जाम में क्वेश्चन पेपर की प्रिंटिंग, पैकिंग, स्टोरेज और हजारों एग्जाम सेंटर्स तक ट्रांसपोर्टेशन का काम प्राइवेट एजेंसीज और वेंडर्स के जिम्मे रहता है।
- 2024 के NEET पेपर लीक के बाद बनी राधाकृष्णन समिति की सिफारिश थी कि एग्जाम से ठीक पहले सेंटर्स पर ही डिजिटल-एन्क्रिप्टेड क्वेश्चन पेपर छपे, अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन हो और एथिकल हैकर्स का इस्तेमाल करके एक रेगुलर सिक्योरिटी टेस्ट किया जाए। आरोप है कि NTA ने इनमें से कोई भी सुधार लागू नहीं किया और वेंडर्स के पुराने फिजिकल लॉजिस्टिक्स सिस्टम पर ही निर्भर रहा।
- बीते 6 सालों में NTA को करीब 3,512 करोड़ रुपए मिले। संसदीय समिति ने NTA से पूछा था कि प्राइवेट वेंडर्स पर निर्भर रहने के बजाय इस पैसे से जरूरी समाधान क्यों नहीं किए गए।
- एलेन इंस्टीट्यूट, भोपाल के सेंटर हेड ऋषिकेश शर्मा कहते हैं कि NEET एग्जाम में करीब 2 लाख लोगों का स्टाफ लगता है। पेपर लीक होने के चांसेज ज्यादा होते हैं। NTA अबतक SSC और UPSC की तरह सेंट्रलाइज्ड सिस्टम नहीं बना सका। प्रिंटिंग से ट्रांसपोर्ट तक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि, पेपर बच्चों तक पहुंचने से पहले कम-से-कम हाथों से गुजरे।
- शिक्षाविद शशि प्रकाश सिंह कहते हैं, ‘गड़बड़ करने वाली आउटसोर्सिंग फर्म्स पहले ही दूसरी जगह ब्लैकलिस्टेड होती हैं, ये नाम बदलकर दूसरे राज्य जाकर काम करने लगती हैं।’
3. NTA की जवाबदेही नहीं, पेपर लीक का कानून कमजोर
- NTA सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड एक सोसायटी है, न कि UPSC की तरह कोई संवैधानिक निकाय। SSC भी एक वैधानिक बॉडी है। मतलब ये कि इन एजेंसियों की तरह NTA की संसद के लिए कोई जवाबदेही नहीं है।
- सोसायटी होने के चलते NTA, CAG यानी महालेखा परीक्षक के दायरे से बाहर है। एग्जाम सिक्योरिटी, वेंडर, डेटा सेफ्टी जैसे मुद्दों पर NTA कैसा काम कर रहा है, इसका कोई परफॉरमेंस ऑडिट सार्वजानिक तौर पर मौजूद नहीं है।
- 2024 NEET पेपर लीक से अबतक NTA के तीन डायरेक्टर बदले। सुबोध कुमार सिंह को हटाकर राजेश लखानी और फिर अभिषेक कुमार सिंह को लाया गया। कभी NTA पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- नकल रोकने के लिए 2024 के कानून- पब्लिक एग्जाम (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट में एक करोड़ का जुर्माना और 3 से 10 साल जेल की सजा है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेपर लीक के सिर्फ 5 से 10% मामलों में ही आरोपी दोषी साबित होते हैं।
- ऋषिकेश शर्मा कहते हैं कि NTA स्टाफ, एजेंसीज और पेपर लीक गिरोह के बीच डर कायम नहीं होगा, तो बच्चों के साथ ये क्राइम भी नहीं रुकेगा।’

NTA के निदेशक अभिषेक सिंह, जिन्होंने 12 मई को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान NEET पेपर लीक की बात मानी थी।
सवाल-4: IIT-JEE, UPSC के एग्जाम में NEET जैसी गड़बड़ क्यों नहीं होती?
जवाब: NEET-UG एग्जाम एक ही शिफ्ट में पूरे देश में एक साथ होता है। ये अकेला एग्जाम है, जिसे NTA ने ऑफलाइन मोड में करवाता है। इसके पीछे ये तर्क है कि आधे सवाल बायोलॉजी के होते हैं, जो न्यूमेरिक वैल्यू के बजाय सब्जेक्टिव नॉलेज के ज्यादा होते हैं। इसलिए अलग-अलग शिफ्ट में सवालों की कठिनता का स्तर बदलने से कुछ स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव हो सकता है।
ऋषिकेश शर्मा कहते हैं, ‘720 मार्क्स के NEET में एक-एक नंबर पर हजारों रैंक आती हैं। पेपर आसान होने के चलते स्कोरिंग हाई हो जाती है। सिलेक्शन 85% मार्क्स के ऊपर होता है, इसलिए विंडो बहुत छोटी है। अगर कुछ सवाल भी लीक हो जाएं, तो पूरा पेपर कॉम्प्रोमाइज हो जाता है। इसीलिए इसमें पैसे और कमाई का खेल बहुत ज्यादा होता है।’
वहीं IIT-JEE कई शिफ्ट में होता है। इसके दो एग्जाम होते हैं- मेन्स और एडवांस्ड। इसके अलावा हर शिफ्ट में एग्जाम पेपर अलग होता है। ऋषिकेश शर्मा कहते हैं कि ये पेपर मुश्किल बनाया जाता है। 25% मार्क्स लाने पर भी सिलेक्शन हो जाता है। बच्चों को सिलेक्शन के लिए बड़ी विंडो मिलती है। इसलिए नकल और पेपर लीक के गिरोहों के लिए ये एग्जाम मुफीद नहीं है। अगर किसी शिफ्ट में कोई गड़बड़ हुई भी है, तो पूरे देश में JEE के रिजल्ट पर असर नहीं पड़ता।
इसी तरह UPSC के CSE के एग्जाम में बीते 5 सालों में पेपर लीक की कोई रिपोर्ट नहीं है। इसमें 3 फेज यानी प्री, मेन्स और इंटरव्यू के जरिए सिलेक्शन होता है। मेन्स एग्जाम सब्जेक्टिव होता है, यानी जवाब लिखकर देना होता है। ऐसे में नकल के जरिए किसी को पास करवाना मुश्किल होता है।
शशि प्रकाश कहते हैं कि UPSC एक सेंट्रल स्ट्रक्चर के तहत एग्जाम करवाता है। साथ ही पूरे प्रोसेस में प्राइवेट वेंडर्स को काम की आउटसोर्सिंग बहुत कम होती है। इसलिए पेपर लीक की गुंजाइश कम हो जाती है।
सवाल-5: बड़े एग्जाम में पेपर लीक का इलाज क्या है?
जवाब: UPSC ट्यूटर प्रभात रंजन और एलन सेंटर हेड ऋषिकेश शर्मा 5 बातें कहते हैं…
- IIT-JEE में साल में दो बार 20 दिन में करीब 26 लाख बच्चे एग्जाम देते हैं। यही NEET में भी लागू करना होगा, साथ ही पेपर को मुश्किल बनाना होगा।
- हर सब्जेक्ट एक्सपर्ट से सिर्फ 5 से 10 या सीमित संख्या में ही सवाल लिए जाने चाहिए, जैसा UPSC में होता है। इससे किसी एक व्यक्ति को पूरे क्वेश्चन पेपर की जानकारी नहीं मिल पाएगी। पेपर की छपाई सरकार के स्तर पर होनी चाहिए, जैसा UPSC में होता है।
- कई बार गाइडलाइंस न फॉलो करने वाले छोटे संस्थानों को सेंटर बनाया जाता है। सिर्फ चिन्हित कॉलेजों और इंस्टीट्यूट्स को ही सेंटर बनाया जाए।
- NTA का जवाबदेह न होना एक बड़ा लूपहोल है। सरकार को इन संस्थाओं को तकनीकी तौर पर और मजबूत बनाना चाहिए।
- एग्जाम माफिया का नेटवर्क तोड़ने और एग्जाम एजेंसी पर लगाम के लिए सख्त और खास कानून की जरूरत है। पहले भी कानून बने, लेकिन नेशनल लेवल पर उनका असर नहीं दिखा
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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास ———————————————————–
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NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पढ़ें पूरी खबर…















