क्या वोट में बदलेगी थलापति के रोते-चिल्लाते फैंस की भीड़:फैन क्लब बना पार्टी, लोग बोले- जान भी देंगे; स्टालिन या BJP, किसे नुकसान

11 Min Read




15 अप्रैल 2026, तमिलनाडु के चेन्नई का टीनगर। एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय का शाम 4 बजे रोड शो था। तैयारी सुबह 11 बजे से ही शुरू हो गई। जगह-जगह पुलिस की बैरिकेडिंग, स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं के मंच। विजय को देखने के लिए सुबह से फूल-माला लिए सड़कों पर लोग जुटने लगे। रैली टीनगर पहुंचते ही विजय की एक झलक पाने के लिए भीड़ बेकाबू हो गई। उन्हें देखते ही एक शख्स जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसकी आंखों में आंसू थे, क्योंकि इस पल का इंतजार उसने 6 घंटे धूप में खड़े रहकर किया था। विजय को लेकर ये दीवानगी रैली में जगह-जगह दिखी। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। विजय दो महीने पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि विधानसभा चुनाव में लड़ाई ‘विजय बनाम स्टालिन’ है। विजय की एंट्री से तमिलनाडु की राजनीति में क्या बदलेगा, हमने समझने की कोशिश की। विजय दिल में बसते हैं, हमें उनकी राजनीति भी पसंद
चेन्नई में रोड शो के बीच हमें संगीता मिलीं। विजय को देखने के लिए वो गांव से अपने दोस्तों के साथ पहुंचीं। संगीता कहती हैं, ‘विजय हम सबके दिल में बसते हैं, हम उनके लिए जान भी दे सकते हैं। उनसे हमारा लगाव सिर्फ फिल्म स्टार और फैन का नहीं, हम उनकी राजनीति को भी सपोर्ट करते हैं, क्योंकि वो महिलाओं की सुरक्षा, एजुकेशनस, ड्रग्स और भ्रष्टाचार के जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। वे रोजगार की बात कर रहे हैं।‘ क्या इस बार थलापति आ रहे हैं? जवाब में संगीता कहती हैं, ‘पक्के तौर पर। देखिए मैं किसी फैन क्लब से नहीं जुड़ी, लेकिन उनकी फैन हूं। हम दिल से उनका समर्थन करते हैं। अगर वो सरकार में आए, तो हमारी दिक्कतें दूर होंगी।‘ विजय के वादों पर यकीन, वही CM बनेंगे
21 साल के फैजल कॉलेज में फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट हैं। वो और उनकी मां जैतून, तिरुपुर से चेन्नई का साढ़े 400 किमी का सफर बस से तय करके पहुंचे। दोनों विजय के जबरदस्त फैन हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए आए। जैतून कहती हैं, हमें बदलाव चाहिए। थलापति को आना होगा और सब सही करना होगा। हमें उनके वादों पर यकीन है। 2026 में थलापति ही CM बनेंगे। हमने पूछा कि विजय की पॉलिटिक्स में क्या पसंद है? वे कहती हैं, ‘औरतों को लेकर उनका नजरिया बहुत पसंद है। DMK में अब वो दम नहीं रहा। हम यहां पैसों के लिए नहीं, बल्कि विजय के लिए आए हैं। हम बदलाव के लिए आए हैं।’ विजय की रैली में 18 साल के युवा से लेकर बुजुर्ग तक हर उम्र के लोग थे। यहीं हमारी मुलाकात 61 साल की एलिजाबेथ से हुई। उनके लिए चल पाना मुश्किल है, लेकिन वो विजय को देखने के लिए चेन्नई के विल्लिवाकम इलाके से टीनगर आईं। फिर हजारों लोगों के बीच 3 घंटे बैरिकेडिंग के सहारे खड़ी रहीं। एलिजाबेथ कहती हैं, ‘मैं सिर्फ विजय को देखने आई हूं, उन्हीं को सपोर्ट करूंगी।’ विजय इन रैलियों और सभाओं में कास्ट पॉलिटिक्स करते नहीं दिखते। उनका फोकस महिला और युवा वोटबैंक पर है। उनकी पार्टी युवाओं और महिलाओं से सीधे संवाद कर रही है। फैन क्लब ने बनाया विजय की पार्टी का स्ट्रक्चर रैली में मिलीं चैवन्ति वेल्लोर के कॉलेज से पढ़ाई कर रही हैं। क्लास छोड़कर यूनिफॉर्म में ही 150 किमी दूर रैली में आ गई। वे शर्माते हुए कहती हैं, ‘वी ऑल लव थलापति। बचपन से उन्हें देखते आए हैं, आज सामने से देखना है।‘ चैवन्ति, वेल्लोर विजय फैन क्लब की मेंबर भी हैं। तमिलनाडु में विजय के सैकड़ों फैन क्लब्स हैं। ये स्टार के नाम पर सोशल वर्क करते हैं। इन क्लब्स के पीछे खुद स्टार ही होते हैं। विजय का अब ऐसा ही एक क्लब पार्टी में बदल चुका है, जिसकी टॉप बॉडी का नाम ‘ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम’ है। क्लब में काम करने वालों को ही पार्टी में जगह दी गई है। ये क्लब एक नेटवर्क की तरह काम करता है। इसमें स्टेट प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और कोऑर्डिनेटर्स सभी विजय को रिपोर्ट करते हैं। हर कोऑर्डिनेटर के पास स्टार के फैन्स का डेटा होता है, जो नई फिल्म, पोस्टर, गाने और सोशल वर्क से जुड़े कंटेट उनके फैन्स तक भेजते हैं। ये क्लब्स वॉट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप के जरिए नेटवर्किंग करते हैं। अब इसी सिस्टम का इस्तेमाल विजय राजनीति और चुनाव में कर रहे हैं। विजय के चेहरे और फैसलों पर चल रही पार्टी DMK और AIADMK की तरह TVK कोई संगठनात्मक पार्टी नहीं है। ये विजय की ‘थलापति’ (सेनापति) इमेज के आसपास ही घूमती है। पार्टी में विजय के बाद कोई नंबर दो या तीन नहीं है। वही पहले और आखिरी डिसीजनमेकर हैं। पार्टी के सीनियर लीडर्स बताते हैं कि चुनाव के पहले करीब 70 हजार बूथ एजेंट बनाने की तैयारी की गई थी। काफी हद तक इसमें सफल भी रहे। पार्टी में अलग-अलग पद बनाकर जिम्मेदारियां बांटी गईं हैं। हालांकि,ये सभी सिर्फ विजय को सलाह दे सकते हैं, उन्हें चुनौती देने का दम किसी में नहीं हैं। TVK भले नई पार्टी है, लेकिन चुनाव प्रचार काफी खर्च कर रही है। पार्टी अब तक 40 से ज्यादा मेगा रैलियां और रोड शो कर चुकी है। प्रचार में AI तकनीक और रोबोट्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी से जुड़ी फाइनेंशियल जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। पार्टी सोर्स बताते हैं कि उनके पास तीन तरफ से पैसे आ रहे हैं। पहला- विजय की निजी संपत्ति।
दूसरा- फैन क्लब और बड़े समर्थक।
तीसरा- टिकट पाने वाले उम्मीदवार। विजय की शोहरत फैन क्लब की 20 साल की मेहनत का नतीजा विजय सर्वेसर्वा हैं, लेकिन वो न मीडिया से बात करते हैं, ना कोई इंटरव्यू देते हैं। TVK के लीडर फेलिक्स गेराल्ड ही नेशनल मीडिया में पार्टी का पक्ष रखते हैं। वे बताते हैं, ‘2021 के स्थानीय चुनाव में फैन क्लब के 130 नेताओं ने चुनाव लड़ा और ज्यादातर चुनाव जीते। विजय ने पार्टी लॉन्च करने के पहले ही यहां की सियासी जमीन का अंदाजा लगा लिया था। वे औपचारिक तौर पर 2024 में राजनीति में आए, लेकिन उनकी ये शोहरत फैन क्लब की 20 साल की मेहनत का नतीजा है।’ हमने फेलिक्स से पूछा कि विजय का CM स्टालिन के खिलाफ प्रचार और BJP-AIADMK के लिए नरमी कहीं ये इशारा तो नहीं कि वे चुनाव के बाद BJP को सपोर्ट कर देंगे? इस पर फेलिक्स कहते हैं, ‘हम भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। DMK सही मायने में सेक्युलर पार्टी भी नहीं है। हम BJP की भी आलोचना करते हैं।‘ ‘विजय ने साफ किया है कि वैचारिक रूप से BJP हमारी विरोधी है। उसे समर्थन करने का सवाल ही नहीं, हम अपने दम पर सरकार बनाने जा रहे हैं।‘ एक्सपर्ट बोले: विजय की राजनीति में कुछ नया नहीं, 12-15% वोट मिलेंगे द हिंदू के सीनियर जर्नलिस्ट डी सुरेश कुमार कहते हैं कि विजय तमिलनाडु के सबसे बड़े हीरो हैं, लेकिन उनकी कहानी जयललिता और MGR से काफी अलग है। विजय ने ऐसे वक्त पर राजनीति में कदम रखा, जब वो करियर के शिखर पर हैं। कमल हसन या रजनीकांत दोनों करियर के ढलान पर पहुंचने के बाद राजनीति में आए। विजय ने चुनाव प्रचार में कई बार खुद को जोसेफ विजय कहकर संबोधित किया। वो अपनी क्रिश्चियन आइडेंटिटी पर जोर दे रहे हैं। इसे लेकर सुरेश कहते हैं, ‘विजय का प्रभाव शहरी इलाकों में ज्यादा है। महिलाओं और युवाओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाएगा। वे क्रिश्चियन हैं, इसलिए अल्पसंख्यकों का भी वोट मिलेगा। कम से कम 12-15% वोट उनके हिस्से आएंगे।‘ सुरेश के मुताबिक, विजय की राजनीतिक विचारधारा में कुछ नया नहीं है। वो द्रविड़ राजनीति ही कर रहे हैं, जो DMK और AIADMK करते आए हैं। उनके वैचारिक नेता पेरियार और अंबेडकर ही हैं। मुद्दों की बात करें तो वो NEET हटाने, राज्य के अधिकार बढ़ाने और टू लैंगुएज फॉर्मूला का समर्थन करते हैं। ……………..
तमिलनाडु से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए… लोग बोले- हिंदी हम पर बोझ, तमिल हमारी मां भारत के 28 राज्यों में तमिलनाडु इकलौता है, जिसने अपने यहां तीन भाषा फॉर्मूला लागू नहीं किया। इसका असर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही दिखने लगता है। बिल्डिंग पर तीन भाषाओं तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में बोर्ड लगा है। करीब आधा किमी दूर चेन्नई कॉर्पोरेशन की बिल्‍डिंग है। इस पर लगे बोर्ड से हिंदी गायब है। यहां के लोग तमिल भाषा को लेकर इमोशनल हैं। चेन्नई में मिलीं 40 साल की विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘तमिल मां की तरह है। हम इसमें स्वाभिमान देखते हैं।’ पढ़िए पूरी खबर…



Source link

Share This Article
Leave a Comment