3 मिनट पहलेलेखक: उत्कर्षा त्यागी
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इन दिनों सोशल मीडिया पर यूट्यूबर निशु तिवारी का व्लॉग काफी वायरल हो रहा है। दरअसल गिग वर्कर्स की कंडीशन्स दिखाने के लिए निशु ने खुद एक दिन गिग वर्कर बनकर काम किया। वीडियो में वो ब्लिंक-इट का बैग टांगे और ब्लिंक-इट की टीशर्ट में नजर आ रही हैं।
एक डिलीवरी के सिर्फ 16 रुपए मिले
वीडियो में निशु ब्लिंक-इट की डिलीवरी एजेंट बनकर लोगों के घर उनका सामान डिलीवर करने जाती हैं। बिल्डिंग के दूसरे माले पर चढ़कर सामान पहुंचा भी देती हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें मिलते हैं सिर्फ 16 रुपए कमीशन, जिसकी निराशा उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है। निशु की ये पहली डिलीवरी थी।
यूट्यूबर निशु को पहली डिलीवरी के लिए सिर्फ 16 रुपए मिले।
ब्लिंक-इट डिलीवरी एजेंट्स ने बयां किया दर्द
इसके बाद निशु अपना ब्लिंक-इट का बैग लेकर स्कूटी से ब्लिंक-इट के डिस्पैच सेंटर पर पहुंचती हैं। जहां उनकी मुलाकात बाकी डिलीवरी एजेंट्स से मिलती है जो खुलकर अपना दर्द निशु के साथ शेयर करते हैं।
ब्लिंक-इट के डिस्पैच सेंटर पर राइडर्स कम कमीशन को लेकर गुस्से में दिखे।
एक डिलीवरी एजेंट कहता है- कंपनी को हमारे पैसे बढ़ाने चाहिए। कंपनी दिन पर दिन हमारे पैसे कम करने में लगी हुई है। एक दूसरा डिलीवरी एजेंट समझाता है- पहले ब्लिंक-इट डिलीवरी के जरिए हम दिन के 2 हजार से 3 हजार रुपए कमाया करते थे। लेकिन अब सिर्फ 500-700 की ही कमाई हो पाती है। कोई मजदूर दिनभर मेहनत करके 700-800 रुपए कमाता है। लेकिन उसे घर से कुछ नहीं लगाना पड़ता। हम लोग तो अपनी 50 हजार, 70 हजार रुपए की बाइक लाते हैं। हर दिन का 200-300 रुपए का पेट्रोल लगाते हैं। 12 से 14 घंटे कम करते हैं। इसके बावजूद भी 1000 रुपए का काम भी नहीं होता।
जरा लेट होने पर डांटते हैं कस्टमर्स
तीसरा डिलीवरी एजेंट कहता है- चौथी-पांचवी मंजिल तक लोगों का सामान पहुंचाते हैं। कोई लिफ्ट भी नहीं होती। कस्टमर कह देता है कि मैं ब्लिंक-इट को पैसा दे रहा हूं, तो आपको आना ही पड़ेगा। टिप भी नहीं देता कोई। कई बार कस्टमर उल्टा-सीधा भी बोलता है, डांट देता है। लेकिन वो अपने ऑर्डर के साथ कंप्रोमाइज नहीं करता।
पूरे दिन की कमाई- 145 रुपए
अंत में निशु कहती हैं- हमारी जिंदगी आसान बनाने के लिए राइडर्स हर तरह का जोखिम उठाते हैं। भागते हैं, रैश ड्राइविंग करते हैं। दस-दस मंजिल की बिल्डिंग में बिना लिफ्ट के चढ़ते हैं। वहीं कस्टमर्स इनके थोड़ा लेट हो जाने पर बिना-सोचे समझे इन्हें डांट देते हैं। आखिर में वो दिखाती हैं कि पूरा दिन काम करने के बावजूद वो सिर्फ 145 रुपए ही कमा पाई हैं।
Zomato CEO भी कर चुके हैं ऐसा ही एक्सपेरिमेंट
Zomato के CEO दीपेंद्र गोयल पिछले साल डिलीवरी पार्टनर्स का दर्द समझने के लिए डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म पहनकर खुद ही खाना डिलीवर करने पहुंच गए थे। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं।
डिलीवरी के दौरान दीपेंद्र ने वीडियो रिकॉर्ड किया था जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। वीडियो में दीपेंद्र डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म में दिखे। वो खाना लेने गुरुग्राम के एम्बियंस मॉल पहुंचे जहां गार्ड ने उन्हें रोका और दूसरे रास्ते से आने के लिए कहा।
दीपेंद्र दूसरे रास्ते की ओर बढ़े तो उन्हें पता चला वहां लिफ्ट नहीं थी। कंफर्म करने के लिए कि क्या वाकई उन्हें बिना लिफ्ट के ऊपर जाने के लिए कहा जा रहा था, वो वापस गार्ड के पास लौटे। वहां पता चला कि डिलीवरी बॉयज के लिए मॉल में लिफ्ट नहीं थी।
इसके बाद दीपेंद्र पीछे की सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे लेकिन वहां से भी उन्हें गार्ड अंदर जाने नहीं देता। इस बीच वो सीढ़ियों पर ही अपने पैकेट का इंतजार करते दूसरे डिलीवरी पार्टनर्स के साथ बैठ गए।
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