मणिपुर के कांगपोकपी जिले में शनिवार रात को सात कुकी ग्रामीणों की हिरासत के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए। यह प्रदर्शन करीब 10 बजे रात से आधी रात तक चला। मोतबुंग और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (इंफाल-दीमापुर) के कुछ हिस्सों को भारी निर्माण उपकरणों से खोदकर रोक दिया, टायर जलाए और सरकारी वाहनों पर पत्थर फेंके। सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने बाद में सातों गांव स्वयंसेवकों को छोड़ दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया और जिले में स्थिति नियंत्रण में आ गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि खोलेन गांव के सात लोगों को सुरक्षा बलों ने बिना कारण बताए हिरासत में लिया था। खोलेन गांव जिले के नागा-बहुल चावांगकिनिंग गांव के पास स्थित है। हाल ही में खोलेन गांव पर हथियारबंद उपद्रवियों ने हमला किया था, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने मोतबुंग में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के कुछ हिस्सों को भारी निर्माण उपकरणों से खोदकर सुरक्षा बलों के वाहनों को रोकने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने बाद में सात गांव स्वयंसेवकों को रिहा कर दिया। अधिकारी ने कहा, “जिले में अब स्थिति नियंत्रण में है।” कुकी संगठन ने सीआरपीएफ की कार्रवाई की निंदा की। कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने सात ग्रामीणों की हिरासत की निंदा की। संगठन ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पर हिरासत लेने का आरोप लगाया। केआईएम ने बयान में कहा कि हथियारबंद उपद्रवियों द्वारा कुकी महिलाओं की हत्या के जिम्मेदार लोगों पर अधिकारियों ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय स्थानीय नागरिकों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने हिरासत को “कानून लागू करने में गंभीर विफलता” बताया। केआईएम ने तुरंत कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया। केआईएम ने दावा किया कि घटना के दौरान असली गोलियां चलाई गईं और वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
रिहाई के बाद भी मैतेई स्वयंसेवकों की रिहाई की मांग उधर, हिरासत में लिए गए गांव स्वयंसेवकों की रिहाई के बाद काकचिंग जिले के एक महिला संगठन ने प्रदर्शन किया। लैंगमेइदोंग अपुनबा मीरा पैबी ने लैंगमेइदोंग में धरना दिया। संगठन ने सभी गिरफ्तार मैतेई गांव स्वयंसेवकों को रिहा करने की मांग की।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गए। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने हालांकि घायलों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस के गोलों का उपयोग किया गया। सूत्रों ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले दागे गए। हालांकि, किसी के भी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
प्रदर्शन के बाद सुरक्षा बलों ने सात गांव स्वयंसेवकों को रिहा कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रिहाई के बाद स्थिति सामान्य होने लगी और जिले में शांति बहाल हो गई। अधिकारी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हिरासत में लिए गए सात ग्रामीणों की रिहाई स्वागत योग्य है, लेकिन संगठन ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने हथियारबंद उपद्रवियों द्वारा कुकी महिलाओं की हत्या के जिम्मेदार लोगों को छोड़ दिया। केआईएम ने कहा कि स्थानीय नागरिकों को हिरासत में लेना कानून लागू करने में गंभीर विफलता को दर्शाता है। संगठन ने तुरंत कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
केआईएम ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया। संगठन ने दावा किया कि घटना के दौरान असली गोलियां चलाई गईं और वाहनों में तोड़फोड़ की गई। संगठन ने सुरक्षा बलों से भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया।
इस बीच, काकचिंग जिले के महिला संगठन लैंगमेइदोंग अपुनबा मीरा पैबी ने हिरासत में लिए गए मैतेई गांव स्वयंसेवकों की रिहाई की मांग को लेकर धरना दिया। संगठन ने कहा कि सभी गिरफ्तार मैतेई गांव स्वयंसेवकों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि शांति और सद्भावना बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने से बचने की अपील की है। प्रशासन ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
कुल मिलाकर, सात कुकी ग्रामीणों की हिरासत के विरोध में कांगपोकपी जिले में हुए हिंसक प्रदर्शन ने क्षेत्र में पहले से ही मौजूद तनाव को उजागर किया है। हालांकि सुरक्षा बलों द्वारा ग्रामीणों को रिहा करने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन स्थानीय संगठनों और समुदायों की चिंताएं बनी हुई हैं। सभी पक्षों से संयम बरतने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है।
प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक कार्रवाई करने की उम्मीद है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।


















