तमिलनाडु के सलेम जिले में पुलिस ने एक स्थानीय तांत्रिक को रविवार को महिलाओं और नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 50 वर्षीय आरोपी विजयराजा वाझापाड़ी क्षेत्र में एक तंत्र-मंत्र केंद्र चलाता था। वह पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र के नाम पर महिलाओं और लड़कियों के वीडियो हिडन कैमरों से रिकॉर्ड करता था और उन्हें डार्क वेब पर बेच देता था। आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया गया जिसमें महिलाओं और स्कूली छात्राओं के 50 से अधिक वीडियो मिले। पुलिस के मुताबिक, कुछ महिलाओं को कथित तौर पर नशीला पदार्थ मिला पानी या प्रसाद देकर बेहोशी की हालत में उनके वीडियो बनाए गए।
मामला तब सामने आया, जब विनायक चतुर्थी के लिए चंदा लेने पहुंची एक स्कूली छात्रा के साथ उसने कथित तौर पर छेड़छाड़ करने की कोशिश की। छात्रा ने डरकर अपने परिवार को जानकारी दी। इसके बाद परिजन और स्थानीय युवकों ने उसके ‘शनीश्वर’ नाम के केंद्र पर पहुंचकर उसे पकड़ने की कोशिश की। भीड़ को देखकर आरोपी ने परिसर में ताला लगाया और वहां से भाग गया। बाद में स्थानीय लोगों ने उसे पास में छिपे होने की जानकारी मिलने पर पकड़ लिया और वाझापाड़ी पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी पहले एक बर्तन बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था। उसके बंद होने के बाद उसने खुद को बाबा और तंत्र-मंत्र का जानकार बताना शुरू किया था। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि एक वेबसाइट ऐसे वीडियो के बदले उसे पैसे देती थी। वह महिलाओं के वीडियो बनाकर उस वेबसाइट पर भेजता था। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने की जांच की जा रही है कि इस अपराध में कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क भी शामिल है या नहीं। आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं। जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने अपने तंत्र केंद्र में आने वाली महिलाओं और लड़कियों को पूजा और अनुष्ठान के नाम पर बुलाया करता था। वह उन्हें प्रसाद और पानी देता था, जिसमें कभी-कभी नशीला पदार्थ मिला होता था। नशे की हालत में होने के कारण पीड़िताएं विरोध नहीं कर पाती थीं और वह हिडन कैमरों से उनकी रिकॉर्डिंग कर लेता था। बाद में वह इन वीडियो को डार्क वेब पर अपलोड करता था, जहां केवल चुनिंदा उपयोगकर्ता ही इन्हें देख और डाउनलोड कर सकते थे। पुलिस का कहना है कि वीडियो की संख्या 50 से अधिक होने का अनुमान है, जिनमें स्कूली छात्राएं भी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आरोपी ने अपने आप को आध्यात्मिक गुरु के रूप में पेश किया हुआ था और अक्सर लोगों को अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए केंद्र पर बुलाया करता था। वह लोगों को यह भी बताता था कि उसकी मदद से उनकी समस्याएं जल्दी हल हो सकती हैं। इस झांसे में आकर कई महिलाएं और लड़कियां उसके पास आती थीं। पुलिस का मानना है कि वह इस तरह के वीडियो बनाने के लिए महिलाओं को नशे की हालत में लाने की योजना बनाता था और फिर उन्हें बेहोश अवस्था में रिकॉर्ड करता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी कुछ शिकायतें दर्ज थीं, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण मामला दर्ज नहीं किया गया था। हालांकि, हाल ही में मिली शिकायत के बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया और अंततः उसे गिरफ्तार करने में सफलता मिली। पुलिस का कहना है कि वह इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए डिजिटल फोरेंसिक टीम की मदद ले रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय समुदाय में गहरी चिंता पैदा हो गई है। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को किसी भी तरह के आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भेजने से परहेज करने की बात कही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस तरह के अपराधों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि आध्यात्मिक गुरुओं की गतिविधियों पर निगरानी रखने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
पुलिस ने बताया कि वह इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए डिजिटल फोरेंसिक टीम की मदद ले रही है। साथ ही, वह डार्क वेब पर मौजूद अन्य संदिग्ध वेबसाइटों की भी जांच कर रही है, जो इस तरह के वीडियो को होस्ट कर सकती हैं। पुलिस का कहना है कि वह पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराने के लिए भी प्रयासरत है, ताकि उन्हें इस दर्दनाक अनुभव से उबारा जा सके।
फिलहाल, आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि वह इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए डिजिटल फोरेंसिक टीम की मदद ले रही है। साथ ही, वह डार्क वेब पर मौजूद अन्य संदिग्ध वेबसाइटों की भी जांच कर रही है, जो इस तरह के वीडियो को होस्ट कर सकती हैं। पुलिस का कहना है कि वह पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराने के लिए भी प्रयासरत है, ताकि उन्हें इस दर्दनाक अनुभव से उबारा जा सके।
यह मामला तमिलनाडु में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर चुनौतियों को उजागर करता है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे कुछ लोग आध्यात्मिकता के नाम पर लोगों को ठगने और उनका शोषण करने का प्रयास करते हैं। पुलिस और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।


















