मुंबई के पश्चिमी उपनग्रहीय क्षेत्र बोरीवली में आयोजित एक गरबा कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले मुस्लिमों के लिए शर्तें रखी गई हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा भड़क गई है। बोरीवली में नवरात्रि के समय पारंपरिक उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन इस बार कार्यक्रम को लेकर उठे सवालों ने समावेशिता के मुद्दे पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया है। उनके अनुसार, गरबा में भाग लेने वाले मुस्लिमों को पहले तिलक लगाना होगा और फिर देवी की पूजा करनी होगी। यह शर्त उन्होंने स्वयं रखी है, जिससे स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम के आयोजकों या स्थानीय प्रशासन की ओर से निर्धारित किसी प्रकार की आधिकारिक प्रवेश शर्तें नहीं हैं, बल्कि यह विधायक का व्यक्तिगत मत है। उपाध्याय का यह बयान धार्मिक अनुष्ठानों को प्रवेश की शर्त बनाने की प्रक्रिया को लेकर उठने वाले प्रश्नों को और गहरा करता है।
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने भी नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री का विरोध किया था। उनका यह विरोध पिछले समय का है, जबकि विधायक उपाध्याय का बयान वर्तमान शारदीय नवरात्रि के संदर्भ में सामने आया है। दोनों मामलों में मुस्लिम समुदाय के लिए शर्तस्वरूप धार्मिक अनुष्ठान करने की मांग को लेकर ही सवाल उठे हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह उल्लेखनीय है कि एक ओर बीजेपी विधायक ऐसी शर्तें रख रहे हैं तो दूसरी ओर राज्य मंत्री ने भी इसी प्रकार के विरोध का इशारा किया था, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति का आभास होता है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक चलेगी। नवरात्रि के इस नौ दिनों की अवधि में भक्त दुर्गा देवी की पूजा करते हैं और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गरबा एक पारंपरिक नृत्य रूप है जिसमें लोग एक केंद्र में बैठकर घुमड़ते हैं, जबकि डांडिया में छड़ियों से नृत्य किया जाता है। यह उत्सव विभिन्न समुदायों के लोगों को एकत्रित करता है।
बोरीवली में होने वाले इस कार्यक्रम ने स्थानीय स्तर पर चर्चा खड़ी कर दी है। स्थानीय प्रशासन और कार्यक्रम आयोजकों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। कार्यक्रम के आयोजन स्थल पर क्या प्रवेश नियम लागू किए जा रहे हैं और क्या ये शर्तें आधिकारिक रूप से लगाई गई हैं, इस पर स्पष्टता अभी आवश्यक है। महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोग गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह पर्व विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साल लाता है, लेकिन इस बार बोरीवली कार्यक्रम में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर लगाई गई शर्त ने इस परंपरा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विधायक उपाध्याय के बयान और मंत्री राणे के पिछले विरोध में एक समान पैटर्न देखा जा सकता है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक तलछट उभरती दिख रही है।
इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। मामला लगातार विकसित हो रहा है और आगे की स्थिति की निगरानी जारी है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े विवरण सामने आते रहेंगे। यह खबर लगातार अपडेट हो रही है और आगे की क्या घटलाएँ सामने आएंगी, यह देखना बाकी है। संबंधित पक्षों से आधिकारिक टिप्पणी या बयान मिलते ही खबर अपडेट होगी।


















