मुंगेर में चैती छठ पर्व की धूम है। पर्व के दूसरे दिन बुधवार को व्रतियों ने खरना पूजा का आयोजन किया, जिसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। गंगा घाटों और घरों में छठी मइया के गीतों की गूंज सुनाई दे रही है।
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चिंता देवी की आस्था और मन्नत की कहानी
कासिम बाजार मोकबीरा की रहने वाली चिंता देवी इस बार पहली बार चैती छठ कर रही हैं। उनका यह व्रत पूरी तरह उनकी आस्था और संकल्प का प्रतीक है। छह महीने पहले उनकी पुत्रवधु रोमा कुमारी ने एक बेटे को जन्म दिया था, लेकिन जन्म के तुरंत बाद ही नवजात की तबीयत बिगड़ गई। हालात इतने गंभीर हो गए कि बच्चे को 20 दिनों तक शिशु आईसीयू में रखना पड़ा।
बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था, और दो महीने तक भागलपुर में इलाज चलता रहा। तब चिंता देवी ने भगवान भास्कर से मन्नत मांगी कि यदि उनका पोता स्वस्थ हो गया, तो वह चैती छठ का व्रत करेंगी। डॉक्टरों के प्रयास और उनकी मन्नत के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया। अपने संकल्प के अनुसार, अब वह अगले पांच वर्षों तक चैती छठ करेंगी।
कार्तिक छठ से जुड़ी एक और आस्था की कहानी
चिंता देवी इससे पहले भी कार्तिक माह में छठ व्रत करती आई हैं, लेकिन इसकी एक और वजह है। उन्होंने बताया कि पिछले साल कार्तिक छठ के दौरान, जब वह अपने मंझले बेटे मृणाल के साथ गंगा स्नान के लिए गई थीं, तब नहाने के दौरान उनका बेटा डूबने लगा था। गंगा में तेज बहाव था और देखते ही देखते मृणाल गहराई में चला गया।
परिवार के लोग और वहां मौजूद लोग उसे ढूंढने लगे, लेकिन आधे घंटे तक वह कहीं नहीं मिला। तभी अचानक वह गंगा किनारे पानी से सकुशल बाहर आ गया। इस घटना ने चिंता देवी की आस्था को और मजबूत कर दिया। अब वह अपने बेटे की सलामती के लिए हर साल कार्तिक छठ का व्रत रखती हैं।
छठ पूजा की परंपरा और कार्यक्रम
चैती छठ की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हुई, जिसमें व्रतियों ने कद्दू-भात और चने की दाल का प्रसाद ग्रहण किया। बुधवार को खरना का आयोजन किया गया, जिसमें व्रतियों ने गुड़ और अरवा चावल की खीर, पूरी और रसिया का प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद व्रतियों ने निर्जला उपवास शुरू कर दिया, जो शुक्रवार की सुबह उषा अर्घ्य देने के बाद समाप्त होगा।
गुरुवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगे, और शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन करेंगे। इस दौरान गंगा घाटों पर विशेष साफ-सफाई की गई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
छठ व्रत और आस्था का महत्व
चिंता देवी और उनके परिवार की कहानी इस बात का प्रमाण है कि छठ महापर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस कठिन व्रत को करते हैं और छठी मइया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मुंगेर सहित पूरे बिहार में चैती छठ की धूम है और हर तरफ श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है।