चीनी तक 400-450 रुपए किलो मिल रही कांगपोकपी में रहने वाली 53 साल की मार्गरेट ने बताया कि जिला मुख्यालय में होने की वजह से उन्हें जरूरी सामान बमुश्किल मिल रहा है। कुछ अंदरुनी गांवों में 400-450 रुपए में 1 किलो चीनी मिल रही है। यहां रहने वाले 35 वर्षीय डेविड ने बताया कि हम लोग खेतों में भी नहीं जा पा रहे हैं। कब-कहां से गोली चल जाए, नहीं पता। राज्य में 40 हजार सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं, लेकिन ये संघर्ष जातियों का है, इसलिए वो भी मदद नहीं कर पा रहे हैं। डेविड ने आगे बताया कि सड़कों, हाईवे पर जगह-जगह नगा समुदाय के लोगों की नाकेबंदी है। चेक पॉइंट हैं। बिना सिक्योरिटी एस्कॉर्ट के कोई प्राइवेट गाड़ी नहीं चल रही। मेडिकल इमरजेंसी, एयरपोर्ट जाने के लिए भी नगा के सब-डिविजनल ऑफिसर की मंजूरी लेनी पड़ रही है, जो बहुत मुश्किल से मिलती है।
फरवरी से अब तक 40 मौतें उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग, चंदेल नगा बहुल, जबकि चूराचांदपुर, कांगपोकपी, फिरजॉल कुकी-बहुल जिले हैं। कांगपोकपी समेत 4 जिलों में दोनों जनजातियां साथ रहती हैं। इसलिए उग्रवादी दोनों पर हमले कर रहे हैं। इस साल फरवरी में लिटन गांव में हिंसा के बाद से अब तक इस संघर्ष में 40 मौतें हो चुकी हैं। तांगखुल नगा जनजाति के प्रमुख संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल ने आर्थिक नाकाबंदी की है। संगठन के सचिव एच. जेम्स हाऊ ने बताया- हाईवे से किसी को भी गुजरने की अनुमति नहीं है। ——————- मणिपुर हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मणिपुर में 2 कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या:कई फार्महाउस जलाए मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा कई फार्महाउसों में आग लगा दी गई। पूरी खबर पढ़ें…




