कोर्ट में ज्यादातर शिकायतों में चरित्रहीनता और शक करना बताया गया है।
गुजरात के अहमदाबाद फैमिली कोर्ट में वैवाहिक विवाद और तलाक के लिए दाखिल मामलों में खास पैटर्न सामने आया है। यहां दाखिल तलाक के मामलाें में ज्यादातर 40-50 साल के दंपतियों के हैं। ऐसे दंपतियों के तलाक से जुड़े केस 65% से अधिक हैं। फैमिली कोर्ट पहुंचने व
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वहीं, दूसरा पैटर्न नजर आया है कि विवाह खत्म करने के लिए कोर्ट की शरण लेने वालों में उच्च शिक्षित अधिक हैं। अहमदाबाद फैमिली कोर्ट में 1.28 लाख केस विचाराधीन हैं। इनमें से 83 हजार से अधिक यानी 65 प्रतिशत से ज्यादा केस उच्च शिक्षित जोड़ों से संबंधित हैं।
अहमदाबाद फैमिली कोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर मिली जानकारी।
कोर्ट में ज्यादातर शिकायतें चरित्रहीनता और शक की महिला: पति इधर-उधर ज्यादा नजरें दौड़ाते हैं। दफ्तर-काम से लौटने के बाद पति मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। परिवार को समय नहीं देते। ससुरालजनों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा पीड़ा पति के गैरजिम्मेदार व्यवहार से है। पुरुष: पत्नी बहुत अधिक खर्चीली है। चरित्र संबंधी शंका-शिकायतें शामिल। पतियों की आवेदन में यह सर्वसामान्य सा तर्क दिखा है।
उच्च शिक्षित-पेशेवर वर्ग से ऐसे आवेदक ]जनेस मैन, डॉक्टर, इंजीनियर जैसे सम्मानित पेशों से जुड़े लोगों के 1200 केस हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास तीन से चार डिग्रियां हैं। ऑर्किटैक्ट, इंटीरियर डिजाइनर और विदेश में पढ़ाई कर चुके लोग भी इनमें शामिल हैं।
20% मामले ग्रे-डिवोर्स के हैं। ऐसे 25,600 केस अहमदाबाद फैमिली कोर्ट में विचाराधीन हैं। 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के यानी सेवानिवृति की उम्र में तलाक की मांग करने वालों के लिए ‘ग्रे-डिवोर्स’ शब्द प्रयोग किया जाता है। ऐसे जोड़े के दोनों सदस्य हम उम्र होते हैं, जो सेवानिवृति के बाद तलाक की गुहार लगाते हैं।