चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम के उपयोग पर रोक लगा दी है। आयोग ने दोनों गुटों को नए चुनाव चिह्न और नाम चुनने के लिए कहा है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC धड़े और ममता बनर्जी की मुख्य धारा के प्रतिनिधियों को शुक्रवार सुबह तक अपने तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न जमा करने का निर्देश दिया गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों ने एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे, जिससे विवाद पैदा हुआ था। ऋतब्रत बनर्जी के गुट से मोहम्मद एतेशामुल हक नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, पूर्व सीएम ममता बनर्जी की TMC ने रविवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया था। नंदीग्राम सीट लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रही है।
2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 के चुनावों में ममता बनर्जी ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अधिकारी ने BJP में शामिल होने के बाद TMC के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। 2026 की विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिससे नंदीग्राम सीट खाली हुई।
TMC में संगठन और पार्टी के नाम पर संकट उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। पार्टी के नाम और दो फूल-घास वाले चुनाव चिन्ह को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने हैं। दोनों गुटों ने पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर दावा किया है। चुनाव आयोग ने शनिवार को दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। ऋतब्रत गुट ने कहा है कि वह TMC के नाम और चिन्न पर दावा जारी रखेगा। आयोग के फैसले के बिना नामांकन की समयसीमा खत्म होने पर वह निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर भी चुनाव लड़ सकता है।
इसके अलावा, देश के अन्य राज्यों में भी उपचुनाव होने हैं। तमिलनाडु में मदुरांतकम और धारापुरम की दोनों विधानसभा सीटें मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। दोनों सीटों की फाइनल वोटर लिस्ट 23 फरवरी को जारी की गई। पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है और सीट की मतदाता सूची 14 फरवरी को पब्लिश हुई। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर-नंदीग्राम सीटों के संबंध में, रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर और नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। इन सीटों की अंतिम वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी की गई। असम की नगांव लोकसभा सीट प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी और इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी।
चुनाव आयोग का यह निर्णय TMC के आंतरिक संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है। दोनों गुटों को नए पहचान चिह्न और नाम चुनने का समय सीमित है। उपचुनाव में उम्मीदवारों की सूची और पार्टी पहचान को लेकर अंतिम निर्णय आयोग के हाथ में है। यदि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को नया प्रतीक नहीं मिलता, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। पार्टी के नाम और चिह्न के अलावा धन पर भी दावा जताया गया है, जिससे संघर्ष और गहरा हो गया है। चुनाव आयोग की बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी, लेकिन कोई तत्काल निर्णय नहीं सामने आया। अब सबकी नजर शुक्रवार की समयसीमा और आयोग के अंतिम फैसले पर है, जो बंगाल और अन्य राज्यों के उपचुनावों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।


















