नई दिल्ली। रक्षा खरीद में तेज़ी और दक्षता लाने के लिए सरकार ने रक्षा खरीद नियमों में बड़े बदलाव के प्रस्ताव पेश करने की तैयारी कर रही है। इन प्रस्तावों के तहत रक्षा मंत्री और वित्त मंत्रालय की खरीद मंजूरी की सीमा बढ़ोतरी की जानी है, जिससे ज्यादातर रक्षा सौदों का फैसला मंत्रालय स्तर पर हो सके और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की मंजूरी का इंतजार न करना पड़े। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रिया को तेज़ करना और सैन्य तकनीक की खरीद में लगने वाले समय को कम करना है।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री की वित्तीय शक्ति मौजूदा ₹2,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ करने पर विचार चल रहा है। इसी तरह, वित्त मंत्रालय की खरीद मंजूरी की सीमा ₹3,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹10,000 करोड़ करने की योजना है। अभी इन दोनों स्तरों पर ₹3,000 करोड़ से अधिक के बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों को सीसीएस की मंजूरी की आवश्यकता होती है। इनमें से अधिकांश सौदे सरकारी स्तर पर तेज़ी से मंजूरित हो सकेंगे, जिससे समय बचेगा।
इन बदलावों के प्रभाव को देखते हुए, एक विश्लेषण के अनुसार, यदि ये नई व्यवस्था लागू होती है, तो करीब एक तिहाई बड़े रक्षा सौदों को सीसीएस तक भेजने की आवश्यकता नहीं रहेगी। दैनिक भास्कर की पांच सालों (2021-2025) के रक्षा खरीद फैसलों की पड़ताल में कम से कम 13 ऐसे बड़े अनुबंध सामने आए, जिनकी कीमत ₹3,000 करोड़ से अधिक थी और जिन्हें सीसीएस की मंजूरी से गुजरना पड़ा। इनमें से अधिकांश सौदे घरेलू रक्षा उद्योग से जुड़े थे।
घरेलू रक्षा उद्योग पर इन बदलावों का सबसे अधिक असर पड़ेगा। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल में ₹3,000 करोड़ से अधिक के 14 बड़े घरेलू रक्षा खरीद मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत ₹3.01 लाख करोड़ थी। इनमें तेजस विमान, प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर, सुखोई विमान और उनके इंजन, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका गोला-बारूद, एटीएजीएस तोप, रडार और नौसेना के फ्लीट सपोर्ट शिप शामिल हैं। इन खरीदों के माध्यम से सरकार ने रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण और तेज़ी दोनों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।
सरकार के इन प्रस्तावों के पीछे रणनीति स्पष्ट है। रक्षा खरीद प्रक्रिया को तेज़ करना और बड़े स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाना सैन्य के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीक की खरीद को तेज़ी से प्राप्त करने में मददगार होगा। विशेषकर घरेलू रक्षा उद्योग के लिए इन बदलावों से उम्मीद है कि उनके पास अपने उत्पादों को तेज़ी से मंजूरी प्राप्त करने का मौका मिलेगा। इससे सरकार के स्वदेशीकरण के उद्देश्यों को भी प्राप्त होगा।
इन बदलावों के संभावित प्रभाव को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये प्रस्ताव अपनाए जाते हैं, तो भारत की रक्षा खरीद प्रणाली में एक नई दिशा स्थापित होगी। इससे सैन्य के लिए आवश्यक उपकरण और तकनीक की खरीद तेज़ी से हो सकेगी, जिससे सुरक्षा क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, घरेलू रक्षा उद्योग के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेतक होगा, क्योंकि उन्हें बड़े स्तर पर मंजूरी प्राप्त करने का समय कम होगा।
इन बदलावों के प्रस्तावित समय सीमा के बारे में अधिक जानकारी के साथ ही सरकार के इन प्रस्तावों के पीछे की रणनीति के बारे में आगे की जानकारी मिलने वाली है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन बदलावों को कब लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार के इन प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है: रक्षा खरीप्रणाली को तेज़ और दक्ष बनाना।
इन बदलावों के संभावित प्रभाव को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रक्षा खरीद प्रणाली में एक नई दिशा स्थापित होगी। इससे सैन्य के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीक की खरीद तेज़ी से हो सकेगी, जिससे सुरक्षा क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, घरेलू रक्षा उद्योग के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेतक होगा, क्योंकि उन्हें बड़े स्तर पर मंजूरी प्राप्त करने का समय कम होगा।
इन बदलावों के प्रस्तावित समय सीमा के बारे में अधिक जानकारी के साथ ही सरकार के इन प्रस्तावों के पीछे की रणनीति के बारे में आगे की जानकारी मिलने वाली है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन बदलावों को कब लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार के इन प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है: रक्षा खरीप्रणाली को तेज़ और दक्ष बनाना।


















