गाजा10 मिनट पहले
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ये फुटेज एक फिलिस्तीनी संस्था ने जारी किया है। इसमें कुछ नकाबपोश लोग फिलिस्तीनी कार्यकर्ताओं पर हमला करते दिख रहे हैं। हालांकि, ये वीडियो डायरेक्टर हमदन बल्लाल का नहीं है।
ऑस्कर अवॉर्ड जीतने वाले फिलिस्तीनी फिल्म डायरेक्टर हमदन बल्लाल को इजराइली सेना ने बंधक बना लिया है। उनके को-डायरेक्टर युवल अब्राहम ने X पर इसकी जानकारी दी है।
युवल ने बताया कि कुछ इजराइल लोगों ने वेस्ट बैंक इलाके में हमदन को बुरी तरह मारा। उन्हें सिर और पेट में गहरी चोटें आईं।
युवल ने कहा कि जब हमदन ने खुद को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एंबुलेंस बुलाई तो इजराइली सैनिकों ने एंबुलेंस को रोक दिया और हमदन को अगवा कर लिया। इसके बाद से हमदन की कोई जानकारी नहीं है।
हमदन और युवल ने मिलकर ‘नो अदर लैंड’ फिल्म बनाई है, जिसने इस साल ऑस्कर में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड जीता था। ये फिल्म इजराइल और गाजा के बीच चल रहे युद्ध के दौरान दोनों तरफ के दो दोस्तों की कहानी है।
फरवरी में ऑस्कर जीतने के बाद फोटो के लिए पोज देते डायरेक्टर हमदन बल्लाल।
इजराइली लोगों ने हमदन के गांव पर हमला किया
सेंटर फॉर जूइश नॉनवॉयलेंस नाम की एक एक्टिविस्ट संस्था ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिख रहा है कि रात के समय एक मैदान में मास्क पहने हुए कुछ लोग एक कार पर पत्थर फेंक रहे हैं। इस दौरान वहां मौजूद संस्था के सदस्य अपनी कार के अंदर छुपने की कोशिश करते हैं, और अपने बाकी साथियों को आवाज लगाकर कहते हैं- कार के अंदर आओ। इस समूह के सदस्यों ने बताया कि पत्थर फेंके जाने से कार की खिड़की टूट गई।
हमदन को पुलिस स्टेशन में रखा जा रहा
युवल अब्राहम ने बताया कि हमदन को इजराइली सेटलमेंट के एक पुलिस स्टेशन में रखा गया है। किसी को उनसे मिलने या बात करने की इजाजत नहीं दी गई है। यहां तक कि उनके वकील भी उनसे बात नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में हमें नहीं पता कि वे इस समय कैसे हैं।
जिस फिलिस्तीनी कार्यकर्ता पर ये फिल्म बनी है, उसने X पर ये पोस्ट कर बताया है कि हमदन के घर में कुछ लोगों ने उसे मारा-पीटा और फिर उसे उठाकर ले गए। मासाफेर यट्टा को ऐसे खत्म किया जा रहा है।
क्या है ‘नो अदर लैंड’ डॉक्यूमेंट्री की कहानी?
‘नो अदर लैंड’ एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसे दो इजरायली और फिलिस्तीनी डायरेक्टर्स ने मिलकर बनाया है। यह फिल्म फिलिस्तीनी कार्यकर्ताबासेल अद्र की कहानी दिखाती है, जिनकी जन्मभूमि मासाफेर यट्टा को इजराइली सेना नष्ट्र कर रही हैं। वे इन घटनाओं को रिकॉर्ड करने के लिए गिरफ्तारी और हिंसा का जोखिम उठाते हैं। साथ ही यह फिल्म जंग के दौरान बासेल अद्र और इसराइली पत्रकार युवल के बीच पनपी दोस्ती और संघर्ष को भी दिखाती है।
इस फिल्म ने कई इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते हैं। इसमें सबसे पहला अवॉर्ड 2024 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मिला था। इसके बाद इसे इस साल 2025 में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड मिला था।
यह फिल्म विवादों में भी रही है। इजराइल और अन्य देशों में कुछ लोगों ने इस पर नाराजगी जताई है। अमेरिका के मियामी बीच में एक सिनेमा हॉल ने इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई थी, लेकिन वहां के एडमिनिस्ट्रेशन ने थिएटर की लीज खत्म करने का प्रस्ताव रखा था।