यूपी के कासगंज रेलवे स्टेशन से महज 500 मीटर आगे बढ़ने पर नदरई गेट बाजार आता है। यहीं चौराहे पर एक मूर्ति लगी है, जो पिछले 7 साल से ढंकी है। न मूर्ति के चबूतरे पर पेंट हुआ है और न ही उस पर कोई नाम लिखा है। सिर्फ कुछ दुकानों के पर्चे चिपके हैं।
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पास में ही जूस की दुकान है। वहां मिले बुजुर्ग से हमने पूछा कि ये मूर्ति किसकी है। जवाब मिला- महात्मा गांधी की। हमने पूछा कि महात्मा गांधी की मूर्ति है, तो ढंकी क्यों है? बुजुर्ग बोले- अभी पेंटिंग नहीं हुई है, हो जाए तो फिर उद्घाटन होगा।’
बुजुर्ग जिसे महात्मा गांधी की मूर्ति बता रहे थे, असल में वो कासगंज के रहने वाले चंदन गुप्ता की है। चंदन गुप्ता की 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चंदन की मौत के एक साल बाद यूपी के मंत्री सुरेश पासी ने उसकी याद में ‘चंदन चौक’ बनाने का ऐलान किया। चौक बना, मूर्ति भी लगी, लेकिन उद्घाटन आज तक नहीं हो सका।
चंदन की हत्या में NIA कोर्ट ने 2 जनवरी को 28 आरोपियों को दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी जेल में हैं, लेकिन उनका खौफ चंदन के परिवार को सता रहा है। परिवार का कहना है कि आरोपियों को सजा सुनाए जाने के बाद परिवार को मिली सुरक्षा हटा ली गई है। अब हत्यारे बेल की अपील कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें जान का खतरा बना हुआ है।
चंदन के परिवार की सुरक्षा क्यों हटाई गई, इसका जवाब जानने हम कासगंज पहुंचे।
‘बेटे के हत्यारों को सजा हुई, लेकिन खतरा अभी टला नहीं’ चंदन का परिवार नदरई गेट मोहल्ले की शिवालय गली में रहता है। चंदन की मां संगीता गुप्ता बेटे को याद करते हुए कहती हैं, ‘चंदन की मौत के बाद सबने हमारे लिए वादों की झड़ी लगा दी। बेटी को सरकारी नौकरी, शहर के चौराहे का नाम चंदन के नाम पर रखने की बात कही गई। दूर-दूर से नेता हमारे आंसू पोंछने आए, लेकिन अब कोई झांकने भी नहीं आता।‘
7 साल से चंदन की मूर्ति चौराहे पर लगी है। नेताओं के पास उसके उद्घाटन का टाइम नहीं है।
‘जनवरी में मेरे बेटे के हत्यारों को सजा मिली। इस फैसले के एक महीने बाद हमारी सुरक्षा में लगे पुलिसवालों को हटा दिया। हमें पहले भी जान से मारने की धमकियां मिली थीं। खतरा अब भी टला नहीं है।‘
‘हमारे पास इतना पैसा नहीं कि प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड रखें’ चंदन की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में सांसद से लेकर लोकल विधायक तक पहुंचे। यूपी सरकार के मंत्री सुरेस पासी ने परिवार से मिलकर चंदन चौक बनाने का ऐलान किया। चंदन की बहन को ब्लॉक स्तर पर नौकरी दी गई। जिस पद पर बहन की तैनाती हुई थी, 6 महीने बाद सरकार ने वो पद ही खत्म कर दिया।
2018 से 2024 तक चंदन के पिता सुशील गुप्ता और बड़ा भाई विवेक केस लड़ते रहे। लखनऊ की NIA कोर्ट ने 28 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। दो आरोपी नसरुद्दीन और असीम कुरैशी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया।
कासगंज के नदरई गेट बाजार के चौक पर पिछले 7 साल से चंदन गुप्ता की मूर्ति इसी हाल में है। आज तक इसका उद्घाटन नहीं हो सका है।
54 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने कहा कि दोषियों की सजा में नरमी दिखाना राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ होगा। जस्टिस विवेकानंद त्रिपाठी ने सजा सुनाते हुए कहा, ‘तिरंगे का अपमान और हत्या जैसे अपराध माफी के योग्य नहीं हैं। कासगंज की घटना सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि भारत के संविधान और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है।’
चंदन की मौत से लेकर फैसला आने तक उसके परिवार को सरकार की ओर से सिक्योरिटी दी गई थी। अब पुलिसवालों को बुला लिया गया है। चंदन के भाई विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड रखें। अभी 28 लोग जेल में हैं, दो बाहर खुले घूम रहे हैं। हमें उनसे हर वक्त जान का खतरा है।’
पिता बोले- पत्नी और बहू को अकेला छोड़कर जाने में डर लगता है चंदन के परिवार में पिता सुशील गुप्ता, मां संगीता, बड़ा भाई विवेक, उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। बहन कीर्ति की शादी इसी साल 1 मार्च को हुई है। सुशील पास के अस्पताल में नौकरी करते हैं। विवेक घर पर ही सरकारी राशन की दुकान पर बैठते हैं।
इस वक्त दोनों बरी आरोपियों पर दोबारा केस दर्ज करने के लिए लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों से मिल रहे हैं। साथ ही सिक्योरिटी वापस पाने के लिए अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। सुशील कहते हैं, ‘मैं चंदन को खो चुका हूं। अब बड़े बेटे को नहीं खोना चाहता। हत्या के मामले में जेल काट रहे लोग कासगंज के बड़े कपड़ा कारोबारी हैं। उनकी यहां बड़ी-बड़ी दुकानें हैं।‘
वे आगे कहते हैं, ‘वे पावरफुल लोग हैं। कभी भी मेरे घरवालों पर हमला करवा सकते हैं। प्रशासन ये बात जानता है। इसके बावजूद हमारी सिक्योरिटी हटा दी है।‘
हम लोगों ने एसपी साहब से पूछा तो उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी हटाने का आदेश ऊपर से आया है, वो कुछ नहीं कर सकते।
‘बड़ा बेटा विवेक लखनऊ में वकीलों से मिल रहा है। उसे बार-बार कोर्ट जाना पड़ता है। मैं प्राइवेट अस्पताल में कंपाउंडर हूं। रोज घर पर पत्नी, बहू और दो बच्चों को छोड़कर नौकरी करने जाता हूं। हर वक्त घबराहट बनी रहती है। चंदन की मौत के मामले में जब फैसला आने वाला था, तब मुझे और विवेक को दो-दो गनर मिले थे। घर पर सिक्योरिटी रहती थी, लेकिन अब कोई सुरक्षा नहीं है।‘
ये तस्वीर 26 जनवरी 2018 को निकाली गई तिरंगा यात्रा की है, जिसमें चंदन गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
धमकी मिली- केस वापस ले लो, नहीं तो बेटे के पास भेज देंगे सुशील ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। तब आरोपी केस वापस लेने के लिए दबाव बना रहे थे। सुशील ने बताया- ‘चंदन को गुजरे कुछ ही दिन बीते थे। तब तक हमें सिक्योरिटी नहीं दी गई थी।‘
‘मैं सुबह घर के बाहर बैठा था। तभी कुछ लोग बाइक पर आए। चेहरे पर मास्क लगा रखा था। उन्होंने आरोपियों का जिक्र किया और बोले-वे तो जेल जा रहे हैं, लेकिन दूसरे लोग अब भी यहां हैं। हमसे दुश्मनी मत मोल लो, वरना देख लेंगे। केस वापस ले लो, नहीं तो तुम्हें भी बेटे के पास भेज देंगे।‘
‘इसके बाद हमने पुलिस से शिकायत की। तब प्रशासन ने हमारी सुरक्षा बढ़ा दी थी।‘
भाई बोला- दोषियों ने बेल के लिए अपील डाली, वे बाहर आए तो खतरा बढ़ेगा चंदन के परिवार के मुताबिक, केस लड़ने के लिए पहले उनके पास 10 से ज्यादा गवाह थे। आरोपियों के दबाव में धीरे-धीरे लोग गवाही देने से पीछे हटने लगे। अब गवाहों में सिर्फ परिवार वाले और चंदन के कुछ दोस्त ही बचे हैं। चंदन के भाई विवेक मुख्य गवाह हैं। वे पहले कासगंज में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी करते थे। दंगों के बाद परिवार ने डर से नौकरी छुड़वा दी।
विवेक कहते हैं, ‘भाई की हत्या में शामिल 24 लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 4 लोगों ने लखनऊ हाईकोर्ट में बेल अपील डाली है। अगर उन्हें बेल मिल जाती है, तो ये हमारे लिए बहुत बड़ा झटका होगा। दो आरोपी नसरुद्दीन और असीम बरी हुए हैं, वे भी बेगुनाह नहीं हैं। उन्हें जेल पहुंचाने के लिए हमने लखनऊ हाईकोर्ट में अपील डाली है।’
चंदन की हत्या के केस में फैसला आने के बाद उनके भाई विवेक ने फैमिली की सुरक्षा हटाए जाने पर प्रशासन को ये लेटर लिखा था।
विवेक आगे कहते हैं, ‘चंदन की मौत के बाद हमें 20 लाख रुपए मिले थे। इन्हीं पैसों से हमने केस लड़ा। लखनऊ में अच्छे वकील किए। अब ये केस फिर लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट जा रहा है। इसमें पैसे और दौड़भाग लगेगी। मैं और पापा अभी वकीलों से मिल रहे हैं, हमें ज्यादातर वक्त घर से बाहर रहना पड़ रहा है। इसलिए हमें सुरक्षा वापस दी जाए।‘
7 साल से चंदन चौक का काम अटका विवेक कहते हैं, ‘कासगंज में चंदन चौक बने, ये CM योगी आदित्यनाथ का वादा था। 2018 से ही प्रशासन इस काम को लटका रहा है। हम दो महीने पहले चौक के उद्घाटन के लिए DM से मिले थे। उन्होंने कहा कि ये मैटर नगर पालिका हैंडल कर रही है। आप उनसे कॉन्टैक्ट करें। नगर पालिका चेयरमैन सिर्फ जल्द उद्धाटन करने का भरोसा दे रहे हैं, कुछ हो नहीं रहा।‘
चंदन चौक को लेकर प्रशासन के रुख से विवेक नाराज हैं।
कासगंज जिला प्रशासन क्या कह रहा… SP बोलीं- चंदन के परिवार की सिक्योरिटी का मसला लखनऊ से अटका चंदन के परिवार को दी गई सरकारी सुरक्षा क्यों वापस ली गई, चंदन चौक का काम इतने साल से क्यों अटका है, इस पर हमने कासगंज SP अंकिता शर्मा और SDM संजीव कुमार से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…
सवाल: चंदन के परिवार की सुरक्षा क्यों हटाई गई? जवाब: फैसले के समय चंदन के परिवार को सुरक्षा दी गई थी। बाद में लखनऊ कमेटी की ओर से इसे हटा लिया गया। अगर उनके परिवार को सुरक्षा का खतरा है तो वे फिर से लखनऊ जाकर सिक्योरिटी मांग सकते हैं। फिलहाल जिला स्तर पर भी सुरक्षा को लेकर कोई लेटर नहीं मिला है।
सवाल: चंदन चौक का काम 7 साल से क्यों अटका है? जवाब: चंदन चौक पर मूर्ति लगा दी गई थी, लेकिन उसका उद्घाटन कब होगा, ये प्रशासन तय करेगा।
इसी सवाल पर SDM संजीव कुमार कहते हैं, ‘चंदन गुप्ता के परिवार ने नदरई गेट के पास चौक के उद्घाटन की मांग की थी। हमारे पास लिखित तौर पर न तो हाईकोर्ट और न ही शासन की तरफ से मंजूरी है। अप्रूवल मिलने तक हम इस पर काम नहीं बढ़ा सकते।‘
‘अभी लगी चंदन की मूर्ति आधी ही बनी है। चौक के उद्घाटन की अनुमति मिल जाएगी, तब हम मूर्ति का काम पूरा कराएंगे। फिलहाल हमें शासन के जवाब का इंतजार है।‘
चंदन के परिवार से मिलने के बाद हम उम्रकैद की सजा काट रहे वसीम, सलीम और नसीम के घर पर पहुंचे। हमें एक बुजुर्ग मिले, उन्होंने परिवार की व्यस्तता और ईद की वजह बताकर कुछ भी बोलने इनकार कर दिया।
चंदन मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे वसीम, सलीम और नसीम तीनों भाई हैं। ये तस्वीर उनके घर की है।
दोषियों को केस लड़ने के लिए पाकिस्तान से मिला फंड चंदन के हत्यारों को सजा सुनाते हुए जज विवेकानंद त्रिपाठी ने इस बात पर जोर दिया था कि आरोपियों का केस लड़ने के लिए पाकिस्तान के अलावा दूसरे देशों से पैसे मिले थे। दोषियों को बचाने के लिए विदेशी फंड का इस्तेमाल संविधान की भावना के खिलाफ है।
NIA कोर्ट ने खुलासा किया कि आरोपियों के मददगार NGO में न्यूयॉर्क बेस्ड अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी, वॉशिंगटन बेस्ड इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और लंदन बेस्ड साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप जैसे संगठन हैं। इनके अलावा मुंबई के सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस, दिल्ली के पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज और लखनऊ के रिहाई मंच से भी आरोपियों को मदद मिली।
विदेशी फंडिंग पर सवाल उठाते हुए तब चंदन के परिवार ने कहा था कि चंदन के कातिलों को विदेश में बैठे लोग बचा रहे थे। महंगे वकील उनका केस लड़ने आते थे। वकीलों की एक बार कोर्ट आने की फीस 5 लाख रुपए थी। आखिर इतना पैसा कहां से आ रहा था। कौन लोग हैं, जो दोषियों को बचा रहे थे। सरकार को इसकी जांच करवानी चाहिए।
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