प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार देर शाम को तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसाद में कथित मिलावटी घी के उपयोग के मामले में सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, मंगला ने असली घी के नाम पर कथित मिलावटी घी की सप्लाई प्रदान की थी, जिससे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को 2019 से 2024 के बीच लगभग ₹230 करोड़ का घी सप्लाई मिला। इस सुप्रभावी मामले में ED ने मंगला को 17 सितंबर को हैदराबाद स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें विशाखापट्टनम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में रख दिया गया।
एजेंसी के मुताबिक, मंगला ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ के नाम पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे रसायनों का उपयोग करके मिलावटी घी तैयार किया था। इस मामले के अंतर्गत, TTD को करीब ₹96 करोड़ का मिलावटी घी तैयार किया गया था, जिसका उपयोग तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसाद में किया जाता था। TTD में रोजाना 4.08 लाख से अधिक भक्तों को लड्डू प्रसाद वितरित किया जाता है, जो इस परंपरा को 1715 से होकर 300 से अधिक वर्षों तक चला आ रहा है।
ED ने मंगला को 17 सितंबर को गिरफ्तार करने के बाद बताया कि TTD में घी मिलावट मामले में मंगला को गिरफ्तार करने के बाद उसे विशाखापट्टनम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया और वहाँ न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एजेंसी के अनुसार, मंगला ने मिलावट वाली सामग्री जुटाने और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी तैयार करने में सहायता की थी। इसके अतिरिक्त, ED ने पहले विपिन जैन को भी गिरफ्तार किया था, जिसके अनुसार मंगला ने वैष्णवी डेयरी स्पेशियलिटीज, मल्गंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और ए.आर. डेयरी फूड्स जैसी कंपनियों के जरिए मिलावटी घी की सप्लाई में भी सहायता की थी।
इस मामले से जुड़ी नई जानकारी के अनुसार, स्पेशल इन्वेस्टिगेंशन टीम (SIT) ने बताया कि TTD ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने कबूला है कि 2019 से 2024 के बीच 48.76 करोड़ लड्डू बनाए गए थे। इनमें से 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से बनाए गए थे। TDP ने 18 सितंबर 2025 को आरोप लगाया था कि राज्य में YSRCP की पार्टी तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू में जानवरों की चर्बी वाला घी और मछली का तेल मिलाया गया था। इसके अगले दिन TDP ने एक लैब रिपोर्ट प्रकाशित करके अपने आरोपों की पुष्टि का दावा किया।
तिरुपति लड्डू के उत्पत्ति और परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए, प्रसाद मंदिर की रसोई ‘पोट्टु’ में लड्डू प्रसाद तैयार किया जाता है, जहाँ पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू बनाने की प्रक्रिया को ‘दित्तम’ कहा जाता है, जिसमें कौन सी सामग्री कितनी मात्रा में डालनी है इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाता है। इतने लंबे समय में लड्डू की रेसिपी में केवल छह बार ही बदलाव किए गए हैं। शुरुआत में लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे, ताकि वे लंबे समय तक ठीक रहें। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए बादाम, काजू और किशमिश भी मिलाना शुरू किया गया।
तिरुपति लड्डू घोटाले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… तिरुपति लड्डू विवाद में मिलावटी घी से 20 करोड़ लड्डू बने: पिछले 5 सालों में 68 लाख किलो घी इस्तेमाल, SIT ने पूर्व चेयरमैन से 8 घंटे पूछताछ की तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसाद में मिलावट मामले में नया खुलासा हुआ। स्पेशल इन्वेस्टिगेंशन टीम (SIT) ने बताया कि TTD ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने कबूला है कि साल 2019 से 2024 के बीच 48.76 करोड़ लड्डू बनाए गए। इनमें 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से बनाए गए थे। पूरी खबर पढ़ें…
यह मामला केवल घी मिलावट के विवाद तक सीमित नहीं है। TDP ने आरोप लगाया था कि YSRCP की पार्टी ने मंदिर के लड्डू में पशु पदार्थों को मिलाया गया है। लैब रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपों की पुष्टि हुई है। TDP ने 18 सितंबर 2025 को आरोप लगाया था कि राज्य में YSR कांग्रेस सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू में जानवरों की चर्बी और मछली का तेल मिलाया गया था। इसे सत्यापित करने के लिए TDP ने एक लैब रिपोर्ट प्रकाशित की और अपने आरोपों की पुष्टि का दावा किया।
ED के मुख्य आरोप के अनुसार, मंगला ने वैष्णवी डेयरी स्पेशियलिटीज, मल्गंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और ए.आर. डेयरी फूड्स जैसी कंपनियों के माध्यम से मिलावटी घी की सप्लाई में सहायता की थी। एजेंसी का दावा है कि उसने घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड भी बनाए, ताकि मिलावटी चीजों के इस्तेमाल को छिपाया जा सके और इसे असली गाय के घी की तरह दिखाया जा सके। इस तरह के गैर-कानूनी तरीकों से मिलावटी घी का उत्पादन और वितरण किया गया था, जिससे धार्मिक संस्थानों में महत्वपूर्ण संख्या में सामग्री का उपयोग हुआ।
इस मामले के संदर्भ में, TTD ने YSRCP पर आरोप लगाया था। 18 सितंबर 2025 को TDP ने आरोप लगाया था कि आंध्र के CM चंद्रबाबू नायडू की पार्टी YSRCP ने राज्य में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल को मिलाया है। इसके अगले दिन TDP ने एक लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने आरोपों की पुष्टि का दावा किया।
तिरुपति मंदिर की परंपरा 1715 से चली आ रही है, जो 300 से अधिक वर्षों की इतिहास रखती है। प्रसाद मंदिर की रसोई ‘पोट्टु’ में लड्डू प्रसाद तैयार किया जाता है, जहाँ पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू बनाने की प्रक्रिया को ‘दित्तम’ कहा जाता है, जिसमें सामग्री की मात्रा और विधि का बहुत सख्ती से पालन किया जाता है। ऐसे सख्त पालन के बावजूद, इस मामले में मिलावटी घी के उपयोग के आरोप उठाए गए हैं।
तिरुपति लड्डू विवाद में ED की गिरफ्तारी और मंगला के कार्यवाही के बाद, TTD ने YSRCP के खिलाफ कई आरोपों को सामने रखा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेंशन टीम (SIT) द्वारा किए गए पूछताछ और लैब परीक्षणों ने मिलावटी घी के उपयोग की पुष्टि की है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद TDP ने अपने आरोपों को और विस्तार दिया है, जिसमें पशु पदार्थों और मछली के तेल के मिश्रण का उल्लेख है।
ED ने मंगला को 17 सितंबर को गिरफ्तार करने के बाद बताया कि TTD में घी मिलावट मामले में मंगला को गिरफ्तार करने के बाद उसे विशाखापट्टनम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया और वहाँ न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कदम ने मंदिर के सामान्य संचालन को प्रभावित किया है और TTD को कानूनी जोखिम में डाल दिया है। मंगला के कार्यवाही के बाद TTD ने अपने आप में कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है।
स्थिति के अनुसार, TTD ने 2019 से 2024 के बीच लगभग 48.76 करोड़ लड्डू बनाए हैं, जिनमें 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से तैयार किए गए थे। यह संख्या दर्शाती है कि TTD की सामग्री आपूर्ति और उत्पादन में बड़ी मात्रा में मिलावटी घी का उपयोग हुआ है। ED के आरोप के अनुसार, मंगला ने इस मिलावटी घी को TTD के रसोई ‘पोट्टु’ में लड्डू प्रसाद में मिलाकर रखा गया था, जिससे धार्मिक संस्थान की ईमानदारी का उल्लंघन हुआ।
इस मामले में सभी प्रमाणों की जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। TTD के कानूनी प्रतिनिधि ने कथन दिया है कि वे मंगला के गिरफ्तार होने के बाद अपनी स्थिति को स्पष्ट करेगा। इस मामले से पता चलता है कि धार्मिक संस्थानों में सामग्री आपूर्ति और उत्पादन की प्रक्रियाओं में गलतियाँ हो सकती हैं, और कानूनी नियमों का उल्लंघन हो सकता है। ED की गिरफ्तारी इस मामले को और गंभीर बनाती है और TTD को कानूनी जवाबदेही की आवश्यकता है।
अंत में, तिरुपति मंदिर की परंपरा और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह मामला यह साबित करता है कि धार्मिक संस्थानों में भी गुणवत्ता और पारदर्शिता का महत्व है। मिलावटी घी के उपयोग के आरोप के बाद, TTD को कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है और सभी संबंधित पक्षों को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।













