प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय हरित न्यायपालिका (एनजीटी) के मोबाइल ऐप का भी शुभारंभ किया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत G20 का इकलौता ऐसा देश है, जिसने पेरिस कॉप-21 समिट में लिए गए तीन प्रमुख जलवायु संबद्ध प्रतिबद्धताओं को समय से पूरा कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर अधिक डाली जाती है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी दुनिया के औसत से आधे से कम है।
पेरिस कॉप-21 सम्मेलन में भारत ने तीन बड़े लक्ष्य तय किए थे: पहल, 2030 तक 2005 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में 33-35% की कमी; दूसरा, 2030 तक कुल बिजली क्षमता के करीब 40% हिस्से को गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से पूरा करना; तीसरा, पेड़ लगाने और वन विकास के माध्यम से 2.5-3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण की क्षमता विकसित करना।
पीएम मोदी ने भारत को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण सुरक्षा के नए मानदंड स्थापित करने वाले देशों में शामिल करार दिया।













