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नमाज का वीडियो शेयर किया तो खालिद का कॉलेज छूटा: मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी में नमाज पर विवाद, FIR कराने वाले बोले- मस्जिद में पढ़ो


22 साल के खालिद मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। 11 मार्च को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें 60 से 70 स्टूडेंट यूनिवर्सिटी ग्राउंड में नमाज पढ़ते नजर आ रहे हैं। नमाज पढ़ने वालों में खालिद शामिल नहीं थे, न ही उन्होंने वीडियो

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खालिद अभी जमानत पर हैं, लेकिन बाहर आने-जाने से घबराने लगे हैं। कॉलेज भी नहीं जा रहे। पुलिस उन पर नजर रख रही है। ये मामला क्या है, 20 दिन बाद अब यूनिवर्सिटी में क्या माहौल है, ये जानने दैनिक भास्कर मेरठ पहुंचा।

खालिद के अलावा उन पर FIR कराने वालों में शामिल सचिन, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट-स्टूडेंट और पुलिस अफसरों से बात की। इसी साल जनवरी में बरेली के एक गांव में भी निजी जमीन पर नमाज को लेकर विवाद हुआ था। हम वहां भी गए।

पहले IIMT यूनिवर्सिटी का मामला खालिद बोले- पहले भी नमाज पढ़ी गई, कभी विरोध नहीं हुआ हमने खालिद से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। उन्होंने पहले तो कहा कि मैं विवाद नहीं बढ़ाना चाहता, इसलिए मीडिया से बात नहीं करूंगा। थोड़ी बातचीत के बाद उन्होंने हमें अपने गांव बुला लिया। गांव में 2 कमरों के मकान में खालिद अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। पिता किसान हैं। बड़े भाई भी पढ़ाई करते हैं।

खालिद के पिता को बेटे की फिक्र है। वे कैमरे पर नहीं आना चाहते। कहते हैं, ‘खालिद को जैसे-तैसे पढ़ने भेजा है, अब किसी तरह का मसला नहीं चाहते।’ वे खालिद को भी समझाते रहे कि इस तरह के विवादों से बचो और बस पढ़ाई करो।

इसके बाद हमने खालिद से बात की। उन्हें 17 मार्च की शाम जमानत मिल गई थी। खालिद कहते हैं, ‘रमजान में पहले भी यूनिवर्सिटी में नमाज अदा की गई है। यूनिवर्सिटी के अंदर किसी ने विरोध नहीं किया। फिर अचानक वीडियो वायरल हुआ तो FIR हो गई, मैं जेल भी गया। मैंने तो नमाज नहीं पढ़ी, न मैंने वीडियो बनाया। सिर्फ दूसरे के अकाउंट पर पोस्ट वीडियो शेयर कर दिया था।’

खालिद ने नमाज का जो वीडियो शेयर किया, वो 10 मार्च का है। वे बताते हैं, ‘उस दिन 1:15 बजे लेक्चर छूटा था। यूनिवर्सिटी से मस्जिद 6-7 किलोमीटर दूर है। वहां जाने और लौटने में देर हो जाती, इसलिए स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में ही नमाज अदा की।’

खालिद के मुताबिक, वीडियो वायरल हुआ तो कॉलेज में टीचर्स ने कहा कि हम खालिद के साथ हैं। खालिद यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट है, उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। फिर मामला बड़ा हो गया और प्रेशर बनने लगा। तब कॉलेजवालों ने एक्शन लिया। खालिद अब वापस कॉलेज जाना चाहते हैं, लेकिन कॉलेज की तरफ से कहा गया है कि अभी कुछ दिन रुको, मामला शांत होने पर ही कुछ होगा।

खालिद का आरोप है कि वीडियो वायरल होने के एक-दो दिन बाद कॉलेज के गेट पर दो मुस्लिम छात्रों से मारपीट की गई। गेट पर गार्ड सबकी आईडी चेक कर रहे थे। वजह पूछने पर मुस्लिम छात्रों को पीटा गया। खालिद को लगता है कि गार्ड उन्हें ही खोज रहे थे।

FIR कराने वाले बोले- माहौल बिगाड़ने के लिए जानबूझकर वीडियो डाला खालिद के खिलाफ FIR कार्तिक हिंदू नाम के शख्स ने कराई है। हालांकि मेरठ में अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन से जुड़े सचिन सिरोही यूनिवर्सिटी में नमाज का विरोध कर रहे हैं। हमने सचिन से बात की।

वे बताते हैं, ‘यूनिवर्सिटी में नमाज के बाद इन्होंने (मुस्लिम छात्र) वीडियो शेयर किया। पुलिस ने 72 घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की। यूनिवर्सिटी के मालिक प्रभावशाली हैं, इसलिए पुलिस शांत रही। हमने धमकी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो हम शहर के किसी मुस्लिम धार्मिक स्थल पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे, तब जाकर खालिद पर FIR की गई।’

हमने सचिन सिरोही से पूछा कि यूनिवर्सिटी के अंदर पूजा भी होती है, तो नमाज से क्या दिक्कत है? उन्होंने जवाब दिया- नमाज मस्जिद में या घर में पढ़नी चाहिए।

SP बोले- खालिद पर नजर, ताकि उस पर हमला न हो मेरठ के SP (रूरल) राकेश कुमार मिश्रा बताते हैं, ‘IIMT प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। वहां बाहर का तो कोई जाता नहीं है। नमाज अदा कर रहे स्टूडेंट यूनिवर्सिटी के ही थे। यूनिवर्सिटी में नमाज पहले से हो रही थी। वहां से कभी शिकायत नहीं आई। यूनिवर्सिटी में मुस्लिम छात्र भी पढ़ते हैं, तो वहां कुछ व्यवस्था तो होती ही होगी।’

हमने उन्हें बताया कि खालिद अपनी सुरक्षा के लिए फिक्रमंद है। उन्होंने कहा कि खालिद पर नजर रखी जा रही है ताकि कोई उनके साथ मारपीट न कर सके। वे मानते हैं कि खालिद ने वीडियो खुद नहीं बनाया था, बल्कि किसी दोस्त से लिया था।

यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी बोले- नमाज के लिए परमिशन नहीं ली इस विवाद पर हमने IIMT के मीडिया प्रभारी सुनील शर्मा से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है। यूनिवर्सिटी ने मीडिया को पहले ही अपना पक्ष बता दिया है। इसके बाद उन्होंने मीडिया को दिया जवाब और एक वीडियो बनाकर भेज दिया। इस वीडियो में उन्होंने नमाज के लिए परमिशन देने की बात नकार दी।

सुनील ने बताया, ‘वीडियो शेयर करने वाले छात्र खालिद प्रधान को निलंबित किया गया। साथ ही तीन गार्ड्स को भी सस्पेंड किया गया है।’

स्टूडेंट्स का आरोप- यूनिवर्सिटी दबाव में पलटी हमने भीम आर्मी स्टूडेंड फेडरेशन के पश्चिमी यूपी के प्रभारी शान मोहम्मद से भी बात की। खालिद की गिरफ्तारी के विरोध में 17 मार्च को करीब 400 स्टूडेंट ने प्रदर्शन किया था। शान भी इसमें शामिल थे।

वे बताते हैं, ‘यूनिवर्सिटी में होली-दिवाली भी सब साथ में मनाते हैं। रमजान में 5 मिनट की नमाज के लिए भी छात्रों ने यूनिवर्सिटी से इजाजत मांगी थी। पहले तो यूनिवर्सिटी ने इजाजत दे दी, वीडियो वायरल हुआ तो वे दबाव में पलट गए। छात्रों के पास लिखित परमिशन नहीं थी। नमाज पढ़ना या उसका वीडियो शेयर करना अपराध नहीं है।’

शान आरोप लगाते हैं कि यूनिवर्सिटी के अंदर बाकी छात्रों को कोई दिक्कत नहीं थी, प्रशासन को कोई दिक्कत नहीं थी, यूनिवर्सिटी के बाहर के हिंदू संगठनों ने पूरा विवाद खड़ा किया। उन्होंने जानबूझकर ये विवाद खड़ा किया है ताकि छात्र हिंदू-मुसलमान में बंट जाएं और आपस में लड़ें।

बरेली में निजी जमीन पर नमाज को लेकर भी विवाद 18 जनवरी, 2025 को बरेली के जाम सावंत शुमाली गांव में नमाज को लेकर विवाद हुआ। यहां निजी जमीन पर 20-25 लोग टिन शेड के नीचे नमाज अदा कर रहे थे। जमीन के चारों तरफ दीवार है। टिन शेड लगाकर इसे ढंका गया था।

हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने इसका ड्रोन वीडियो शेयर कर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने दावा किया कि गांव में न तो मस्जिद है और न ही मंदिर। गांववालों को पास के गांव में पूजा के लिए जाना पड़ता है। टिन शेड को अवैध तरीके से मस्जिद में बदला गया है।जाम सावंत शुमाली मुस्लिम बहुल गांव है। हिंदू संगठन की शिकायत के बाद पुलिस ने गांव के प्रधान मोहम्मद आरिफ के अलावा तीन लोगों पर केस दर्ज किया। बहेड़ी थाने के SHO संजय तोमर के मुताबिक,

गांव में कोई मस्जिद नहीं थी। निजी जमीन पर बना अस्थायी ढांचा था। ये जमीन गांव के प्रधान मोहम्मद आरिफ के परिवार की ही थी। यहां बिना अनुमति नमाज पढ़ी गई, जो कानून का उल्लंघन था।

मुस्लिम बोले- इस जमीन पर 2019 से नमाज पढ़ रहे इस मामले में हमने आरिफ से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। FIR में कदीर अहमद का भी नाम है। कदीर आरोप लगाते हैं, ‘2026 में प्रधानी के चुनाव होने हैं। इसीलिए कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा किया।’

‘बरेली के हिंदू संगठन ने वीडियो वायरल कर दिया तो हमारे पास दो पुलिसवाले आए। उन्होंने प्रधान आरिफ से कहा कि बिना इजाजत के नमाज की शिकायत मिली है। अब जब तक DM ऑफिस इजाजत न दे, नमाज नहीं पढ़ना।’

कदीर बताते हैं, ‘उस जगह मदरसा भी था। बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब सब बंद है। इस जमीन पर पहली बार नमाज नहीं पढ़ी गई थी। 2019 से यहां नमाज पढ़ी जा रही थी। कभी गांव के लोगों ने विरोध नहीं किया। गांव में हिंदू-मुसलमान सब मिल-जुलकर रहते हैं।’

कदीर ने बताया, ‘हम 2019 से इसी घर में नमाज पढ़ते हैं। ये प्रधान आरिफ की रिश्तेदार अनीशा बानो का था। 12 जुलाई 2019 को उन्होंने इसे छोटी मस्जिद के लिए तहसील में वक्फ करा दिया। मुझे इसका मुतवल्ली (प्रबंधक) बना दिया। हम तबसे ही यहां नमाज पढ़ रहे हैं। 2019 में ही टिन शेड डाला था।’

कदीर आगे बताते हैं, ‘गांव में कोई मस्जिद या मंदिर नहीं है। पड़ोस वाले गांव जनूबी में दो मस्जिद हैं और दोनों पूरी भर जाती हैं। इसलिए लोग वहां भी नहीं जाते। हमने गांव के हिंदू पक्ष से भी कहा है कि कोई मंदिर बनाना चाहे, तो किसी को आपत्ति नहीं है।’

फिलहाल राजस्व विभाग इस जमीन के मालिकाना हक की जांच कर रहा है। जनवरी की घटना के बाद से यहां नमाज नहीं पढ़ी जा रही है। गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग जिलाधिकारी कार्यालय में नमाज की इजाजत के लिए ज्ञापन भी दे चुके हैं।

बरेली या मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी के अलावा भी यूपी में हाल के दिनों में नमाज को लेकर विवाद के मामले सामने आए हैं। इसमें पब्लिक प्लेस पर नमाज के अलावा निजी संपत्ति पर नमाज को लेकर भी विवाद हुआ है।

वकील बोले- धार्मिक आयोजन पर अलग से कानून नहीं धार्मिक मामलों में विवाद लेकर देश में क्या कानून है, अगर किसी को नमाज से दिक्कत है, तो इसे लेकर संविधान और कानून क्या कहता है? ये जानने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले वकील शाहिद अली से बात की।

वे बताते हैं, ‘हमारा देश सेक्युलर है। इसलिए यहां धार्मिक आयोजन पर अलग प्रावधान नहीं है। हमें NOC और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए परमिशन लेनी होती है। चाहे किसी भी धर्म का आयोजन हो, परमिशन लेना जरूरी है। अगर नमाज की बात करें तो सिर्फ 5 मिनट के लिए भी परमिशन जरूरी है।’

शाहिद पार्क या घरों में इकट्ठा होकर नमाज पढ़ने की वजह मस्जिदों की कमी को बताते हैं। वे कहते हैं, ‘नई मस्जिदों के लिए परमिशन मिलती नहीं है। ऐसे में जुमे (शुक्रवार) के दिन नमाज में काफी दिक्कत आती है। सिर्फ दिल्ली में ही सरकार ने 54 ऐतिहासिक मस्जिदों में नमाज बैन कर रखी है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय के लोग पार्क, गार्डन या किसी साथी के घर नमाज पढ़ते हैं।’

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