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‘वक्फ वाले घर पर बुलडोजर चलाने की धमकी देते हैं’: मुस्लिम महिला बोलीं-नए कानून से राहत मिलेगी, विवादों में वक्फ की 400 से अधिक प्रॉपर्टी – Bihar News


राजधानी पटना से 30 किलोमीटर दूर फतुहा का गोविंदपुर। खुशी में पटाखा फोड़ते और मिठाई बांटते युवाओं का झुंड। यहां के लोग वक्फ बिल के पास होने से खुश हैं।

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वहीं, दूसरी तरफ राज्य के वक्फ बोर्ड इस एक्ट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। वहीं, उनका कहना है कि बिल में कई खामियां हैं और इसे जल्दबाजी में पारित किया गया।

दरअसल, वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पास हो गया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देश में वक्फ का नया कानून देशभर में लागू हो जाएगा।

सदन से कानून के पास कराने से पहले मोदी सरकार ने मूल ड्राफ्ट में 14 बदलाव किए हैं। अगर ये बदलाव न हुए होते, तो कानून बनने के बाद वक्फ की संपत्तियों में बड़ी उथल-पुथल मच सकती थी।

वक्फ की बिहार में 3 हजार से अधिक प्रॉपर्टी सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के अधीन है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास राज्य में करीब 2900 तो शिया वक्फ बोर्ड के पास 327 संपत्तियां हैं। इनमें से 400 से अधिक प्रॉपर्टी पर विवाद है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक, वक्फ के पास 29 हजार बीघा से ज्यादा जमीन का मालिकाना हक है।

डाकबंगला के पास की वक्फ की संपत्तियों का मामला लालू यादव से लेकर बिहार के कई नेता उठा चुके हैं।

इस स्पेशल स्टोरी में जानेंगे, नए कानून के लागू होने के बाद संपत्तियों को लेकर क्या बदल जाएगा?

नए कानून से बिहार के वक्फ की संपत्तियों का क्या होगा?

सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद अफजल अब्बास ने कहा, ‘हमने इस बिल में 32-34 बदलावों का सुझाव दिया था, लेकिन JPC ने केवल 17 बदलावों की सिफारिश की। इनमें से भी कई को नजरअंदाज कर दिया गया। सिर्फ 14 बदलावों को ही मंजूरी दी गई।’

उन्होंने बताया, ‘सिर्फ शिया वक्फ बोर्ड की 327 संपत्तियां हैं, जिन पर दूसरों ने कब्जा कर रखा है। बिहार में 138 जमीनों पर विवाद ट्रिब्यूनल में चल रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा 52 मामले पटना से हैं।’

सैयद अफजल ने डाकबंगला चौराहे के पास वक्फ बोर्ड की हजारों करोड़ रुपए की जमीन का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस जमीन को अवैध रूप से बेच दिया गया और कब्जा भी कर लिया गया। यह मामला कोर्ट में है और फैसला जिसके पक्ष में आएगा, जमीन उसी की होगी।’

वक्फ की प्रॉपर्टी पर कब्जे को बढ़ावा मिलेगा: नए बदलावों में एक्ट की धारा 107 को हटाने और वक्फ की प्रॉपर्टीज को 1963 के लिमिटेशन एक्ट के दायरे में लाने का प्रावधान है। रिटायर्ड सरकारी ऑफिसर अकरमुल जब्बार खान के मुताबिक, ‘अगर किसी ने 12 साल या उससे ज्यादा समय से वक्फ की किसी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर रखा है, तो लिमिटेशन एक्ट के चलते वक्फ बोर्ड इसके खिलाफ कानूनी मदद नहीं ले पाएगा।’

वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार खत्म होंगे: सुप्रीम कोर्ट के वकील फुजैल अय्यूबी के मुताबिक, नए बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल्स को वक्फ मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार खत्म कर दिया गया है। इसे ऐसे देखा जा सकता है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT को पर्यावरण से जुड़े मामलों में और इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी ITAT को टैक्स से जुड़े मामलों में आखिरी फैसला न करने मिले।

फतुहा के गोविंदपुर में नए बिल से लोग खुश

फतुहा के गोविंदपुर में 19 डिसमिल जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। वहां के मुतवल्ली बबलू मियां ने दावा किया था कि यह जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड की है। उनके अनुसार, 1959 में 21 डिसमिल जमीन का रजिस्ट्री वक्फ बोर्ड के नाम पर हुआ था, जिसमें से 2 डिसमिल जमीन बाद में बाजार समिति को चली गई। अब बचे 19 डिसमिल जमीन पर वक्फ बोर्ड अपना अधिकार जता रहा है। यह विवाद प्लॉट नंबर 217, 219 और 199 से जुड़ा है, जहां एक मजार भी स्थित है।

हालांकि, लोगों का दावा है कि वे पिछले 100 सालों से वहां रह रहे हैं और यह उनकी पुश्तैनी जमीन है। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड का दावा पूरी तरह झूठा है।

निरंजन प्रसाद ने कहा, ‘2021 में वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर अपना दावा ठोका था। इसके बाद हम कोर्ट गए और सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमीन पर स्टे लगा दिया। अब इस बिल से उम्मीद है कि हमारी जमीन सुरक्षित रहेगी।’

गोविंदपुर में लोग पटाखा फोड़कर और मिठाई बांटकर बिल का स्वागत करते दिखे। इसमें कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल थे।

रंजीत कुमार ने कहा, ‘मेरी अपनी जमीन को वक्फ बोर्ड ने अपनी बताकर मुझे खाली करने का नोटिस भेज दिया था। इस बिल के पारित होने से अब कोई हमारी जमीन नहीं छीन सकता। नए नियमों से फर्जी दावों पर रोक लगेगी।”

स्थानीय वार्ड पार्षद जितेंद्र कुमार ने कहा, ‘मुतवल्ली बबलू मियां ने गैर-मजरुआ जमीन और रैयती जमीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताकर दावा किया था। पास में एक दरगाह होने की वजह से वक्फ बोर्ड इसे अपनी जमीन बताता रहा। पहले वक्फ बोर्ड की मनमानी चलती थी। किसी भी जमीन को अपनी बताकर कब्जा कर लिया जाता था। अब इस संशोधन से ऐसी मनमानी पर रोक लगेगी।”

रौशन खातून का कहना है, ‘हम गैर-मजरुआ जमीन पर रहते हैं, जिसका पट्टा कटवाते हैं। सरकारी जमीन को भी वक्फ बोर्ड अपनी बताकर हमें नोटिस भेजता था। अब इस बिल से हमें राहत मिलेगी।’

वहीं, अफ्सरी खातून ने कहा, “हम लोग 100 सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं। यह सरकारी जमीन है, लेकिन वक्फ बोर्ड इसे अपना बताकर हमें खाली करने का नोटिस भेजता है। बार-बार कहते थे कि खाली करो नहीं तो घर पर बुलडोजर चला देंगे। अब हमें उम्मीद है कि हमारी जमीन पर कोई कब्जा नहीं करेगा।’

फतुहा में वक्फ बोर्ड के अन्य दावे

गोविंदपुर के अलावा फतुहा के कई अन्य इलाकों में भी वक्फ बोर्ड ने जमीनों पर दावा किया था। स्टेशन रोड और पटना-बख्तियारपुर पुरानी सड़क के पीछे की जमीनों पर भी वक्फ बोर्ड ने अपना अधिकार जताया था।

हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के बाद इन सभी मामलों को खारिज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि नए संशोधन से अब वक्फ बोर्ड की ओर से फर्जी दावों की संभावना खत्म हो जाएगी।



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