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कुरुक्षेत्र में पितरों के मोक्ष का महापर्व आरंभ: DC करेंगी चैत्र-चौदस मेले का उद्घाटन; मुख्य स्नान कल; श्रद्धालु करेंगे पिंडदान-तर्पण – Kurukshetra News


पितृ मोक्ष के लिए सरस्वती तीर्थ में स्नान कर पिंडदान और तर्पण करेंगे श्रद्धालु।

कुरुक्षेत्र में पितरों के अक्षय मोक्ष का 3 दिवसीय पर्व आरंभ हो चुका है। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पवित्र स्नान, पिंडदान और तर्पण से अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर प्रशासन

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धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत

त्रयोदशी के दिन से ही श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ पर स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। जो श्रद्धालु आज पहुंचे हैं, वे रातभर रुककर कल मुख्य स्नान के बाद पिंडदान और तर्पण करेंगे। चतुर्दशी को पिशाच मोचनी चौदस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पितरों की आत्मा को मुक्ति देने के लिए श्रद्धालु स्नान, ध्यान, पिंडदान, गति कर्म, तर्पण और दीपदान करेंगे। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

DC नेहा सिंह मेले का उद्घाटन करेंगी।

मेले का उद्घाटन करेंगी DC

SDM कपिल कुमार के मुताबिक, DC नेहा सिंह सूचना प्रसारण केंद्र बाल भवन में मेले का उद्घाटन करेंगी। प्रशासन द्वारा मेले की सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। मेले के बाद भी सफाई कार्य जारी रहेगा ताकि नगर में स्वच्छता बनी रहे।

मुख्य स्नान कल, उमड़ेगी भीड़

चतुर्दशी के दिन 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र सरस्वती तीर्थ में स्नान कर अपने पितरों के मोक्ष की कामना करेंगे। इसके बाद अमावस्या के दिन भी तीर्थ में स्नान का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की ओर से भंडारे और सेवा शिविर लगाए गए हैं।

श्रद्धा और आस्था का महासंगम

पिहोवा का यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी है। मान्यता है कि यहां स्नान और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मेला हिंदु-सिख एकता का प्रतीक है, क्योंकि मेले में अधिकतर सिख श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं। पुराने समय से परंपरा चलती आ रही है।



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