केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावित आदिवासियों का पन्ना में जल-सत्याग्रह बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला रमिया आदिवासी की मौत हो गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का कहना है कि घर टूटने, मुआवजा नहीं मिलने और गांव डूबने के डर से रमिया तनाव में थीं। वे 12 सितंबर को प्रदर्शन में शामिल थीं। आंदोलन में करीब 400 लोग पानी के बीच लकड़ियों के ढांचे पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई आंदोलनकारियों ने गले में सांकेतिक फंदा डाल रखा है। उनका कहना है- ‘न्याय दो या मार दो।’ प्रशासन बोला- बीमारी से हुई मौत, मुआवजा पहले ही दिया जा चुका अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को ने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव के अनुसार रमिया की मौत मंगलवार रात करीब 10 बजे घर पर अचानक पेट दर्द होने से हुई थी। जल संसाधन विभाग के मुताबिक मझगाय परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि के *₹28.70 लाख, मकान के ₹15.23 लाख और पुनर्वास मद में ₹5 लाख* का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। आंदोलनकारी अमित भटनागर का कहना है कि करीब 4 महीने पहले रमिया का घर टूट गया था। अब पानी बढ़ने से गांव डूबने के डर और बेघर होने के सदमे में वह बेहद चिंतित थीं। उन्होंने दो-तीन दिन पुराना एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें रमिया घर डूबने के गम और खाना नहीं खा पाने की बात कहती दिख रही हैं। घरों में पानी घुसा, कई मकान ढहे; बिजली काटने का आरोप अजयगढ़ इलाके में मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन के निर्माण से सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं। जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं और घरों में पानी घुस गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रदर्शन को दबाने के लिए क्षेत्र की बिजली तीन दिन से बंद है। उनका कहना है कि कुंवरपुर, बालूपुर, बनेहरी और विश्रामगंज गांव डूब गए हैं। कई मकान ढह चुके हैं और खेती बर्बाद हो गई है। विस्थापितों के प्रदर्शन की 5 तस्वीरें देखिए… ₹12.50 लाख के पुनर्वास पैकेज पर विवाद आंदोलनकारियों का मुख्य सवाल पुनर्वास राशि को लेकर है। उनका कहना है कि छतरपुर के कुपी गांव में जुलाई में हुए विरोध के बाद सरकार ने पुनर्वास पैकेज ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.50 लाख प्रति परिवार करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद कई परिवारों को बढ़ी हुई राशि नहीं मिली है। अजयगढ़ प्रशासन के मुताबिक पात्र विस्थापित परिवारों को नियमानुसार भुगतान किया जा चुका है। एसडीएम के अनुसार रुंझ सिंचाई परियोजना के तहत विश्रामगंज के 670 विस्थापित परिवारों को ₹5 लाख प्रति परिवार दिए गए हैं। मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बालूपुर, कुंवरपुर और बनेहरी के 1219 विस्थापित परिवारों को पात्रता के अनुसार भुगतान किया गया है। प्रशासन का दावा है कि अब तक कुल 1889 पात्र परिवारों के खातों में राहत राशि भेजी जा चुकी है। ₹5 लाख पाने वालों को अतिरिक्त ₹7.50 लाख देने का दावा एसडीएम आलोक मार्को के अनुसार जिन विस्थापितों को पहले ₹5 लाख मिल चुके हैं, उन्हें नए नियम के तहत अतिरिक्त ₹7.50 लाख का अंतर भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए कुंवरपुर, झगराहा और विश्रामगंज में विशेष प्रशासनिक कैंप लगाए जा रहे हैं। पात्र ग्रामीणों को शपथ पत्र, लिखित सहमति और संयुक्त बैंक खाते की जानकारी जमा करनी होगी। इसके बाद राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी। जमीन के रिकॉर्ड और पात्रता पर भी सवाल आंदोलनकारियों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना जमीन ली गई। विरोध करने पर धारा 163 के तहत कार्रवाई और मुकदमे दर्ज किए गए। उनका यह भी आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में उपजाऊ सिंचित जमीन को असिंचित दर्ज किया गया, जिससे मुआवजे में उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। एक तरफ प्रशासन 1889 परिवारों को भुगतान का दावा कर रहा है, वहीं विस्थापित परिवार पानी में उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी सरकारी दावों और जमीन पर अपनी स्थिति में अंतर होने की बात कह रहे हैं। फिलहाल विवाद पुनर्वास राशि, जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक पात्रता को लेकर है।