पुणे3 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
ये तस्वीर एक पब के CCTV फुटेज की है। हादसे से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और कार लेकर निकल गया।
दिल्ली के एक कॉलेज ने पुणे पोर्श केस के नाबालिग आरोपी का एडमिशन कैंसिल कर दिया। आरोपी के वकील ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) को बताया कि आरोपी ने इसी साल 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास की है। उसने दिल्ली के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) कोर्ट के लिए अप्लाई किया था।
इंस्टीट्यूट ने आरोपी को एडमिशन दिया था, लेकिन बाद में कैंसिल कर दिया। इंस्टीट्यूट ने एडमिशन के लिए जुवेनाइल बोर्ड से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मांगी, जो पुणे पोर्श केस मामले की सुनवाई कर रही है।
मामले की जांच कर रहे असिस्टेंट कमिश्निर ऑफ पुलिस (क्राइम) गणेश इंगले ने गुरुवार को बताया कि आरोपी के वकील ने एडमिशन के मुद्दे पर जुवेनाइल बोर्ड में याचिका दायर की थी। उन्होंने बोर्ड से दिशा-निर्देश मांगे, लेकिन बाद में याचिका वापस ले ली। वकील ने कहा कि अब आरोपी पुणे के कॉलेज में एडमिशन लेना चाहता है।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 18 मई की रात 17 साल 8 महीने के एक लड़के ने IT सेक्टर में काम करने वाले बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मारी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई थी। घटना के समय आरोपी नशे में था। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था।
नाबालिग आरोपी हादसे की रात 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था।
पुलिस ने नाबालिग पर सबूत मिटाने, जालसाजी करने का मामला जोड़ा पुणे पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के सामने गुरुवार, 26 सितंबर को सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट सब्मिट की। पुलिस ने नाबालिग आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 201 (सबूत मिटाने), 213 (अपराधी को छिपाने के लिए उपहार लेना), 214 (अपराधी को छिपाने के लिए उपहार या संपत्ति वापस देने की पेशकश), 466, 467, 468, 471 (जालसाजी से जुड़े अपराध) के तहत आरोप जोड़े हैं।
इसके अलावा नाबालिग आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। उस पर अपने माता-पिता, ससून अस्पताल के डॉक्टरों और कुछ दलालों के साथ मिलकर अपने खून के सैंपल बदलने का आरोप है, ताकि यह छिपाया जा सके कि घटना के समय वह नशे में था।
साथ ही पुलिस ने घटना के समय कार की स्पीड से जुड़ा टेक्निकल डेटा और गवाहों के बयान भी शामिल किए हैं। इससे पहले जून में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट सब्मिट की थी, जिसमें नाबालिग पर IPC के सेक्शन 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का चार्ज लगाया गया था।
ये हादसे वाली जगह के पास का CCTV फुटेज है। इसमें तेज रफ्तार पोर्श कार सड़क से गुजरती दिख रही है।
पोर्श मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी पुणे पुलिस के अनुसार, अब तक मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुणे पुलिस ने 25 जुलाई में 7 लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने, सबूत मिटाने और ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में केस दर्ज किया था। इनमें नाबालिग के माता-पिता, ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टर, एक कर्मचारी और दो बिचौलिए शामिल हैं।
25 जून: हाईकोर्ट ने 3 आधार पर नाबालिग को जमानत दी थी…
1. हाईकोर्ट ने कहा- आरोपी की उम्र 18 साल से कम, उसे ध्यान में रखना जरूरी आरोपी लड़के की आंटी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रिहाई की याचिका लगाई थी। इस याचिका में कहा गया था कि लड़के को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उसे तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। जस्टिस भारती डांगरे और मंजुशा देशपांडे ने आरोपी को ऑब्जर्वेशन होम भेजने के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया था।
बेंच ने यह भी नोट किया था कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का आदेश अवैध था और बिना जुरिस्डिक्शन के जारी किया गया था। एक्सीडेंट को लेकर रिएक्शन और लोगों के गुस्से के बीच आरोपी नाबालिग की उम्र पर ध्यान नहीं दिया गया। CCL 18 साल से कम उम्र का है, उसकी उम्र को ध्यान में रखना जरूरी है।
2. कोर्ट बोला- नाबालिग आरोपी के साथ बड़े आरोपियों जैसा बर्ताव नहीं कर सकता कोर्ट ने कहा था कि हम कानून और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के उद्देश्य से बंधे हुए हैं और हमें आरोपी के साथ वैसे ही पेश आना होगा, जैसे हम कानून का उल्लंघन करने वाले किसी और बच्चे के साथ पेश आते। फिर चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो। आरोपी रिहैबिलिटेशन में है, जो कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट मुख्य उद्देश्य है। वह साइकोलॉजिस्ट की सलाह भी ले रहा है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
3. कोर्ट ने कहा था- एक्सीडेंट के बाद से आरोपी भी सदमे में है कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि, ये सही है कि इस एक्सीडेंट में दो लोगों की जान गई, लेकिन ये भी सच है कि नाबालिग बच्चा भी सदमे में है। कोर्ट ने पुलिस से भी पूछा था कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने किस नियम के आधार पर अपने बेल ऑर्डर में बदलाव किया था। बेंच ने नोट किया था कि पुलिस ने जुवेनाइल बोर्ड के जमानत के आदेश के खिलाफ किसी ऊपरी अदालत में याचिका दाखिल नहीं की थी।
इसे लेकर कोर्ट ने पूछा कि यह किस तरह की रिमांड है? इस रिमांड के पीछे कौन सी ताकत का इस्तेमाल किया गया है। यह कौन सी प्रक्रिया है जिसमें एक शख्स को बेल मिलने के बाद उसे कस्टडी में भेजने का आदेश दिया जाता है।
नाबालिग को जमानत दे दी गई थी, लेकिन अब उसे ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया है। क्या ये बंधक बनाने जैसा नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि आपने किस ताकत का प्रयोग करके यह कदम उठाया है। हमें लगता था कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड जिम्मेदारी से काम करेगा।
900 पेज की चार्जशीट, नाबालिग का नाम नहीं पुणे पोर्श केस में 25 जुलाई को पुलिस ने 900 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, इसमें 17 साल के नाबालिग आरोपी का नाम शामिल नहीं किया गया। नाबालिग का मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) में है। 7 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है।
यह खबर भी पढ़ें..
झुग्गी के विवाद में महिला की हत्या, भाई-भाभी गिरफ्तार:आरोपी बोला- पहले बहन का गला घोंटा, सिर और हार-पैर काटे; नदी में मिला था शव
महाराष्ट्र के पुणे में मुथा नदी में 26 अगस्त को महिला का सिर और हाथ-पैर कटा शव मिला था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू की थी। रविवार (1 सितंबर) को पुणे पुलिस ने हत्या का खुलासा किया। जॉइंट पुलिस कमिश्नर रंजन कुमार शर्मा ने बताया कि महिला की हत्या संपत्ति विवाद में की गई थी। हत्यारे महिला के भाई-भाभी हैं। उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
कमिश्नर रंजन कुमार शर्मा ने कहा कि मृतक महिला का नाम सकीना खान (48) है। उसके ही भाई अशफाक खान ने पत्नी हमीदा के साथ सकीना की हत्या की थी। सकीना का गुम होने पर परिवार के लोगों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की थी, इसमें अशफाक और हमीदा पर शक हुआ था।
पूरी खबर पढ़ें..